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PM मोदी के साथ मीटिंग को लेकर विवाद पर ममता बनर्जी बोलीं- इस तरह मेरा अपमान न करें

पश्चिम बंगाल में आए तूफान का जायजा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार 28 मई को राज्य के दौरे पर थे. चक्रवर्ती तूफान यास से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए मोदी की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी शामिल होना था. लेकिन ममता मीटिंग में शामिल नहीं हुईं. इसके बाद विवाद हो गया. ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कई बातें कही हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रिव्यू बैठक में इंतजार कराने के मामले में ममता ने कहा कि उन्हें खुद पीएम के देरी से आने की वजह से 20 मिनट इंतजार करना पड़ा. ममता ने कहा है कि उन्हें बदनाम करने की साजिश की जा रही है. खराब मौसम की वजह से कलाईकुंडा आना मुश्किल था फिर भी प्रधानमंत्री से मिलने के लिये वो वहां पहुंची. प्रधानमंत्री से मिलीं और उन्हें रिपोर्ट भी सौंपी. ममता ने कहा कि PMO से झूठी खबरें ना फैलाई जाएं.

और क्या कुछ कहा ममता ने?

ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उन्हें खुद पीएम की मीटिंग में इंतजार करना पड़ा. उन्होंने कहा कि हम जब सागर पहुंचे तो हमें खबर मिली कि हमें 20 मिनट इंतजार करना होगा क्योंकि पीएम का हेलीकॉप्टर उतरना बाकी था. हालांकि वे हमारे शेड्यूल से वाकिफ थे लेकिन फिर भी हमें इंतजार कराया. हमने हेलीपैड पर उनका इंतजार किया. और इससे पहले हमें 15 मिनट हवा में ही रुकना पड़ा, हमारा चॉपर लैंड नहीं किया. लेकिन इससे हमें आपत्ति नहीं है क्योंकि ये पीएम की सुरक्षा का मामला था.

ममता बनर्जी ने कहा कि हम जब कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे तो पीएम वहां पहले से मौजूद थे. हमें उन्हें सम्मान देना था इसलिए मैं अपने मुख्य सचिव के साथ वहां गई थी. वहां भी (मीटिंग स्थल पर) हमें इंतजार करना पड़ा. मेरे सुरक्षा अधिकारी ने पीएम की सुरक्षा में तैनात SPG अधिकारी से बात की तो हमें एक घंटे इंतजार करने को कहा गया. इसके बाद हमें खाली कुर्सी दिखाई गई. ये मीटिंग से पहले का दृश्य हो सकता है या फिर बाद का. उन्होंने कहा,

“जब हम पहुंचे, मीटिंग शुरू हो चुकी थी. उन्होंने हमें बैठने को कहा. मैंने कहा कि हमें एक मिनट चाहिए ताकि हम अपनी रिपोर्ट सौंप सकें. SPG ने कहा कि मीटिंग के एक घंटे बाद ऐसा हो पाएगा. मैंने कॉन्फ्रेंस रूम में खाली कुर्सियां देखीं. हमें बताया गया था कि मीटिंग सीएम और पीएम की है लेकिन वहां दूसरे बीजेपी नेता क्या कर रहे थे. “

ममता बनर्जी ने कहा कि इस तरह मेरा अपमान नहीं किया जाना चाहिए. हमें बंगाल चुनावों में जीत मिली है, क्या इसलिए ऐसा व्यवहार किया जा रहा है? बंगाल की जनता के लिए मैं पीएम के पैर छूने को भी तैयार हूं. पश्चिम बंगाल की सीएम ने कहा कि जो ट्वीट केंद्र के वरिष्ठ मंत्रियों द्वारा किए जा रहे हैं वे उनकी (ममता की) छवि खराब करने की कोशिश हैं.

उन्होंने कहा कि मुझे आपत्ति नहीं है कि मीटिंग में विधायक आएं या विपक्ष के नेता. क्या ये ये मीटिंग सीएम और पीएम के बीच नहीं थी?जबकि पहले यही कहा गया था. मैंने सोचा कि पीएम हमारे राज्य में आए हैं, उनसे शिष्टाचार भेंट होनी चाहिए. हम उनकी अनुमति से कमरे में गए, कागज सौंपे और चले आए. इसमें हमारा क्या दोष है? जब भी आप मेरे राज्य में आते हैं तो कुछ भ्रम पैदा करते हैं.

शुभेंदु फैक्टर रहा वजह?

बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी भी इस बैठक में शामिल हुए. ऐसा माना जा रहा है कि ये बात ममता को पसंद नहीं आई और यही कारण है कि उन्होंने मीटिंग में शामिल नहीं होने का फैसला किया. ममता ने इस बात को कहा भी कि पीएम ने गुजरात और ओडिशा में विपक्ष के नेता को क्यों नहीं बुलाया? ऐसा केवल बंगाल में ही क्यों किया गया?

गौरतलब है कि शुभेंदु अधिकारी, लंबे वक्त तक ममता के खासमखास रहे हैं. विधानसभा चुनावों से पहले वो बीजेपी में शामिल हो गए थे. नंदीग्राम सीट से अधिकारी ने ममता को विधानसभा चुनाव में भी हरा दिया था.

वहीं इस मामले को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी ट्वीट किया. उन्होंने लिखा-

ममता दीदी का आचरण दुर्भाग्यपूर्ण क्षुद्रता है. यास तूफान ने तमाम आम लोगों को प्रभावित किया है और उन्हें मदद की जरूरत है. दुखद है कि दीदी ने जन कल्याण के ऊपर अपना अहंकार रखा और उनका तुच्छ व्यवहार इसे दिखाता है.

 

मुख्य सचिव को लेकर भी आमने-सामने

बंगाल सीएम ममता बनर्जी के मुख्य सचिव को दिल्ली तलब कर लिया गया. उन्हें 31 मई को सुबह 10 बजे दिल्ली में ज्वाइन करने का फरमान आया है. केंद्र सरकार ने बंगाल सरकार से मुख्य सचिव को जल्द रिलीव करने को कहा है. इस बात पर भी ममता भड़की हुई हैं. उन्होंने कहा कि उनसे बात किए बिना मुख्य सचिव को दिल्ली बुला लिया गया है. मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय का कार्यकाल इसी महीने के आखिर में खत्म हो रहा था जिसे ममता सरकार ने 3 महीने के लिए बढ़ा दिया था.

बंगाल के मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय, ममता बनर्जी के भरोसेमंद अफसर माने जाते हैं. 1987 बैच के IAS हैं. होम कैडर के अलपन हावड़ा, नॉर्थ और साउथ परगना के डीएम रह चुके हैं. 2015 में उन्हें अंतरिम राज्य चुनाव आयुक्त बनाया गया था. कोलकाता के प्रतिष्ठित प्रेसिडेंसी कॉलेज से उन्होंने ग्रेजुएशन किया था.


वीडियो- नेता नगरी: मोदी सरकार ने दूसरे कार्यकाल के दो साल में ऐसा क्या किया, जो नहीं करना चाहिए था?

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