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मृतक के अंतिम संस्कार में 400 लोग शामिल हुए, अस्पताल ने एक कॉल करके सबके होश उड़ा दिए!

महाराष्ट्र के मुंबई में एक व्यक्ति की 15 दिन इलाज होने के बाद 4 जून को मौत हुई. उनकी उम्र 55 साल थी. वह लीवर की समस्या के चलते वसई के एक प्राइवेट अस्पताल में एडमिट थे. मौत के बाद अस्पताल ने उनकी डेडबॉडी परिजनों को सौंप दी. परिवारवालों ने अंतिम संस्कार किया. इसमें करीब 400 लोग शामिल हुए. अब खबर ये है कि उस व्यक्ति की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. और ये बात अस्पताल वालों ने मृतक के परिजनों को अंतिम संस्कार के दूसरे दिन बताई.

अंतिम संस्कार में शामिल लोगों में डर

‘इंडिया टुडे’ के रिपोर्टर सौरभ वक्तानिया की रिपोर्ट के मुताबिक, मामला कार्डिनल ग्रासिअस मेमोरियल हॉस्पिटल का है. अस्पताल वालों ने व्यक्ति की मौत के बाद डेडबॉडी को कोरोना टेस्ट के लिए भेजा था, पर बिना रिपोर्ट आए ही उसे परिजनों को सौंप दिया. परिजनों ने भी जब अंतिम संस्कार के लिए अस्पताल से बॉडी के बारे में पूछा, तो अस्पताल ने सौंप दिया. जब अंतिम संस्कार कर दिया गया, तब दूसरे दिन अस्पताल ने फोन करके बताया कि मृत व्यक्ति की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. इस बात के सामने आने से अंतिम संस्कार में शामिल लोगों में डर है कि कहीं वे तो अब संक्रमित नहीं.

इस मामले में संज्ञान लेते हुए वसई के स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर बालसाहेब जाधव ने कहा कि अंतिम संस्कार के अगले दिन कोरोना रिपोर्ट आई थी. उन्होंने अस्पताल को नोटिस भेजा है. साथ ही नगर निगम ने भी अस्पताल को नोटिस भेजा है. कहा कि बिना कोरोना रिपोर्ट आए परिजनों को बॉडी सौंपने का कारण बताया जाए.

अस्पताल प्रशासन का चूक से इनकार

उधर, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीज 15 दिन पहले भर्ती हुआ था. लीवर की समस्या थी. पहले कोरोना का टेस्ट करवाया गया था. पर रिपोर्ट नेगेटिव आई थी और लक्षण भी नहीं थे. प्रशासन का कहना है कि डेडबॉडी सौंपने के पहले उन्हें वेंटिलेटर और डायलिसिस पर रखा गया था. परिजनों को भी कोरोना से संबंधित निर्देश दिया गया था. बॉडी को पैक करके सौंपा गया था. अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इस तरह के आरोप लगाना सही नहीं है.

प्रोटोकॉल के मुताबिक, अब किसी परिवार को डेडबॉडी सौंपने के पहले उसका कोरोना का टेस्ट होना चाहिए, जिससे अंतिम संस्कार करते समय परिवार सावधानी बरत सके.


देश में कितने मामले बढ़े, ये देखिए


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