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AP: हाईकोर्ट ने सीएम के सचिव समेत 5 IAS को जेल भेजने के आदेश क्यों दे डाले?

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट (Andhra Pradesh High Court) ने 4 कार्यरत IAS और एक रिटायर्ड IAS अधिकारी को जेल की सजा सुनाई है. इन सभी को अलग-अलग अवधि के लिए जेल भेजने का कोर्ट ने आदेश जारी किया है. वहीं मुख्य सचिव समेत चार IAS अधिकारियों को बरी कर दिया गया. हालांकि दोषी पाए गए IAS की सजा को अदालत ने एक महीने के लिए स्थगित भी कर दिया ताकि उन्हें अपील का मौका मिल सके.

सीएम के सचिव को भी हुई सजा

हाईकोर्ट ने जिन अधिकारियों को सजा सुनाई है, उनमें मुख्यमंत्री के अतिरिक्त सचिव रेवु मत्याला राजू, वित्त विभाग के प्रमुख सचिव शमशेर सिंह रावत, नेल्लूर के कलेक्टर केवीएन चक्रधर बाबू, पूर्व कलेक्टर एम. शेषागिरी बाबू और रिटायर्ड अधिकारी मनमोहन सिंह शामिल हैं. NDTV के मुताबिक, रावत और सिंह को एक-एक महीने के कारावास की सजा सुनाई गई है. जबकि अन्य के लिए दो-दो सप्ताह के कारावास का आदेश कोर्ट ने दिया है. इन सभी पर एक-एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. इनको 10 फरवरी 2017 के कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करने का दोषी माना गया है.

किस मामले में आया कोर्ट का फैसला?

2017 में हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी. एसपीएस नेल्लोर जिले की एक किसान तल्लापका सावित्रम्मा ने राजस्व अधिकारियों पर बिना नोटिस और मुआवजा दिए जमीन का अधिग्रहण करने के आरोप लगाए थे. याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि उसकी तीन एकड़ जमीन नेशनल इंस्टीट्यूट आफ मेंटल हेल्थ को दे दी गई है. 2016 में अधिकारियों ने उसे मुआवजा देने का वादा किया था लेकिन मुआवजा नहीं दिया गया.

याचिका पर 10 फरवरी 2017 को हाईकोर्ट के जस्टिस ए. राजशेखर रेड्डी ने याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया. अदालत ने राजस्व अधिकारियों को 3 माह के अंदर मुआवजा देने का निर्देश दिया. इसके बाद भी मुआवजा नहीं दिया गया. इस पर सावित्रम्मा ने 2018 में हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर दी, जिस पर 2 सितंबर को कोर्ट का फैसला आया है.

पहले भी IAS को जेल भेजने के आदेश दिए थे

आंध्रप्रदेश में IAS अधिकारियों को जेल भेजने के आदेश का यह पहला मामला नहीं है. हाईकोर्ट ने इसी साल 22 जून को भी दो IAS अधिकारियों को अदालत की अवमानना के मामले में जेल भेजने के आदेश दिए थे. IAS अधिकारी चिरंजीवी चौधरी और गिरिजा शंकर को कोर्ट का आदेश लागू नहीं करने पर एक हफ्ते जेल की सजा सुनाई थी. दरअसल, हाईकोर्ट ने 25 कर्मचारियों को नियमित करने का आदेश जारी किया था, जिसे लागू नहीं किया गया. उसी पर हाईकोर्ट ने अधिकारियों के आचरण पर तीखी नाराजगी जताई और उन्हें जेल भेज दिया.

(ये स्टोरी हमारे यहां इंटर्नशिप कर रहे रौनक भैड़ा ने लिखी है.)


वीडियो- मैरिटल रेप केस में पति को आरोपमुक्त करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने क्या कहा?

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