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टिक टॉक को एक और तगड़ा झटका लगा है

केंद्र सरकार ने 59 मोबाइल ऐप बैन कर दिए. इनमें टिकटॉक भी शामिल है. सरकार के इस कदम के बाद टिकटॉक ने सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया. केस लड़ने के लिए टिकटॉक ने पूर्व अटॉर्नी जनरल और सुप्रीम कोर्ट के वकील मुकुल रोहतगी से संपर्क किया. लेकिन उन्होंने टिकटॉक की तरफ से कोर्ट में पेश होने से इनकार कर दिया. कहा कि वो एक चाइनीज ऐप के लिए भारत सरकार के खिलाफ खड़े होकर दलील नहीं देंगे. अब सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने भी टिकटॉक की पैरवी करने से मना कर दिया है. उनका कहना है कि पिछले साल सुप्रीम कोर्ट में उन्होंने टिकटॉक का केस लड़ा था लेकिन तब बात अलग थी.

# इससे पहले क्या मामला हुआ था

फरवरी, 2019 में तमिलनाडु के सूचना और प्रसारण मंत्री एम मानिकंदन का एक बयान आया. उन्होंने कहा कि तमिलनाडु सरकार टिकटॉक ऐप को बैन करवाने के लिए केंद्र सरकार से बात करेगी. मंत्री ने कहा था कि इस ऐप से बच्चे गुमराह हो रहे हैं. इसीलिए इस ऐप को बैन करने की सख्त ज़रूरत है. इसके बाद मद्रास हाईकोर्ट में ऐप को बैन करने की याचिका लगाई गई. याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस किरुबाकरण और जस्टिस एस एस सुंदर की बेंच ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि टिकटॉक ऐप को बैन कर देना चाहिए. बेंच का कहना था कि इस ऐप के माध्यम से अश्लील सामग्री परोसी जा रही है जो बच्चों के लिए बहुत ज़्यादा हानिकारक है. साथ ही मद्रास हाईकोर्ट ने मीडिया को भी निर्देश दिया था कि टिकटॉक पर बने वीडियो का किसी भी तरह से प्रसारण में इस्तेमाल ना किया जाए.

इसके बाद मद्रास हाईकोर्ट के इस फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई. इस मामले में अभिषेक मनु सिंघवी ने टिकटॉक  की पैरवी सुप्रीम कोर्ट में की थी.

सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट का फ़ैसला निरस्त नहीं किया. लेकिन 24 अप्रैल, 2019 तक मद्रास हाईकोर्ट को अपने फ़ैसले पर विचार करने को कहा. इसी के बाद 24 अप्रैल, 2019 को ही मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने टिकटॉक पर लगी अंतरिम रोक हटा दी थी.

# किस आधार पर किया गया बैन?

बैन को लगाने के लिए इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट 2000 के सेक्शन 69 A का हवाला दिया गया है. इस सेक्शन के मुताबिक, पब्लिक द्वारा किसी भी कम्प्यूटर रिसोर्स के ज़रिए जानकारी एक्सेस करने पर केंद्र सरकार या उसके अंग रोक लगा सकते हैं.

इन परिस्थितियों में सेक्शन 69A का इस्तेमाल करके किसी भी कम्प्यूटर रिसोर्स से मिलने वाली सूचना को प्रतिबंधित किया जा सकता है. अगर इस प्रतिबंध का पालन नहीं होता है, तो सात साल तक का कारावास और जुर्माना देना पड़ सकता है.

सरकार के इसी फैसले के खिलाफ टिकटॉक ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट में टिकटॉक का पक्ष रखने के लिए अब तक कोई वकील तैयार नहीं हुआ है.


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