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फौज ने जिसे 45 साल पहले 'शहीद' मान लिया, वो जिंदा है!

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45 साल पहले तरनतारन, पंजाब में रहने वाली हरबंस कौर को भारतीय सेना का एक तार मिला. उस तार में लिखा था कि उनके पति बलविंदर सिंह 1971 के इंडिया-पाकिस्तान वॉर में शहीद हो गए हैं. उस वक़्त हरबंस केवल 23 साल की थीं. प्रेग्नेंट भी थीं.

45 साल बाद खबर आती है. बलविंदर सिंह जिंदा हैं. वो पाकिस्तान की कोट लखपत राय जेल में कैद हैं. कुछ दिनों पहले कुछ लोग पाकिस्तान की जेलों से छूटकर वापस इंडिया आए हैं. उन्हीं लोगों से ये खबर मिली है.

हरबंस कौर के पति बलविंदर सिंह सिख रेजिमेंट में सिपाही थे. 1971 वॉर के बाद हरबंस को आर्मी से ही अपने पति की शहादत की खबर मिली थी. लेकिन उन्हें कभी भी उनका शव या अस्थियां नहीं सौंपीं गईं.  शायद इसीलिए कहीं न कहीं उनके मन में अपने पति के वापस आने की उम्मीद थी. वो ये मान ही नहीं पा रही थीं कि उनके पति शहीद हो गए हैं. लेकिन वक़्त के साथ उन्होंने ये हकीक़त मान ली. पूरे परिवार को अकेले ही संभाला.

मौत की खबर मिलने के कुछ ही दिन बाद हरबंस को एक बेटी हुई. उसका नाम रखा बलजिंदर कौर.

हरबंस और बलजिंदर को कई बार बलविंदर के जिंदा होने और पाकिस्तान की जेल में होने की ख़बरें मिलती रही हैं.

जब भी पाकिस्तान की जेलों से छूटकर कोई जत्था वापस आता था, हरबंस और बलजिंदर अटारी बॉर्डर जाती थीं. इस उम्मीद से कि शायद बलविंदर वापस आए होंगे. 

लेकिन वो ख़बरें सिर्फ अफवाह जैसी ही लगती थीं. इस बार ये खबर पक्की लग रही है. हरबंस ने फॉरेन मिनिस्ट्री से लेकर लोकल एडमिनिस्ट्रेशन सबको चिट्ठियां लिख दी हैं. उनको उम्मीद है कि अब फाइनली वो अपने पति से मिल पाएंगी. डिस्ट्रिक्ट सोल्जर वेलफेयर के कर्नल अमरबीर सिंह चहल ने कहा कि अगर इस खबर में सच्चाई है तो वो बलविंदर को वापस लाने की पूरी कोशिश करेंगे.

बलविंदर के साथ ही कोट लखपत राय जेल में ऐसे कई कैदी हैं जो सरकार के डॉक्यूमेंट्स में शहीद माने जाते हैं. कई कैदी ऐसे हैं जो लापता मान लिए गए थे. पाकिस्तान की सारी जेलों में कुल मिलाकर कम से कम 250 भारतीय कैदी आज भी हैं.

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