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इस साल के आख़िर तक मिलने लगेगी कोरोना की 'मेड इन इंडिया' वैक्सीन!

कई देशों-कम्पनियों की जुगत के बाद अब भारत की भी एक कम्पनी कोरोना की वैक्सीन की दौड़ में आ गयी है. कम्पनी का नाम है भारत बायोटेक. हैदराबाद की कम्पनी है. दावा है कि कोरोना की वैक्सीन बन गयी है. और वैक्सीन का नाम है Covaxine.

इस Covaxine को बनाने में साथ में इंडियन काउन्सिल फ़ॉर मेडिकल रिसर्च (ICMR) और नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी (NIV) लगे हुए थे. अब ये ह्यूमन ट्रायल के दौर में है. इंडिया टुडे ने भारत बायोटेक के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक डॉ. कृष्णा एला से बात की. डॉक्टर साहब ने कहा है कि इस साल के आख़िर तक Covaxine रेडी हो जाएगी. और मार्केट में भी उपलब्ध रहेगी.

लेकिन एक पेच है. डॉक्टर एला ने कहा है कि ये जो समय सीमा हम दे रहे हैं, वो बस एक अनुमान है. क्यों? क्योंकि तेज़ी से वैक्सीन को बाज़ार में लाने के लिए कम्पनी ने क्लिनिकल ट्रायल का पहला और दूसरा चरण एक साथ शुरू किया है. इन दो चरणों को पूरा होने में कम से कम 4 महीनों का समय लगेगा. आगे डॉ. एला ने बताया है,

“अगर पहले और दूसरे चरण में हमारी आशा के अनुरूप परिणाम आते हैं, तो हम वो रिज़ल्ट लेकर जायेंगे अथॉरिटीज़ के पास. अगर वो इससे संतुष्ट होते हैं तो हम वैक्सीन का निर्माण शुरू कर देंगे. लेकिन अगर नहीं होते हैं, तो हमें तीसरे चरण के ट्रायल की शुरुआत करनी होगी.”

भारत बायोटेक के चेयरमैन डॉ. कृष्णा एला
भारत बायोटेक के चेयरमैन डॉ. कृष्णा एला

ट्रायल के प्रोटोकॉल के बारे में भी डॉ. एला ने बताया,

“हम 1200 लोगों के साथ वैक्सीन ट्रायल की शुरुआत करने वाले हैं. इन सभी लोगों का पहले कोरोना टेस्ट किया जाएगा, RT-PCR के ज़रिए. अगर वे टेस्ट में निगेटिव पाए जाते हैं, तो ही उन्हें वैक्सीन ट्रायल के लिए फिट माना जाएगा. उन्हें वैक्सीन दिया जाएगा. पहले दिन वैक्सीन का एक शॉट दिया जाएगा. फिर 14वें दिन दूसरा शॉट. और फिर 28वें दिन उनका सैम्पल लिया जाएगा. और इसके बाद कई-कई मौक़ों पर उन सैम्पल्स की जांच की जाएगी.”

भारत बायोटेक की वैक्सीन की जांच में कुछ अलग तरीक़ा भी अपनाया गया है. इसके बारे में डॉ. एला ने बताया,

“वैक्सीन देने के बाद अपने टेस्ट में आए लोगों को हम कोरोनावायरस से एक्सपोज़ नहीं करेंगे (जो कि आम ट्रायल में होता है). उनके अंदर वैक्सीन जाएगी, जिसमें कोरोना का मृत वायरस पड़ा हुआ है. शरीर को लगेगा कि बॉडी पर वायरस का हमला हुआ है. इम्यून सिस्टम इसके खिलाफ़ एंटीबॉडी बनाएगा. फिर हम इन लोगों का ब्लड सैम्पल लेंगे. उस सैम्पल में अलग से कोरोनावायरस छोड़ेंगे. अगर कोरोना वायरस उस ब्लड सैम्पल में अपनी संख्या नहीं बढ़ाता है, तो हम समझेंगे कि वैक्सीन काम कर गयी.”

इसके अलावा और कहां-कहां वैक्सीन को लेकर कुछ मज़बूत बढ़त हुई है?

चीन के SinoVac ने भी कोरोना की वैक्सीन बनायी है. इसको चायनीज़ आर्मी में ट्राई किया जाएगा. इसके अलावा अमरीका की कम्पनी Moderna ने भी ह्यूमन ट्रायल के पहले दो चरणों में सफलता पाई है. तीसरे चरण पर काम जारी है. साथ ही ब्रिटिश कम्पनी AstraZeneca का भी काम तेज़ है. AstraZeneca आक्स्फ़र्ड यूनिवर्सिटी द्वारा बनाई गयी वैक्सीन को लेकर ट्रायल के तीसरे चरण में है. WHO ने ख़ुद AstraZeneca और Moderna के बारे में कहा है कि ये दो कंपनियां वैक्सीन की रेस में सबसे आगे हैं.


वीडियो : कोरोना वैक्सीन: बंदरो पर सफल रहा टेस्ट, हमारे लिए गुड न्यूज़ किस महीने आए़गी?

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