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AIIMS के डायरेक्टर ने कोरोना वायरस से जुड़े 25 सवालों के ये जवाब दिए हैं

कोरोना वायरस से जुड़ी तमाम जानकारियां आप तक हर पल पहुंच रही हैं. लेकिन कितनी सही हैं, कितनी ग़लत, ये कहना ज़रा मुश्किल है. कोरोना वायरस से जुड़ी कुछ भ्रांतियों और ग़लत जानकारियों को दूर करने के लिए आप ये आर्टिकल पढ़ सकते हैं. AIIMS दिल्ली के डायरेक्टर डॉ. रनदीप गुलेरिया ने इंडिया टुडे के वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई के साथ बातचीत की थी. वही बातचीत हम आपको पढ़ा रहे हैं. राजदीप ने डॉक्टर गुलेरिया से कोरोना वायरस से जुड़े तमाम सवाल पूछे हैं. आप भी पढ़िए, अगर कोई डाउट होगा तो क्लियर हो जाएगा.

सवाल- किसे कोरोना वायरस के लिए टेस्ट करवाना चाहिए? अगर मुझे हल्की खांसी है तो क्या मुझे टेस्ट करवाना चाहिए या फिर ज्यादा खांसी-बुखार हो तो तभी करवाना चाहिए?

डॉ. गुलेरिया: अगर आपको कफ़, बुखार और गले में ख़राश हो भी, तब भी टेस्ट करवाने की ज़रूरत नहीं है. लेकिन अगर आप बीते 14 दिनों में विदेश होकर आए हैं या फिर कोरोना वायरस के कंफर्म्ड मरीज़ से मिले हैं, तब टेस्ट करवाने की ज़रूरत है. बाकी, आजकल मौसम बदल रहा है तो उसकी वजह से भी आम खांसी-बुखार हो रहा है.

सवाल – कोरोना वायरस के लक्षण पैदा होने में कितना समय लगता है?

डॉ. गुलेरिया: इसे हम इनक्यूबेशन पीरियड (शरीर में वायरस घुसने से लक्षण पैदा होने के बीच का समय) कहते हैं. आमतौर पर इसमें 2 से 7 दिन लगते हैं. लेकिन ये 14 दिन तक भी बढ़ सकता है. चुनिंदा मामलों में देखा गया है कि ये और भी ज़्यादा दिनों तक खिंच सकता है. लेकिन ज़्यादातर मरीज़ों में ये लक्षण 5-7 दिनों में उभरने लगते हैं.

सवाल – क्या हर किसी को मास्क पहनना चाहिए?

डॉ. गुलेरिया:  हर किसी को मास्क पहनने की ज़रूरत नहीं है. ये समझने की ज़रूरत है कि अगर आपको खांसी-बुखार है, तो आप मास्क पहनिए. ताकि इन्फेक्शन किसी और तक न फैले. अगर आप स्वास्थ्यकर्मी हैं, मरीज़ों की देखभाल कर रहे हैं, तब मास्क पहनिए. नहीं तो रोज़ाना के काम के लिए या घर-दफ्तर जाते हुए मास्क पहनने की ज़रूरत नहीं है. कई बार मास्क का नुकसान भी आपको हो सकता है. क्योंकि अगर मास्क लगाएंगे और उसे चेहरे पर टिकाए रखने के लिए छूएंगे तो हो सकता है कि हाथों की मदद से किसी संक्रमित सतह पर मौजूद वायरस मास्क ठीक करते वक्त आपके चेहरे पर चले जाएं.

सवाल- जिन्हें अस्थमा है, क्या उन्हें मास्क पहनना चाहिए?

डॉ. गुलेरिया: अस्थमा वालों को मास्क पहनना अनिवार्य नहीं है. हालांकि उन्हें बार-बार हाथ धोते रहना चाहिए. लोगों से मिलने और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में जाने से परहेज़ करना चाहिए.

सवाल- अगर सहकर्मी को इन्फेक्शन हो जाए तो क्या किया जाना चाहिए?

