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नीतीश की कैबिनेट में किसे कौन सा मंत्रालय मिला, लिस्ट आ गई है

बिहार में 16 नवंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत 15 मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) कोटे से सात, जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) से छह, विकासशील इंसान पार्टी (VIP) और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) से एक-एक मंत्री बनाए गए हैं. अब इनके पोर्टफोलियो का आवंटन अगले आदेश तक हो गया है. आपको बताते हैं, किसे कौन सा मंत्रालय/विभाग मिला.

1. नीतीश कुमार- मुख्यमंत्री

सामान्य प्रशासन
गृह
मंत्रिमंडल सचिवालय
निगरानी
निर्वाचन
ऐसे सभी विभाग जो किसी को आवंटित नहीं हैं.

बीजेपी कोटे से मंत्री-

2. तारकिशोर प्रसाद- उपमुख्यमंत्री

 

वित्त विभाग
वाणिज्य कर
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन
सूचना प्रावैधिकी
आपदा प्रबंधन

नगर विकास एवं आवासकटिहार से विधायक तारकिशोर प्रसाद को बीजेपी के विधानमंडल दल (विधानसभा और विधान परिषद) का नेता भी चुना गया था. 64 साल के तारकिशोर प्रसाद 2005 से कटिहार से जीतते आ रहे हैं. अबकी लगातार चौथी बार विधायक बने हैं. तारकिशोर का बैकग्राउंड RSS वाला रहा है. वो कलवार वैश्य समाज से आते हैं, जिसे बिहार में पिछड़ा वर्ग का दर्जा प्राप्त है. साथ ही उनकी व्यापारिक वर्ग में अच्छी पकड़ मानी जाती है.

3. रेणु देवी – उपमुख्यमंत्री

पंचायती राज
पिछड़ा वर्ग एवं अतिपिछड़ा वर्ग कल्याण
उद्योग

बेतिया से विधायक हैं रेणु देवी. उन्हें विधानमंडल दल का उपनेता चुना गया था. रेणु देवी पहली बार 2000 में बेतिया से विधायक बनी थीं. अबकी लगातार पांचवीं बार यहां से जीती हैं. इनका भी संघ से जुड़ाव रहा है. केंद्र से भी इनका अच्छा तालमेल माना जाता है. पहले भी राज्य में मंत्री पद संभाल चुकी हैं.

4. मंगल पांडेय

स्वास्थ्य
कला, संस्कृति एवं युवा
पथ निर्माण

मंगल पांडेय बिहार विधान परिषद के सदस्य हैं. पिछली सरकार में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री थे. कोरोना काल में राज्य में जिस तरह की अव्यवस्थाएं रहीं, उनके चलते मंगल पांडेय की काफी आलोचना हुई थी. लेकिन फिर से उन पर भरोसा जताते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय दिया गया है.

5. अमरेंद्र प्रताप सिंह

कृषि
सहकारिता
गन्ना उद्योग

अमरेंद्र प्रताप सिंह पहली बार मंत्री बने हैं. अमरेंद्र आरा से चौथी बार विधायक चुने गए हैं. पहले चर्चा थी कि अमरेंद्र प्रताप को स्पीकर की ज़िम्मेदारी दी जा सकती है. लेकिन जब नंदकिशोर यादव ने मंत्री बनने से मना कर दिया तो इन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया गया.

6. रामप्रीत पासवान

लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण

राजनगर सीट से जीतकर डॉ. रामप्रीत पासवान विधानसभा पहुंचे हैं. उन्होंने राजद के राम अवतार पासवान को हराया था. 2015 में भी रामप्रीत इसी सीट से जीते थे. हालांकि उससे पहले 2010 में उन्हें हार मिली थी.

7. जीवेश मिश्रा

श्रम संसाधन
पर्यटन
खान एवं भूतत्व

जीवेश मिश्रा इसी साल ख़ासा चर्चा में आए थे, जब अप्रैल में वो लॉकडाउन तोड़कर दिल्ली से दरभंगा पहुंच गए थे. जाले विधानसभा सीट से विधायक हैं. पिछली बार भी यहीं से जीते थे.

8. रामसूरत राय

राजस्व एवं भूमि सुधार
विधि

औराई विधानसभा से 45 हजार से भी ज्यादा वोटों से जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं. पिछले चुनाव में रामसूरत राय को आरजेडी के सुरेंद्र कुमार के हाथों करीब 11 हजार वोटों से हार मिली थी. इस बार सुरेंद्र कुमार को आरजेडी का टिकट नहीं मिला तो वे निर्दलीय मैदान में उतर गए. इन सभी समीकरणों का रामसूरत राय को फायदा मिला और जोरदार जीत हासिल की.

