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जब एक सीरियल में इरफान को एक्टिंग करते देख आशुतोष गोवारिकर दंग रह गए

1985 में इरफ़ान ने ‘श्रीकांत’ टीवी सीरियल से कैमरे के आगे एक्टिंग शुरू की. बहुत सालों तक संघर्ष किया. तब जाकर इंडस्ट्री उनके टैलेंट को पहचान सकी, और उन्हें फिल्मों में मुख्य किरदार मिलने लगे. 2003 में उनकी फिल्म ‘हासिल’ और ‘मक़बूल’ आने के बाद. ज़्यादातर लोग टैलेंट को तभी पहचान पाते हैं जब वह एक बार हिट हो जाए. तब सभी लोग चढ़ते सूरज को सलाम करने लगते हैं. हालांकि सच्चा पारखी वह है, जो गुमशुदगी की गर्द से ढके हुए हीरे को भी पहचान ले. बॉलीवुड डायरेक्टर आशुतोष गोवरिकर ने इरफ़ान के बारे में कुछ ऐसी ही बात कही है.

आशुतोष ‘लगान’, ‘स्वदेस’, ‘जोधा अकबर’ जैसी फिल्में बनाने के लिए फेमस हैं. शुरुआत में एक्टर बनना चाहते थे. जिस फिल्म से आमिर खान ने 1984 में एक्टिंग डेब्यू किया, वह आशुतोष की भी पहली फिल्म थी. केतन मेहता द्वारा डायरेक्ट की गई इस फिल्म का नाम था ‘होली’. उसके बाद उन्होंने संजय दत्त स्टारर ‘नाम’, ‘वेस्ट इज़ वेस्ट’, ‘कच्ची धूप’ फिल्मों में रोल किए. 1988 में उन्हें एक टीवी सीरियल मिला. ‘भारत की खोज’. यह सीरियल भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की लिखी हुई किताब ‘डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया’ पर बेस्ड था. इसे डायरेक्ट कर रहे थे जाने-माने डायरेक्टर श्याम बेनेगल. शूटिंग के दौरान आशुतोष का ध्यान एक एक्टर पर गया. यह बात उन्होंने ट्विटर पर बताई है:

“एक एक्टर की हैसियत से मैं 1988 के ‘डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया’ से जुड़ा हुआ था. जिसे श्याम बेनेगल बाबू ने डायरेक्ट किया था. एक दिन मैंने अकबर और उनके इतिहासकार बदायूनी के बीच एक सीन देखा. बदायूनी का रोल किसी अनजान एक्टर से शानदार तरीके से निभाया था. मैंने एक असिस्टेंट से पूछा. मुझे बताया गया कि इनका नाम इरफ़ान खान है. तब से उनका फैन हूं.” 

लोगों ने दिए रिएक्शन

एक यूज़र ने आशुतोष की तारीफ में कहा कि उनमें टैलेंट को पहचानने वाली नज़र है.

इतने में किसी दूसरे ने सवाल पूछ लिया. कि अगर आशुतोष 1988 से ही इरफ़ान के फैन थे, तो उन्हें कभी अपनी फिल्मों में रोल क्यों नहीं दिया?

आशुतोष और इरफ़ान ने 1989 की फिल्म ‘कमला की मौत’ में भी साथ काम किया था. इस फिल्म में पंकज कपूर और सुप्रिया पाठक लीड रोल में थे. 1993 में आशुतोष ने ‘पहला नशा’ फिल्म से डायरेक्शन की शुरुआत की. 1995 में आमिर खान और ममता कुलकर्णी को लीड रोल में लेकर ‘बाज़ी’ फिल्म बनाई. 2001 में आई उनकी फिल्म ‘लगान’. जिसने उनके करियर को नई ऊंचाई दी. 2019 में उनकी डायरेक्शन में बनी हुई ‘पानीपत’ फिल्म रिलीज़ हुई. बतौर एक्टर, उन्होंने 1998-99 में ‘सी.आई.डी.’ टीवी सीरीज़ में रोल करने के बाद एक्टिंग से ब्रेक ले लिया. उसके बाद 2016 की मराठी फिल्म ‘वेंटिलेटर’ में भी दिखाई दिए.


वीडियो देखें – तस्वीर: इरफ़ान की याद में कहे ये शब्द भावुक करते हैं

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