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कोविड प्रोटोकॉल्स की धज्जियां उड़ाते UP पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट की ये टिप्पणियां ज़रूर जानिए

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव चल रहे हैं. लेकिन चल तो कोरोना वायरस (Corornavirus In Uttar Pradesh) भी रहा है. कोरोना की दूसरी वेव, जो पहले से ज़्यादा खतरनाक जान पड़ रही है. ऐसे में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने UP सरकार के पंचायत चुनाव कराने के तरीकों पर कड़ी प्रतिक्रिया ज़ाहिर की है. कोर्ट ने कहा कि कोरोना की गंभीर होती स्थिति के बीच चुनाव कराए जा रहे हैं. इसके बावजूद प्रदेश सरकार ने कोई ठोस योजना नहीं बनाई. कोर्ट ने कहा कि चुनाव के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क जैसे नियमों का पालन नहीं हो रहा. साथ ही अध्यापकों और सरकारी कर्मचारियों की दूर-दराज ड्यूटी लगा दी जा रही है. इन सारी बातों को लेकर हाई कोर्ट ने खासी नाराजगी ज़ाहिर की.

कोर्ट ने कहा- शर्म की बात है

19 अप्रैल को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के 5 शहरों में लॉकडाउन लगाने के निर्देश दिए थे. हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले पर रोक लगा दी थी. लेकिन इस दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कई अहम टिप्पणियां की थीं, जो ये बता रही थीं कि सूबे की सरकार कोरोना के ख़िलाफ़ पर्याप्त इंतज़ाम कर पाने में नाकाम रह रही है. जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और अजीत कुमार की बेंच ने कहा था कि –

“ये शर्म की बात है कि सरकार को पहले से स्थितियों की गंभीरता का अंदाजा था. फिर भी पर्याप्त इंतज़ाम नहीं किए गए.”

कोर्ट ने पंचायत चुनाव की व्यवस्थाओं पर भी टिप्पणी की. पढ़ते जाइए..

# सरकार का जो ध्यान जन स्वास्थ्य की तरफ होना चाहिए था, वो अब पूरी तरह पंचायत चुनाव की तरफ शिफ्ट हो चुका है.

# तमाम तस्वीरें सामने आ रही हैं, जिनमें साफ दिख रहा है कि जहां भी चुनाव हो रहे हैं, वहां सोशल डिस्टेंसिंग का कोई पालन ही नहीं हो रहा. रैलियों में लोग बिना मास्क के घूम रहे हैं.

# दुनिया हम पर हंसेगी कि इनके पास चुनावों में तो खर्च करने के लिए पैसा है, लेकिन पब्लिक हेल्थ पर खर्च करने के लिए नहीं.

# ज़रा कल्पना करिए कि पूरी आबादी में से 10 फीसदी भी एक बार में इंफेक्टेड हो गई और सबको हॉस्पिटल में रखना पड़ा. ऐसे में आपके (सरकार के) पास जो मौजूदा ढांचा है, उससे कैसे स्थितियां संभालेंगे?

# एक चुनी हुई सरकार अगर महामारी के दौर में लोगों के आचरण-व्यवहार पर नज़र नहीं रख पा रही, तो हम भी मूक दर्शक बनकर नहीं रह सकते.

चुनाव आयोग से भी सवाल

हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग की योजनाओं पर भी सवाल उठाते हुए कहा –

“चुनाव कराने वालों को पता था कि महामारी चल रही है. लोगों का भीड़ जुटाकर कोई भी एक्टिविटी करना मना है. जिस तरह से राज्य सरकार ने और राज्य चुनाव आयोग ने पंचायत चुनाव कराए, उससे हम कड़ी आपत्ति और नाखुशी ज़ाहिर कर रहे हैं. सरकारी शिक्षकों को, सरकारी कर्मचारियों को चुनावी ड्यूटी करने पर मजबूर किया जा रहा है. ऐसा करके उन्हें महामारी से ख़तरे में झोंका जा रहा है. काफी पुलिस फोर्स को भी चुनाव वाले स्थानों पर लगा दिया गया है.”

महामारी के बीच हो रहे उत्तर प्रदेश पंचायत चुनावों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका लग गई है. याचिका में कहा गया है कि सूबे में आये दिन कोविड-19 केस बढ़ते जा रहे हैं. स्वास्थ्य व्यवस्था पंगु होती जा रही है. फिर भी चुनाव कराए जा रहे हैं. हालांकि इस पर अभी सुनवाई होनी बाकी है.


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