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लोगों ने पूछा- किसान बिल के बारे में कुछ जानते भी हो, दिलजीत दोसांझ ने दनादन पॉइंट्स गिना दिए

किसानों से जुड़े तीन विधेयकों का ज़बरदस्त विरोध हो रहा है. किसान और नेता तो विरोध कर ही रहे हैं, अब पंजाब के सेलिब्रिटीज़ भी इस विरोध में साथ हो लिए हैं. सिंगर-एक्टर दिलजीत दोसांझ ने भी इस मुद्दे पर ट्वीट किया. उनके ट्वीट के बाद एक यूज़र ने उनसे सवाल किया, ‘क्या आप जानते भी हैं कि उन विधेयकों में ऐसा क्या है, जिसका विरोध हो रहा है,” तो दिलजीत ने इसका भी जवाब दिया.

दरअसल, 17 सितंबर को विधेयकों के विरोध में दिलजीत ने कुछ किसानों की और प्रदर्शन की कुछ तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा था,

“किसान बचाओ देश बचाओ.
किसान विरोधी बिल का हम सब विरोध करते हैं.”

इसके साथ दिलजीत ने किसानों के सपोर्ट में कुछ लाइनें भी लिखीं, पंजाबी में. इस ट्वीट पर नीतीश शर्मा नाम के यूज़र ने लिखा,

“मिस्टर दिलजीत दोसांझ, क्या आप बता सकते हैं कि किसान किन मुद्दों के खिलाफ हैं? मुझे नहीं लगता कि पूरा अध्यादेश किसानों के खिलाफ है. इसलिए फेक न्यूज़ न फैलाएं.”

इस पर फिर दिलजीत ने तीन ऐसे पॉइंट्स बताए, जो उन्हें किसान विरोधी लगे. लिखा,

“पहला- किसान खुद कीमत तय नहीं कर सकते.
दूसरा- कोई न्यूनतम समर्थन मूल्य तय नहीं किया गया है.
तीसरा- किसानों के पास फसलों को स्टोर करके रखने के लिए कोई गोदाम नहीं है, तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उनके पास कितनी लिमिट है.
हम किसानों से उम्मीद करते हैं कि वो देश का पेट भरें, लेकिन वो खुद कीमत तय नहीं कर सकते. शाबाश.”

इसके अलावा पंजाबी सिंगर एमी विर्क ने भी ट्वीट करके इन विधेयकों का विरोध किया और किसानों को सपोर्ट किया. उन्होंने प्रदर्शन की तस्वीर पोस्ट करते हुए बताया कि वो भले ही अभिनेता और सिंगर हैं, लेकिन पहले वो किसान के बेटे हैं. आगे ये भी बताया कि 2011-12 में उनके किसान पिता ने उनका पहला एल्बम रिलीज़ करने में उनकी मदद की थी. पांच लाख रुपए जुटाए थे. एमी ने लिखा,

“अब ये बिल पास हो रहा है, तो बहुत से लोगों के सपने इसके साथ मर जाएंगे. इसलिए मैं इस बिल के खिलाफ एकजुट होकर विरोध करने का आग्रह करता हूं. भले ही आप किसी भी पार्टी के हों, आइए राजनीति को एक तरफ रखकर एकसाथ आएं, अधिकारों के लिए लड़ें.”

इसके पहले 17 सितंबर को विधेयकों के विरोध में हरसिमरत कौर बादल ने भी इस्तीफा दे दिया. वो शिरोमणि अकाली दल की सांसद हैं. और मोदी सरकार में फूड प्रॉसेसिंग इंडस्ट्रीज मिनिस्टर थीं. इस्तीफा देते हुए उन्होंने कहा,

“मैंने किसान विरोधी अध्यादेशों और कानून के विरोध में केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है. किसानों के साथ उनकी बेटी और बहन के रूप में खड़े होने पर गर्व है.”

इन विरोधों के बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने भी कई सारे ट्वीट किए. और कहा कि विधेयक किसान विरोधी नहीं हैं. उन्होंने लिखा,

“लोकसभा में ऐतिहासिक कृषि सुधार विधेयकों का पारित होना देश के किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है. ये विधेयक सही मायने में किसानों को बिचौलियों और तमाम अवरोधों से मुक्त करेंगे.”

अगले ट्वीट में लिखा,

“इस कृषि सुधार से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए नए-नए अवसर मिलेंगे, जिससे उनका मुनाफा बढ़ेगा. इससे हमारे कृषि क्षेत्र को जहां आधुनिक टेक्नोलॉजी का लाभ मिलेगा, वहीं अन्नदाता सशक्त होंगे.”

कौन-से तीन विधेयकों का विरोध हो रहा है

# मोदी सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 में संशोधन किया है. इसके जरिए खाद्य पदार्थों की जमाखोरी पर लगा प्रतिबंध हटा दिया गया है. यानी व्यापारी कितना भी अनाज, दालें, तिलहन, खाद्य तेल वगैरह जमा कर सकते हैं.

# कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक, 2020 है. इसका उद्देश्य कृषि उत्पाद विपणन समितियों यानी एपीएमसी मंडियों के बाहर भी कृषि से जुड़े उत्पाद बेचने और खरीदने की व्यवस्था तैयार करना है. यानी मोदी सरकार ने वो व्यवस्था खत्म कर दी है, जिसमें किसान अपनी उपज APMC मंडियों में लाइसेंसधारी खरीदारों को ही बेच सकते थे.

# मूल्य आश्वासन पर किसान (बंदोबस्ती और सुरक्षा) समझौता और कृषि सेवा विधेयक, 2020, जो कि कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को कानूनी वैधता प्रदान करता है, ताकि बड़े बिजनेस वाले और कंपनियां कॉन्ट्रैक्ट पर जमीन लेकर खेती कर सकें.

ये तीनों बिल भयकंर विरोध के बाद भी लोकसभा में पास हो गए हैं. आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 विधेयक, 15 सितंबर को पास हुआ था. बाकी दो 17 सितंबर को पास हुए. ये तीनों विधेयक इससे संबंधित अध्यादेशों की जगह लेंगे. ये अध्यादेश जून में लागू किए गए थे.


वीडियो देखें: सरकार के अध्यादेशों का विरोध कर रहे थे हरियाणा के किसान, पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया

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