जेडीयू कोटे से मंत्री-

9. विजेंद्र यादव

ऊर्जा
मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन
योजना एवं विकास
खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण

 

विजेंद्र यादव बिहार की सुपौल विधानसभा से आठवीं बार विधायकी जीते हैं. जेपी आंदोलन से बिहार में अपनी राजनीतिक पारी शुरू करने वाले विजेंद्र यादव 1990 के बाद से सुपौल में कभी नहीं हारे. राजनीति की शुरुआत जनता पार्टी से की थी, फिर जदयू में आ गए. नीतीश के करीबी लोगों में से हैं. उनकी पिछली सरकार में आबकारी और ऊर्जा जैसे विभाग संभाल चुके हैं.

10. अशोक चौधरी

भवन निर्माण
समाज कल्याण
विज्ञान एवं प्रावैधिकी
अल्पसंख्यक कल्याण

नीतीश की पिछली सरकार में भवन निर्माण मंत्री थे. पिछले साल यानी 2019 में ही अशोक चौधरी को जद(यू) का कार्यकारी अध्यक्ष भी बनाया गया था. प्रदेश में जद(यू) की चुनावी रणनीतियों का अहम हिस्सा रहे हैं.

11. विजय कुमार चौधरी

ग्रामीण कार्य
संसदीय कार्य
ग्रामीण विकास
जल संसाधन
सूचना एवं जन-संपर्क

विजय कुमार चौधरी सरायरंजन सीट से जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं. विजय कुमार पिछली सरकार में विधानसभा अध्यक्ष थे. 2010 से लेकर 2015 तक बिहार में मंत्री भी रहे हैं. कृषि, सूचना और जल संसाधन जैसे मंत्रालय संभाले हैं. इस बार फिर उन्हें मंत्रालय में शामिल किया गया है.

12. मेवालाल चौधरी

शिक्षा

मेवालाल चौधरी बिहार की तारापुर विधानसभा क्षेत्र से जेडीयू के विधायक हैं. मेवालाल चौधरी 2015 से पहले तक पेशे से शिक्षक थे. बिहार कृषि विश्वविद्यालय में वीसी भी रहे. रिटायर होने के बाद 2015 में तारापुर से जेडीयू के टिकट पर जीते. इस बार दूसरी बार विधायक बने हैं. उन पर एक बड़ा आरोप भी है. वीसी रहते हुए शिक्षक भर्ती में धांधली का. हालांकि जांच अभी चल रही है.

13. शीला मंडल

परिवहन

फुलपरास से पहली बार विधायक बनीं और पहली बार में ही मंत्री भी बन गईं. 2015 में इस सीट से जेडीयू की गुलजार देवी जीती थीं. पार्टी ने इस बार उन्हें टिकट नहीं दिया तो नाराज होकर उन्होंने निर्दलीय लड़ने का फैसला किया. टिकट मिला शीला मंडल को, और जीत भी. उन्होंने कांग्रेस के कृपानाथ पाठक को करीब 11 हजार वोट से हराया.

हिंदुस्तानी अवामी मोर्चा (HAM) से मंत्री-

14. संतोष कुमार सुमन

लघु जल संसाधन
अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण

बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके जीतनराम मांझी के बेटे हैं संतोष. इस बार जब हम से एक मंत्री बनना तय हुआ तो जीतन राम मांझी ने बेटे का नाम आगे किया. संतोष राजनीति शास्त्र से एमए हैं. पीएचडी भी की है. फिलहाल बिहार विधान परिषद के सदस्य हैं.

विकासशील इंसान पार्टी (VIP) से मंत्री-

15. मुकेश सहनी

पशु एवं मत्स्य संसाधन

मुकेश सहनी VIP के मुखिया हैं. सिमरी बख्तियारपुर विधानसभा सीट से सहनी चुनाव हार गए. हालांकि अब चूंकि मंत्री पद की शपथ दिलाई जा चुकी है, तो वे जल्द ही विधान परिषद सदस्य बन सकते हैं. हालांकि सहनी की पार्टी का प्रदर्शन ठीक रहा. इस बार एनडीए के साथ 11 सीटों पर उनकी पार्टी लड़ी थी. जिसमें 4 सीटें उनके खाते में गईं.


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