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बिहार: अमित शाह ने वर्चुअल रैली में तेजस्वी को घेरा, कहा-लालटेन राज से एलईडी युग में आ गए

बिहार में इस साल विधानसभा चुनाव होना है. राजनीतिक दल भी इसकी तैयारियों में लग गए है. गृहमंत्री और बीजेपी नेता अमित शाह ने इसी संबंध में 7 जून को वर्चुअल रैली की. यानी इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया. इस रैली का नाम था बिहार जनसंवाद रैली. बिहार चुनावों को लेकर बीजेपी की ओर से यह पहली रैली है.

अपनों को सराहा, विपक्ष को कोसा

रैली में शाह ने मोदी सरकार के काम गिनाए. साथ ही नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली बिहार सरकार की तारीफ भी की. विपक्ष पर हमले किए. राहुल गांधी और लालू यादव पर निशाना साधा. हालांकि उन्होंने कहा कि यह चुनावी रैली नहीं है. लेकिन शाह का भाषण बता रहा था कि यह चुनाव की तैयारी ही है.

अमित शाह ने क्या कहा

# आज जब वर्चुअल रैली के माध्यम से आपसे संवाद कर रहा हूं. तब कुछ लोगों ने अभी थाली बजाकर इस रैली का स्वागत किया है. मुझे अच्छा लगा कि देर-सवेर मोदी जी की अपील को उन्होंने माना.

# इस रैली का चुनाव से कोई संबंध नहीं है. भाजपा लोकतंत्र में विश्वास रखती है. कोरोना संकट में हम जन संपर्क के अपने संस्कार को भुला नहीं सकते.

# देश के एक नेता की अपील पर बिना पुलिस बल प्रयोग के पूरे देश ने घर के अंदर रहकर अपने नेता की अपील का सम्मान किया. इसलिए जनता कर्फ्यू स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा.

# लाल बहादुर शास्त्री के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ही एक मात्र ऐसे नेता हैं, जिनकी एक आवाज़ पर लोगों ने घर के अंदर रहकर थाली बजाई, दिया जलाया.

# पहले सीमा पर कोई भी घुस आता था. सैनिकों के सिर काटकर ले जाता था. लेकिन दिल्ली दरबार में कुछ नहीं होता था. हमारी सरकार में भी उरी और पुलवामा हुआ. लेकिन हमने सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक की.

# दुनिया ने माना कि अमेरिका और इजराइल के बाद कोई देश अपनी सीमाओं की रक्षा कर सकता है तो वह भारत है.

# जहां हुए बलिदान मुखर्जी, वह कश्मीर हमारा है, यह केवल नारा नहीं था. इसे मोदीजी ने सच करके दिखाया.

# मोदी सरकार ने प्रवासी मजदूरों के लिए 11 हज़ार करोड़ रुपये दिए. कोरोना महामारी में कुछ मजदूरों के पैदल लौटने की खबर आई तो उनके लिए गाड़ी की व्यवस्था की गई.

# करीब 1.25 करोड़ प्रवासी मजदूरों को हजारों ट्रेनों के माध्यम से उनके घरों तक पहुंचाया. उनके लिए भोजन की व्यवस्था की गई, पीने के पानी की व्यवस्था की गई. उनके गृह राज्यों में क्वारंटाइन की व्यवस्था की गई.

# विपक्ष को प्रवासी मजदूरों के मुद्दे पर राजनीति करनी है तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है. लोगों को (तेजस्वी) को बताना चाहिए कि कोविड-19 महामारी के दौरान वह दिल्ली में थे या कहां थे? उन्हें बताना चाहिए था कि उन्होंने प्रवासी मजदूरों के लिए क्या किया?

# राहुल गांधी हमेशा कहते थे कि किसानों का कर्ज माफ करो. 10 साल उनकी सरकार रही थी. वे दावा करते हैं कि करीब 3 करोड़ किसानों का 60 हजार करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया. वहीं मोदी सरकार ने साढ़े 9 करोड़ किसानों को 72 हजार करोड़ रुपये दिए. यह पैसा किसान सम्मान निधि योजना के तहत दिया.

