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पहले CAA आएगा फिर NRC, ये हम नहीं अमित शाह कई बार कह चुके हैं, ये रहे सबूत

सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट यानी कि CAA. एक्ट आने के बाद से ही इसका लगातार विरोध हो रहा है. इस पूरे प्रोटेस्ट में CAA के साथ एक और टर्म चर्चा में है. नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिजन्स यानी कि NRC. सवाल उठ रहा है कि क्या बीजेपी पूरे देश में NRC लागू करेगी? CAA के बाद अगला नंबर NRC का होगा?

CAA पर संसद में बीजेपी को समर्थन देने वाले नीतीश कुमार और नवीन पटनायक अपने राज्यों में NRC लागू करने के विरोध में आ गए हैं. ऐसे में एक लाज़िमी सवाल आता है, ये पूरा माज़रा क्या है?

इस बारे में केंद्र सरकार का प्लान क्या है? इसका जवाब केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद देते हैं. मंगलवार, 17 दिसंबर 2019 को एजेंडा आजतक में बोले,

NRC अभी तक फ़ाइनल नहीं हुआ है. CAA को NRC के साथ जोड़ने का कोई प्लान नहीं है. अभी तक ड्राफ्ट भी पूरा नहीं हुआ है.

इस बहस में जाने से पहले ये जान लेते हैं कि NRC और CAA को लिंक करने से दिक्कत क्या है?

CAA, 1955 में बने नागरिकता कानून में बदलाव करता है. इसमें भारत की नागरिकता पाने के लिए धर्म की बात जोड़ी गई है. इसके तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान के गैर-मुस्लिमों को भारत का नागरिक बनाने की व्यवस्था की गई है. अगर वो भारत की सीमा में अवैध तरीके से घुसें हों तो भी.

CAA के खिलाफ पूरे देश में प्रोटेस्ट हो रहे हैं. (फोटो : पीटीआई)
CAA के खिलाफ पूरे देश में प्रोटेस्ट हो रहे हैं. (फोटो : पीटीआई)

गृहमंत्री अमित शाह लगातार ये तर्क दे रहे हैं कि इन तीनों पड़ोसी देशों में इस्लाम स्टेट रिलीजन है. इसलिए उन देशों में धार्मिक प्रताड़ना के शिकार अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता देने की बात की जा रही है.

हालांकि, श्रीलंका के तमिलों और म्यांमार के रोहिंग्याओं को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है.

जबकि, नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिजन्स यानी कि NRC देश में रह रहे हर एक घुसपैठी को बाहर करने का प्रोसेस है. देश में NRC सबसे पहले असम में लागू हुआ. 31 अगस्त 2019 को NRC की अंतिम लिस्ट में 19 लाख लोग अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाए. इस लिस्ट से बाहर होने वालों की लिस्ट में पूर्व राष्ट्रपति फ़ख़रूद्दीन अली अहमद के परिवारवाले भी थे.

इससे डर क्या है?

CAA और NRC को लिंक करने से क्या हो सकता है? असम के उदाहरण से समझते हैं. असम में पहले NRC लाया गया. इसमें 19 लाख लोगों का नाम लिस्ट में शामिल नहीं हुआ. CAA में ये साफ है कि सिर्फ हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन और ईसाई धर्म के अवैध घुसपैठियों को भारत की नागरिकता दी जाएगी. संशोधित कानून में मुस्लिमों को नागरिकता देने का प्रावधान नहीं है. इससे क्या होगा? NRC में बाहर किए गए 19 लाख लोगों में से गैर-मुस्लिमों को तो भारत की नागरिकता मिल जाएगी. लेकिन मुस्लिम बाहर हो जाएंगे. इनमें से कई ऐसे मुस्लिम भी होंगे जो दशकों से भारत में रह रहे हैं. उनको भी भारत की नागरिकता से वंचित कर दिया जाएगा. NRC और CAA का कॉम्बिनेशन मुस्लिमों को नागरिकता देने से रोकना है, ऐसे आरोप लगातार सरकार पर लग रहे हैं.

संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ पिछले एक हफ्ते से विरोध प्रदर्शन चल रहा है. (फोटो: पीटीआई)
संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ पिछले एक हफ्ते से विरोध प्रदर्शन चल रहा है. (फोटो: पीटीआई)

जब से CAA को लेकर प्रोटेस्ट बढ़ा है, तब से सरकार की तरफ से ये बात कही जा रही है कि NRC और CAA को लिंक करने का कोई इरादा नहीं है. और न ही देशभर में ऐसा करने का कोई प्लान है. क्या लिंक करने की बात अफवाह है? कोरा धुआं है? क्या है ना कि हर उठते धुएं के पीछे किसी चिनगारी का हाथ होता है.

