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वो 6 उदाहरण जो साबित करते हैं कि सरकार किसानों के लिए सिर्फ जुमला लेकर आती है

गुजरात के अमरेली जिले में 2 दिन पहले गुस्साए किसानों ने हजारों क्विंटल प्याज सड़क पर फेंक दिया. क्योंकि उन्हें उनकी फसल की उचित कीमत नहीं मिल रही है. सड़क पर प्याज फेंककर किसान एक तो अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं और दूसरी तरफ सरकार का ध्यान अपनी तरफ खींचना चाहते हैं. सरकार को बातों से ही फुर्सत नहीं है. काम ऐसे हैं कि किसान गरीब ही होते जाएंगे. क्योंकि फसलें दबा के हुई हैं, फिर भी उचित कीमत पर बेच नहीं सकते.

प्याज की पैदावार में देश में महाराष्ट्र के बाद गुजरात का ही नंबर आता है. इस बार गुजरात के अमरेली और भावनगर जिले में प्याज की पैदावार अच्छी हुई है. किसानों को मंडी में प्याज की कीमत डेढ़ से दो रुपए प्रति किलो मिल रही है. जबकि यही प्याज अहमदाबाद होलसेल मार्केट में 3-6 रुपए प्रति किलो बिक रही है. मंडी में किसानों को जो कीमत मिल रही है. वो उनकी लागत से भी कम है. होलसेल में फसल की कीमत चाहे जो भी हो, उससे किसान को कोई लाभ नहीं होता. मंडी की कीमत से ही किसान के फायदे-नुकसान का पता चलता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक तरफ कहते हैं कि किसानों की आमदनी दोगुनी हो, ये उनका सपना है. लेकिन किसानों की मौजूदा हालत देखकर लगता नहीं है कि ये सपना पूरा होनेवाला है. प्याज, टमाटर, आलू इन सबकी कीमतों में गिरावट आई है. मंडी में किसानों को कीमत मिलती नहीं है और दिल्ली जैसे बड़े शहरों में ये 80 रुपए किलो तक बिक जाती है. इतनी मेहनत के बाद जब किसान खेती करता है और उस खेती से उसकी लागत भी न निकले, तो गुस्सा आना स्वाभाविक है.

इससे पहले भी कई बार किसानों ने अपना गुस्सा ऐसे ही जाहिर किया है:

# किसानों के प्रोटेस्ट में सबसे ताजा मामला तमिलनाडु के किसानों का है. ये लोग अपनी मांग को लेकर जंतर-मंतर पर 40 दिनों तक धरना देते रहे. सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए इन किसानों ने अपना पेशाब तक पिया. फिलहाल इनकी समस्याओं का कोई हल नहीं निकला है.

# हाल ही में मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में किसान संघ ने प्याज की सही कीमत न मिलने को लेकर प्रदर्शन किया था. किसान संघ ने 40 क्विंटल प्याज की माला पहनकर धरना किया था. साथ ही राह चलते लोगों को थैली में प्याज भरकर मुफ्त में बांटे ताकि सरकार इनकी बातें सुने.

# पिछले साल दिसंबर में छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में किसानों ने टमाटर को ऐसे ही सड़क पर फेंका था. चक्का जाम भी किया था. यहां भी किसान फसल का सही भाव न मिलने की वजह से गुस्सा थे. किसानों ने कहा था कि सही कीमत नहीं मिल रही, जिसकी वजह से वो खुद अपनी फसल बर्बाद कर रहे हैं. छत्तीसगढ़ के ही धमधा में भी एक रुपए प्रति किलो के भाव टमाटर बिकने पर किसानों ने सड़क पर 70 ट्रक टमाटर फेंक दिया था.

# इसी साल जनवरी में रांची के पांचपरगना के बुंडू बाजार में किसानों ने 70 क्विंटल टमाटर सड़क पर फेंक दिया. दूर-दराज से अपनी फसल लेकर मार्केट पहुंचे इन किसानों की फसल व्यापारियों ने नहीं खरीदी. जिसके बाद किसानों ने रोते हुए ये कदम उठाया था.

# मध्यप्रदेश के इंदौर में नोटबंदी के बाद आलू की कीमत में बहुत ज्यादा गिरावट आई थी. आलू एक रुपए की कीमत पर बिका था, जिसके बाद किसानों ने सड़क पर आलू फेंक प्रदर्शन किया था.


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