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ऑटो को एम्बुलेंस बना मदद कर रहे जावेद पर पुलिस ने केस किया, हंगामे के बाद बैकफुट पर आना पड़ा

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल. यहां कोरोना मरीजों की मुफ़्त में मदद करने वाले ऑटो चालक जावेद पर पुलिस ने कार्रवाई कर दी. धारा 144 के उल्लंघन के आरोप में. लेकिन जब मामला तूल पकड़ने लगा, सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना होने लगी, तो पुलिस को अपने कदम पीछे खींचने पड़े. कार्रवाई वापस लेनी पड़ी.

मरीजों की मदद कर रहे थे जावेद

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बढ़ते कोरोना संक्रमण के कारण 7 मई तक कर्फ़्यू लगा हुआ है. धारा 144 लागू है. इस दौरान जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई है ताकि सामान्य गाड़ियां सड़कों पर न निकलें. इमरजेंसी गाड़ियों को ही इससे छूट है. आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार 1 मई को भोपाल के भानुपुर चौराहे पर पुलिस की चेकिंग चल रही थी. ऑटो चालक जावेद अपना ऑटो लेकर वहां पहुंचे. पुलिस ने उनसे बाहर निकलने का कारण पूछा. जावेद ने पुलिस को बताया कि वह ऑटो से लोगों को अस्पताल ले जाने का काम कर रहे हैं. उनके ऑटो में ऑक्सीजन सिलेंडर भी लगा हुआ है.

पुलिस ने जब जावेद से ऑटो के इस्तेमाल का इमरजेंसी पास मांगा तो वह नहीं दिखा पाए. इसके बाद जावेद के ख़िलाफ़ धारा 144 के उल्लंघन का मामला दर्ज कर दिया गया. जैसे ही ये मामला सामने आया, सोशल मीडिया पर लोग जावेद के ख़िलाफ़ हुई कार्रवाई का विरोध करने लगे.

भोपाल पुलिस ने क्या कहा?

इसके बाद शाम को ही भोपाल पुलिस को बयान जारी करना पड़ा. बयान में पुलिस ने बताया कि जावेद के खिलाफ धारा 188 के तहत जो केस लगाया गया था, उसे खारिज कर दिया गया है. भोपाल पुलिस ऑटो चालक जावेद के सेवा कार्य के लिए विशेष पास जारी कर रही है, जिससे उन्हें आने-जाने में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी.

पुलिस ने दावा किया कि भानुपुर चौराहे पर बैरिकेड लगाकर अनावश्यक घूमने वाले वाहनों को चेक किया जा रहा था. उसी दौरान खाली ऑटो लेकर जावेद आया और बैरिकेड हटाने लगा. पूछने पर कोई ठोस कारण भी नहीं बताया. पुलिस ने धारा 188 की कार्रवाई के तहत नोटिस दिया, और जावेद को छोड़ दिया. इस मामले में ना तो जावेद की गिरफ्तारी की गई, ना ही उसके ऑटो और उसमें रखे सिलेंडर को जब्त किया गया.

ऑटो एम्बुलेंस के लिए पत्नी के गहने बेच दिए

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, ऑटो चलाने वाले जावेद ने बताया कि वह पिछले करीब 30 दिन से कोरोना मरीजों और उनके परिवारों की मदद कर रहे हैं. कोरोना महामारी में लोगों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए वह कोई पैसा भी नहीं लेते. उन्होंने अपने ऑटो में ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था भी कर रखी है ताकि जिन मरीजों को ऑक्सीजन की दिक्कत नहीं हो.

जावेद ने बताया कि इस काम को शुरू करने के लिए उन्होंने अपनी पत्नी के गहने तक बेच दिए थे. उनका नंबर सोशल मीडिया पर उपलब्ध है. जब किसी को एम्बुलेंस नहीं मिलती, तब लोग उन्हें कॉल करके बुलाते हैं. वह फ्री में लोगों की मदद करते हैं. ऑटो को रोज़ सैनिटाइज करते हैं ताकि संक्रमण एक से दूसरे में ना फैले.


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