डॉ. गुलेरिया: अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आते हैं जिसे इन्फेक्शन हो, तो आप खुद को क्वारंटाइन (एकांत) में रखिए. कहीं ऐसा न हो कि आपको इन्फेक्शन हो जाए और आप उसे फैलाते रहें.

सवाल- क्या उन अस्पतालों में जाना सुरक्षित है जहां कोरोना वायरस के मरीज़ों को रखा गया हो?

डॉ. गुलेरिया: ये सुरक्षित है क्योंकि कोरोना वायरस (Covid-19) से प्रभावित मरीज़ों को आइसोलेशन वॉर्ड्स में रखा जा रहा है. हालांकि, अगर बहुत ही ज़रूरी हो तभी आजकल अस्पताल जाएं. नियमित चेकअप के लिए अस्पताल जाते हैं तो फिलहाल रुक जाएं.

सवाल- क्या गर्मी और नमी से कोरोना वायरस मर जाएगा?

डॉ. गुलेरिया:  मुझे लगता है कि ऐसा नहीं होगा. हो सकता है कि संक्रमण के फैलाव में कमी आए. सिंगापुर और थाईलैंड जैसे उष्णकटिबंधीय देशों (ट्रॉपिकल देशों) में अब भी कोरोना वायरस मौजूद है. बहुत सारे लोग घरों में, शॉपिंग मॉल्स या एयर कंडीशंड एरिया में होते हैं. यहां लोग होते हैं और तापमान कम होता है. अगर यहां किसी को इन्फेक्शन हो और वो खांस रहा हो, तो व्यक्ति वायरस फैला सकता है.

सवाल- क्या मॉल और रेस्त्रां में जाना छोड़ना चाहिए?

डॉ. गुलेरिया: फिलहाल हम इस महामारी के इलाज को लेकर निश्चिंत नहीं है. मेरा कहूंगा कि हमें सामाजिक मेल-जोल कम करना चाहिए. ये बीमारी को फैलने से बचा सकता है.

सवाल- क्या कोरोना वायरस से ठीक हो चुके व्यक्ति के दोबारा ये हो सकता है?

डॉ. गुलेरिया: ये वायरल इन्फेक्शन है. अगर ठीक हुआ व्यक्ति कोरोना वायरस से दोबारा संक्रमित होता है तो वो बीमार हो सकता है. लेकिन पहली बार की बीमारी के बाद से ही शरीर में एंटी-बॉडीज़ बन जाती हैं जो अगली बार होने वाले संक्रमण के प्रभाव को कम कर देती हैं. अगर दोबारा कोरोना वायरस संक्रमण होता भी है, तब भी हल्का इन्फेक्शन ही होगा.

सवाल- क्या आपसी मेल-जोल कम करना ही भारत जैसे देश में इस बीमारी को रोकने का सही तरीका है?

डॉ. गुलेरिया:  ब्रिटेन इससे मिलते जुलते मॉडल पर काम कर रहा है. वो हाई रिस्क ग्रुप (बुज़ुर्ग, मधुमेह, हाइपरटेंशन, दिल और श्वास रोगों के मरीज़) को बचाते हुए, इन्फेक्शन को फैलने दे रहे हैं. जवान लोगों में मृत्यु दर बहुत कम है. इसलिए ज्यादा संख्या में लोग संक्रमित हो भी जाते हैं तो भी इम्युनिटी बनने से महामारी का बड़ा असर नहीं होगा. हालांकि, जवान लोग हाई रिस्क ग्रुप्स को संक्रमित कर सकते हैं इसलिए भारत जैसे देश के लिए ये (महामारी को जवानों के बीच बढ़ने देना) ठीक नहीं होगा.

सवाल- क्या योग और प्राणायाम से कोरोना वायरस के खिलाफ इम्यूनिटी बढ़ती है?

डॉ. गुलेरिया: इस बात की सपोर्ट में कोई भी सबूत मौजूद नहीं है कि योग, प्राणायाम, आयुर्वेदिक या फिर होम्योपैथिक दवाएं कोरोना वायरस के खिलाफ असरदायक हैं.