#  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में कहा था उनकी सरकार गरीबों, दलितों, आदिवासियों के लिए काम करेगी. कुछ लोगों ने इंदिरा गांधी को कोट करके कहा था कि वह भी गरीबी हटाओ की बात करती थीं, लेकिन वह चली गईं, लेकिन गरीबी वहीं की वहीं रह गई. उन लोगों को मालूम नहीं था कि ये वचन नरेंद्र मोदी का है. जो वह बोलते हैं, उसे करते हैं.

# देश का कोई भी कोना हो, उसके विकास की नींव में बिहार के व्यक्ति के पसीने की महक है. जो लोग उन्हें अपमानित करते हैं वे प्रवासी मजदूरों के जज्बे को नहीं समझते हैं.

# परिवारवादी लोगों को अपना चेहरा आइने में देखना चाहिए. इनके शासन में बिहार की विकास दर 3.19 प्रतिशत थी. आज नीतीश कुमार के नेतृत्व में विकास दर 11.3 प्रतिशत है.

# नीतीश कुमार और सुशील मोदी दोनों प्रसिद्धि करने में थोड़े से कच्चे हैं. ये रोड पर खड़े होकर थाली नहीं बजाते हैं. ये चुपचाप सहायता के लिए काम करने वाले लोग हैं.

# हम लालटेन राज से एलईडी युग में, लूट एंड ऑर्डर से लॉ एंड ऑर्डर में, लाठी राज से कानून राज, जंगलराज से जनता राज, बाहुबल से विकास बल, चारा घोटाले से डीबीटी तक आए हैं.

# बिहार में दो-तिहाई बहुमत से एनडीए सरकार आएगी.

रैली को लेकर इंतजाम

रैली को लेकर बिहार बीजेपी मुख्यालय में खास इंतजाम किए गए. कार्यक्रम का संचालन पटना से हुआ. इस दौरान बिहार बीजेपी के सभी बड़े नेता पटना में मौजूद थे. इनमें प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय जयसवाल, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी शामिल थे वहीं अमित शाह और बाकी नेता दिल्ली से जुड़े. रैली का प्रसारण बीजेपी के यूट्यूब, फेसबुक, टि्वटर पेज और नमो ऐप के जरिए किया गया. बीजेपी का कहना है कि इसका प्रसारण बिहार के 72 हजार बूथों में किया गया. करीब 5 लाख कार्यकर्ता इससे जुड़े.

विपक्ष का हल्ला बोल

बीजेपी की वर्चुअल रैली पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने हमला बोला. राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि देश इस समय गंभीर समस्या से जूझ रहा है. लेकिन बीजेपी को रैली की चिंता है. उन्होंने कहा कि बीजेपी को सिर्फ चुनावी जीत से मतलब है, फिर चाहे कोई मरे या जिए.

तेजस्वी ने रैली से पहले कहा था कि बीजेपी इस रैली पर 144 करोड़ रुपये खर्च कर रही है. उन्होंने कहा कि रैली का प्रसारण 72 हजार बूथ पर होगी. इसके लिए सभी बूथ पर एलईडी स्क्रीन लगाई जाएगी. एक एलईडी स्क्रीन पर औसत ख़र्च 20 हजार रुपये है. इस तरह 144 करोड़ सिर्फ़ एलईडी स्क्रीन पर खर्च किए जा रहे हैं. राजद ने रविवार यानी 7 जून को रैली से थाली बजाकर भी विरोध जताया.

साल के आखिर में चुनाव संभव

बिहार में इस साल अक्टूबर या नवंबर में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं. शाह की ऑनलाइन रैली को बिहार में बीजेपी के चुनाव प्रचार के आगाज के रूप में देखा जा रहा है.


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