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BJP प्रवक्ता पर जूता फेंकने वाला क्यों नाराज था, 2 दिन पहले की 4 FB पोस्ट से पता चला

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दिल्ली में बीजेपी कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जूता कांड हुआ. यहां एक व्यक्ति ने पार्टी के प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव पर जूता फेंक दिया. गनीमत रही कि जूता उनके चेहरे पर नहीं लगा. जूता फेंकने वाले के पास से एक विज़िटिंग कार्ड मिला जिससे उसकी जानकारी मिली. जूता फेंकने वाले का नाम शक्ति भार्गव है. वे मूलत: कानपुर से है और पेशे से डॉक्टर है.

नाम और पता मिलने के बाद शक्ति भार्गव की फेसबुक आईडी खंगाली गई. जिसमें शक्ति भार्गव ने खुद को विसल ब्लोअर बताया है. 16 अप्रैल को शक्ति भार्गव ने एक सीरीज़ में 4 पोस्ट लिखे जिसमें उसने किसी सरकारी कंपनी लाल इमली मिल्स के कर्मचारियों का जिक्र किया है. पोस्ट में उसने लिखा है कि मिल के बंद होने के बाद वे दर-दर की ठोकरे खा रहे हैं. शक्ति भार्गव ने कई और बातें लिखी हैं. जिसे बारी-बारी से आप आगे समझेंगे. लेकिन उससे पहले ये साफ कर दें कि उन्होंने बीजेपी प्रवक्ता पर जूता क्यों मारा ये साफ नहीं हो पाया लेकिन फेसबुक पोस्ट से ये समझ में आया कि वो क्यों परेशान था.

शक्ति भार्गव की पोस्ट में नोट करने वाली बात ये हैं कि शक्ति भार्गव अपने चारों पोस्ट के ऊपर में कुछ ऐसा लिखा है:

2014 में मोदी ने कहा था- न खाऊंगा, न खाने दूंगा.

नमो 2019- नो वॉइस अगेंस्ट करप्शन विदिन द गवर्नमेंट

डॉक्टर शक्ति भार्गव के पहले पोस्ट का स्क्रीनशॉट (01)
डॉक्टर शक्ति भार्गव के पहले पोस्ट का स्क्रीनशॉट (01)

शक्ति भार्गव ने पहले पोस्ट में लिखा है कि उसने सरकारी कंपनी द ब्रिटिश इंडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड की बिक्री में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया था. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को मामला दर्ज करने का निर्देश दे दिया.

डॉक्टर शक्ति भार्गव के पहले फेसबुक पोस्ट का दूसरा भाग.
डॉक्टर शक्ति भार्गव के पहले फेसबुक पोस्ट का दूसरा भाग.(02)

शक्ति भार्गव लिखता है कि इस मुहिम के बाद पिछले साल नवंबर में उसके घर पर इनकम टैक्स विभाग ने रेड किया. इस पोस्ट के साथ ही उसने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कॉपी भी डाली है.

शक्ति भार्गव ने अपने फेसबुक के पहले पोस्ट में पिटीशन की कॉपी भी लगाई है.
शक्ति भार्गव ने अपने फेसबुक के पहले पोस्ट में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कॉपी भी लगाई है. (कॉपी का पहला पार्ट)

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कॉपी में शक्ति भार्गव ने ज़ाहिर किया है कि सरकार के खिलाफ मुहिम छेड़ कर वे खुद आयकर विभाग की जांच में फंस गए.

शक्ति भार्गव के पिटीशन के कॉपी का दूसरा पार्ट
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कॉपी का दूसरा पार्ट

शक्ति भार्गव ने अपने दूसरे पोस्ट में सरकारी अधिकारियों पर लैंड माफियाओं के लिए काम करने का आरोप लगाया. साथ ही ये भी लिखा कि अधिकारियों ने सरकारी प्रॉपर्टी को लूटने में पूरी मदद की जो प्राइम लोकेशन पर थी.

शक्ति भार्ग के फेसबुक पोस्ट का दूसरा पार्ट.
शक्ति भार्ग के फेसबुक पोस्ट का दूसरा पार्ट.

शक्ति भार्गव के फेसबुक का दूसरा पार्ट आप यहां देख सकते हैं.

शक्ति भार्गव ने अपने तीसरे पोस्ट में बीएसएफ के बागी जवान का ज़िक्र किया है. बीएसएफ का बागी जवान अभी वाराणसी में पीएम मोदी के खिलाफ चुनावी मैदान में है. शक्ति भार्गव ने लिखा:

जिस बहादुर यादव ने बीएसएफ में खराब खाने की शिकायत की थी. तथ्यों को सामने लाने के उनके साहस की प्रशंसा की जानी चाहिए थी. उन्होंने जवानों को मिलने वाले खाने में हो रहे भ्रष्टाचार को उठाया था और इसके बजाए उन्हें अनुशासनहीनता के आरोप में निकाल दिया गया.

शक्ति भार्गव ने अपने आप को बहादुर यादव के साथ ही जोड़कर दिखाया है. लिखा कि सरकार के खिलाफ करप्शन की मुहिम छेड़ कर वे खुद इनकम टैक्स की जांच में फंस गए.

चौथे पोस्ट में शक्ति भार्गव ने किसी लाल इम्ली मिल्स का ज़िक्र किया है. जिसमें उसने लिखा है कि एक तरफ लाल इमली मिल्स के दर्जनों कर्मचारी आत्महत्या को मजबूर हैं तो दूसरी तरफ 11 संपत्तियां जिनकी कीमत 450 करोड़ रुपए हैं. उनके सौदे को 2008 में रद्द कर दिया गया था. उन संपत्तियों को समझौता करने वालों ने 11 करोड़ रुपये में ब्रिटिश इंडिया कंपनी के पास बंधक बनाकर रखा हुआ है. कंपनी के कर्मचारियों को आखिरी बार सैलरी 2017 में मिली थी. ये भ्रष्टाचार नहीं तो क्या है?

वहीं दूसरी तरफ शक्ति भार्गव पर करप्शन के कई आरोप हैं. 2018 में तीन दिन चले सर्च ऑपरेशन के दौरान शक्ति भार्गव के यहां से 28 लाख रुपये कैश और 50 लाख रुपये कीमत की ज्वैलरी बरामद हुई थी. पूछताछ में शक्ति भार्गव ने 10 करोड़ से ज्यादा रकम की कमाई का सोर्स नहीं बताया था. इसके अलावा शक्ति भार्गव की कई कंपनियों के बारे में भी पता चला था, जिनकी जानकारी आयकर विभाग या दूसरी किसी सरकारी एजेंसी को नहीं दी गई थी. शक्ति भार्गव की पूरी कहानी यहां पढ़िए


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