सवाल- क्या ब्लड डोनर्स की जांच कोरोना वायरस के लिए की जा रही है?

डॉ. गुलेरिया: फिलहाल ब्लड डोनेट करने वालों की जांच नोवेल कोरोना वायरस के लिए नहीं की जा रही है. यह समझने की जरूरत है कि कोरोना वायरस इंसानों के लिए पिछले साल तक चिंता का विषय नहीं था. यह जानवर का वायरस है जो म्यूटेट हुआ और इंसानी वायरस बन गया. इसने इंसान से इंसान तक फैलने की क्षमता भी पैदा कर ली. लेकिन यह खून में मौजूद हो इसकी संभावना कम ही है. यह मुख्य द्वार पर श्वास नली के ऊपरी हिस्से में होता है. किसी भी स्वस्थ आदमी को ब्लड टेस्ट करवाने की जरूरत नहीं है.

सवाल- क्या गर्म पानी पीने से कोरोना वायरस मर जाएगा?

डॉ. गुलेरिया: नहीं. गर्म पानी या एल्कोहल पीने से कोरोना वायरस नहीं मरेगा. एल्कोहल बेस्ड सैनिटाइजर हाथों पर मौजूद वायरस को मार सकते हैं. लेकिन अगर एक बार वायरस गले में चला गया और कोशिकाओं पर असर करने लगा तो एल्कोहल भी वहां काम नहीं कर पाएगा.

सवाल- क्या हैंड सैनिटाइजर साबुन से अच्छे हैं?

डॉ. गुलेरिया:  पानी और साबुन का इस्तेमाल कर सकें तो ज्यादा बेहतर है. साबुन को ज्यादा अच्छे तरीके से इस्तेमाल किया जाता है और यह मददगार साबित होता है. खासतौर पर उंगलियों के बीच और नाखूनों के नीचे अटकी गंदगी को हटाने के लिए. अगर आपके पास साबुन नहीं है, तो आप हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल कर सकते हैं. लेकिन अपने हाथों को अच्छे तरीके से बार-बार साफ करते रहें

सवाल- क्या दरवाजे के हैंडल स्कोर साफ रखने से कोरोना वायरस से बचा जा सकता है?

डॉ. गुलेरिया: कोरोना वायरस फैलने का एक तरीका है ड्रॉपलेट इनफेक्शन. ड्रॉपलेट का मतलब है संक्रमण की बूंद. जो किसी के छींकने से या खांसने से आ रही है. और जो भी लोग आसपास मौजूद हैं, वो हवा में कुछ देर तक रहने वाली इस संक्रमित बूंद के संपर्क में आ सकते हैं. और जो इसके चपेट में आएगा वह संक्रमित होगा. यह संक्रमण अक्सर सतह पर भी टिक जाता है और इस सतह को छूने पर इंफेक्शन हो सकता है. अगर कोरोना वायरस से संक्रमित कोई व्यक्ति अपने हाथों से दरवाजे का हैंडल छूता है, तो इंफेक्शन उस हैंडल पर भी कुछ घंटे के लिए टिका रह सकता है. इसलिए साफ सफाई रखना ज़रूरी है.

सवाल- कोरोना वायरस सतह पर कितनी देर तक टिका रह सकता है?

डॉ. गुलेरिया: निर्भर करता है कि सतह कैसी है. कुछ डाटा बताते हैं कि गत्ते पर वायरस कुछ घंटे के लिए टिका रह सकता है. वही धातुओं पर खासतौर पर कम तापमान और ज्यादा नमी वाले हालात में यह 6 से 8 घंटे तक टिका रह सकता है. इसीलिए बार-बार हाथ धोना अहम है.

सवाल- क्या ड्रॉपलेट्स किसी के कपड़े पर गिरें तो वो भी बीमार हो जाएगा?

