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CAA प्रोटेस्ट : पुलिस की कार्रवाई पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को हौंक दिया

CAA प्रदर्शनों पर अपनी कार्रवाई के चलते यूपी पुलिस और प्रशासन को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बार फिर से हौंक दिया है. सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया. कहा कि वे उन पुलिसकर्मियों की पहचान करें, और उनके खिलाफ कार्रवाई करें, जिन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के छात्रों को चोट पहुंचाई और जो यूनिवर्सिटी में मोटरसाइकिलों को नुकसान पहुंचाने वाली घटनाओं में शामिल थे.

इसके अलावा कोर्ट ने यूपी प्रशासन को इस घटना में घायल 6 छात्रों को मुआवज़ा देने का भी आदेश दिया. ये आदेश मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति समित गोपाल की खंडपीठ ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यानी NHRC द्वारा मामले पर दी गई रिपोर्ट के आधार पर दिया है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NHRC को निर्देश दिया था कि वह AMU में सीएए के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा कथित तौर पर की गई हिंसा की जांच करे. क्यों दिया था? क्योंकि मोहम्मद अमन खान ने 15 दिसंबर, 2019 को AMU में एक एंटी-सीएए विरोध के दौरान पुलिस कार्रवाई के खिलाफ जनहित याचिका दायर की थी.

आयोग के पास समय था 5 सप्ताह का. इसके बाद एक सप्ताह का समय और बढ़ाया गया था. इसके बाद आयोग ने अपनी रिपोर्ट पेश की. सिफारिशें की. कानूनी खबरों की वेबसाइट Live law ने साझा की हैं ये सिफारिशें.

1. यूपी सरकार के मुख्य सचिव को निर्देश दिया जाए कि वे उन छह छात्रों को उचित मुआवजा प्रदान करें, जो घटना में गंभीर रूप से घायल हुए हैं.

2. जैसा कि मोटरसाइकिलों को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं में शामिल पुलिस वालों को सीसीटीवी फुटेजों में देखा गया है, डीजीपी-उत्तर प्रदेश को निर्देश दिया जाए कि और इन पुलिसकर्मियों की पहचान करके इन पर कड़ी कार्रवाई करें.

3. पुलिस बल को संवेदनशील बनाया जाना चाहिए और ऐसी परिस्थितियों से निपटने में व्यावसायिकता को विकसित करने के लिए विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किए जाने चाहिए.

4. उपरोक्त बिंदु (b) के समान निर्देश भी आरएएफ के लिए महानिदेशक, सीआरपीएफ को दिए जा सकते हैं. आरएएफ एक विशेष बल है जो मुख्य रूप से दंगों से निपटने और कानून और व्यवस्था की स्थितियों को संभालने के लिए स्थापित किया जाता है, ऐसे संकटकालीन परिस्थितियों में अत्यंत व्यावसायिकता दिखानी चाहिए, साथ ही साथ नागरिकों के मानवाधिकारों का भी सम्मान करना चाहिए.

5. यूपी के डीजीपी को निर्देश दिया जाए कि वे यह सुनिश्चित करें कि अपने आदेश दिनांक 06/01/2020 से गठित एसआईटी सभी संबंधित मामलों की जांच योग्यता के आधार पर और समयबद्ध तरीके से करे. माननीय न्यायालय भी समय पर जांच पूरी करने के लिए समय सीमा और आवधिक समीक्षा, यदि कोई हो, निर्धारित कर सकता है.

6. डीजीपी यूपी और वरिष्ठ अधिकारियों को एक मजबूत खुफिया एकत्रीकरण प्रणाली को सुधारने और स्थापित करने की सलाह दी जानी चाहिए. विशेष रूप से सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वाले और विकृत और झूठी खबरों के प्रसार को रोकने के लिए विशेष कदम उठाए जा सकते हैं. यह ऐसी कानून और व्यवस्था की घटनाओं को बेहतर ढंग से नियंत्रित करने के लिए है जो अनायास और अप्रत्याशित रूप से घटित होती हैं.

7. छात्रों के साथ बेहतर संचार का एक तंत्र स्थापित करने के लिए एएमयू-कुलपति, रजिस्ट्रार और अन्य अधिकारियों को निर्देशित किया जाए ताकि वे बाहरी लोगों और प्रभावित अनियंत्रित छात्रों से प्रभावित न हों. उन्हें छात्रों के विश्वास के पुनर्निर्माण के लिए सभी आत्मविश्वास बढ़ाने के उपाय करने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों.

कोर्ट ने ये सिफारिशें मान लीं. एएमयू प्रशासन से भी कहा कि छात्रों से संवाद मजबूत रखें. संबंधित अधिकारियों से कहा है कि वे जल्द से जल्द सिफारिशों का पालन करें और 25 मार्च को एक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करें.

क्या थी याचिका?

अलयाचिका में कहा गया कि AMU के छात्र नागरिकता संशोधन कानून, 2019 के खिलाफ 13 दिसंबर को शांतिपूर्ण विरोध कर रहे थे. 15 दिसंबर को ये छात्र मौलाना आजाद पुस्तकालय के आसपास एकत्रित हुए और विश्वविद्यालय गेट की ओर मार्च किया. याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि गेट पर पहुंचने पर वहां तैनात पुलिस ने छात्रों को उकसाना शुरू कर दिया, लेकिन छात्रों ने प्रतिक्रिया नहीं दी.

कुछ समय बाद पुलिस ने इन छात्रों पर आंसू गैस के गोले छोड़ने शुरू कर दिए. उन पर लाठियां बरसाईं. करीब 100 छात्र घायल हो गए.

वहीं राज्य सरकार की ओर से जवाबी हलफनामा दाखिल किया गया. पुलिस कार्रवाई का बचाव किया गया. दलील ये कि विश्वविद्यालय का गेट छात्रों द्वारा तोड़ दिया गया था. और विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुरोध पर पुलिस ने हिंसा में लिप्त विद्यार्थियों को काबू में करने के लिए विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश किया. सरकार ने ये भी कहा कि इस कार्रवाई के दौरान कोई अतिरिक्त बल प्रयोग नहीं किया गया.


लल्लनटॉप वीडियो : डॉक्टर कफील खान मुंबई से गिरफ्तार, AMU में CAA के खिलाफ प्रदर्शन में छात्रों को भड़काने का आरोप

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