होम मिनिस्टर अमित शाह लगातार अपनी रैलियों में और अपने इंटरव्यूज में CAA और NRC साथ में लागू करने की बात कहते रहे हैं.

1 मई 2019. पश्चिम बंगाल के बनगांव में एक चुनावी रैली में अमित शाह कहते हैं,

सबसे पहले हम CAB के माध्यम से हिंदू, सिख, बौद्ध, ईसाई, जैन शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देंगे. उसके बाद NRC को अमल में लाकर हम हर एक घुसपैठिए को चुन-चुनकर देश से बाहर करने का काम करेंगे.

23 अप्रैल 2019. अमित शाह के उद्गार हैं,

पहले सिटिजनशिप अमेंडमेंट बिल आएगा. सभी शरणार्थियों को नागरिकता दी जाएगी. फिर NRC आएगा. शरणार्थियों को चिंता करने की जरूरत नहीं है, घुसपैठियों को चिंता करने की जरूरत है.

आप क्रोनोलॉजी समझ लीजिए. पहले CAB आएगा. फिर NRC आएगा. और NRC सिर्फ बंगाल के लिए नहीं आएगा, पूरे देश के लिए आएगा.

11 अप्रैल 2019. अमित शाह की एक रैली पश्चिम बंगाल के रायगंज में थी. उस रैली में भी उन्होंने पूरे देश में NRC लागू करने की बात कही थी.

अब जबकि CAA के मुद्दे पर विरोध बढ़ा है, तब बीजेपी कह रही है कि NRC में कोई धार्मिक एंगल नहीं है. लेकिन उनके नेताओं के पुराने बयान कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं.

11 अप्रैल 2019 को बीजेपी के ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट से अमित शाह का बयान ट्वीट किया गया. इसमें लिखा था,

हम पूरे देश में NRC लाएंगे. हम हिंदू, बौद्ध और सिख को छोड़कर हर एक घुसपैठी को देश से बाहर निकालेंगे.

बाद में ये ट्वीट डिलीट कर दिया गया. लेकिन बच गए उसके अवशेष. ट्वीट के स्क्रीनशॉट.

बाद में बीजेपी ने ये ट्वीट हटा लिया था.
अमित शाह के बयान वाला ये ट्वीट बाद में बीजेपी ने हटा लिया था.

02 अक्टूबर 2019 को अमित शाह ने एक इंटरव्यू दिया. उसमें वो कह रहे हैं,

हिंदू, सिख, बौद्ध, ईसाई, जैन को नागरिकता ही मिल जाएगी, इसमें NRC का कहां सवाल है? हम सामने चलकर नागरिकता देंगे. और इसमें कोई दस्तावेज की जरूरत नहीं है.

अब दस्तावेज की बात पर आते हैं. एक बार फिर से अमित शाह का इंटरव्यू सामने आता है. क्या कहते हैं अमित शाह, वो कहते हैं,

वोटर कार्ड या आधार से नागरिकता तय नहीं होती. और आधार से तो बिल्कुल भी नहीं होती. आधार का एक अलग मकसद है. नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिजन्स बनाना ही चाहिए. वो बनाने के पीछे किसी को क्या अन्याय होगा, किसी को क्या डर है. मैं अभी भी ये विश्वास दिलाना चाहता हूं कि इस देश के नागरिक एक भी मुसलमान के साथ कोई अन्याय नहीं होगा.

20 नवंबर 2019 को अमित शाह राज्यसभा में थे. भाषण दे रहे थे. बोले,

सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर के तहत असम में NRC की प्रक्रिया हाथ में ली गई थी. NRC की प्रक्रिया जब पूरे देश में होगी, तो असम में भी ये फिर से की जाएगी. किसी भी धर्म के लोगों को इससे डरने की जरूरत नहीं है. सारे लोगों को NRC के अंदर समाहित करने की व्यवस्था है.

केंद्र सरकार FAQs जारी करके NRC और CAA को अलग बता रही है. कहा जा रहा है कि इससे डरने की जरूरत नहीं है, लेकिन पर्दे के पीछे और ही कहानी चल रही है.


वीडियो : नेता नगरी: CAA, NRC, हिंसा और झारखंड एग्जिट पोल पर राजदीप सरदेसाई और सौरभ द्विवेदी का क्या सोचना है?

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