डॉ. गुलेरिया: अगर कपड़ों पर पड़ी ड्रॉपलेट्स को हाथों से छूएंगे और फिर अपने चेहरे को छू लेंगे, तो इंफेक्शन हो जाएगा. इसलिए चेहरा छूने से बचना चाहिए. संक्रमित बूंदे खुद-ब-खुद किसी की श्वास नली में नहीं चली जातीं.

सवाल- क्या नॉनवेज खाने से परहेज करना चाहिए?

डॉ. गुलेरिया: फिलहाल ऐसा कोई भी सबूत मौजूद नहीं है. अच्छे तरीके से पकाया हुआ नॉनवेज घर पर हो या बाहर हो, उससे कोरोना वायरस का कोई खतरा नहीं है.

सवाल- गर्भवती महिलाओं को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

डॉ. गुलेरिया: इस तरह का कोई भी डेटा मौजूद नहीं है कि स्वाइन फ्लू की तरह गर्भवती महिलाओं को कोरोना वायरस से भी ज्यादा रिस्क है. हालांकि उन्हें भीड़ वाले इलाकों से बचना चाहिए.

सवाल- फ्लाइट पकड़ने से पहले कोई सावधानी?

डॉ. गुलेरिया:  गैर-जरूरी यात्राएं तत्काल बंद कर दें. अगर यात्राएं कर भी रहे हैं, तो बार-बार हाथ धोते रहें.

सवाल- कैसी स्थितियां कोरोना वायरस के लिए ज्यादा खतरनाक है?

डॉ. गुलेरिया: चाइना से जो भी डेटा मिला है, उसके मुताबिक कुछ ग्रुप ज्यादा खतरे में हैं. यानी, जो बुजुर्ग हैं, जिनकी उम्र 60 से ज्यादा है, उन्हें ज्यादा इंफेक्शन का खतरा है. जिन लोगों को पहले से डायबिटीज, हाइपरटेंशन, दिल की बीमारी या श्वास की बीमारियां हैं उन्हें भी खतरा ज्यादा है. उन्हें ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है.

सवाल- क्या कोरोना वायरस खत्म होने से पहले और भी खतरनाक हो सकता है?

डॉ. गुलेरिया: दुनिया भर के ट्रेंड तो बता रहे हैं कि इंफेक्शन अभी बढ़ेगा. कोरोना वायरस अब तक अपने उच्चतम स्तर पर नहीं पहुंचा है. पूरी दुनिया में केस बढ़ रहे हैं. अगले हफ्तों में यह उच्चतम स्तर तक पहुंच जाएगा और उसके बाद से इसका गिरता स्तर देखेंगे. जैसा चीन और साउथ कोरिया में दिखा है.

सवाल- क्या भारतीय औरों के मुकाबले कोरोना वायरस से ज्यादा इम्यून हैं?

डॉ. गुलेरिया: कोई भी डाटा यह बात साबित नहीं करता

सवाल- क्या धूम्रपान करने से कोरोना वायरस से रिकवरी करने में दिक्कत आती है?

डॉ. गुलेरिया: धूम्रपान करने से श्वास नली का डिफेंस मेकैनिज़्म कमजोर हो जाता है. इसलिए कोरोना वायरस से रिकवरी पर भी इसका असर पड़ेगा. ऐसे में लोगों को धूम्रपान कम करना चाहिए या फिर छोड़ ही देना चाहिए.

सवाल- क्या भारत बाकी देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति में है?

डॉ. गुलेरिया: हम बेहतर स्थिति में हैं लेकिन अब कोरोना वायरस हर जगह पर है. हमें सतर्क रहना होगा. अगले कुछ हफ्ते बहुत महत्वपूर्ण हैं. क्योंकि हमें कोरोना वायरस के मामलों में एकदम इज़ाफ़ा भी दिख सकता है.

क्या अब भी कोई सवाल बाकी हैं? हैं, तो टिका दीजिए कमेंट बॉक्स में. अगले आर्टिकल में उन सब सवालों के जवाब हम लाएंगे आपके लिए.


क्या चीन से भारत आ रहे पैकेज अपने साथ कोरोना वायरस ला रहे हैं?

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