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लड़की के हाथ कट गए थे, ट्रांसप्लांट हुआ, अब हाथों का रंग बदल रहा है

कभी-कभी अच्छी चीजें टूट जाती हैं, ताकि उससे बेहतर कुछ बन सके.

हाथ ट्रांसप्लांट कराने के बाद श्रेया ने पहली बार डायरी लिखी तो ये वाक्य लिखा.

श्रेया फिर से पहले जैसे लिख लेती हैं. उनकी हैंडराइटिंग भी पहले की तरह हो गई है. लेकिन इस सब के बाद डॉक्टर्स चौंके हुए हैं. श्रेया के हाथ के रंग बदल रहे हैं. श्रेया का कृत्रिम हाथ पिछले हाथ से थोड़ा डार्क था और उंगलियां मोटी. केरल के रहने वाले 20 वर्षीय एक शख्स की मृत्यु के बाद उसका हाथ अगस्त, 2017 में श्रेया में ट्रांसप्लांट किया गया.

क्या है मामला

पुणे की रहने वाली 20 वर्षीय श्रेया का 2017 में हाथ ट्रांसप्लांट हुआ. डेढ़ साल तक फिजियोथेरेपी चली. सब कुछ ठीक रहा. और फिर कुछ समय बाद हाथों का रंग बदलने लगा. अब हाथ का रंग भी श्रेया के शरीर के रंग के जैसा हो रहा है. ट्रांसप्लांट किये गए हाथ का रंग श्रेया के हाथ के रंग से डार्क था. सितंबर, 2016 में पुणे से मनीपाल, कर्नाटक जाते वक्त बस हादसे में श्रेया को अपने दोनों हाथ गंवाने पड़े थे. हादसे के एक साल के बाद कोच्ची स्थित अमृता इंस्टिट्यूट में हाथ की सर्जरी के लिए रजिस्टर्ड कराया. अगस्त 2017 में सर्जरी हुई.

हाथ के बदलते रंगों पर इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में श्रेया ने कहा,

मुझे नहीं पता ये कैसे हुआ. लेकिन अब ये मेरे हाथ की तरह लग रहा. ट्रांसप्लांट होने के बाद मेरे हाथ का रंग काफी डार्क था. मुझे इसकी चिंता नहीं थी, लेकिन अब मेरे रंग के शेड्स से यह मैच करता है. मैं खुश हूं.

श्रेया, एशिया की पहली इंटर जेंडर हैंड ट्रांसप्लांट कराने वाली लड़की हैं. एक आंकड़ें के मुताबिक दुनिया भर में 200 से भी कम हैंड ट्रांसप्लांट हुए हैं. और कहीं भी हाथों के इस तरह हाथ के रंग और आकार के बदलने के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं. डॉक्टर्स का कहना है कि यह इस तरह का पहला मामला है.कुछ दिनों पहले इस तरह का एक मामला अफगानिस्तान में भी सामने आया था.

कौन था हाथ देने वाला शख्स

सचिन. एर्नाकुलम के राजगिरी कॉलेज में बी. कॉम का स्टूडेंट. तारीख- 9 अगस्त 2017. बाइक से कहीं जा रहा था और तभी एक्सीडेंट हो गया. अस्पताल ले जाया गया. डॉक्टर्स ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया. परिवार वालों ने तय किया कि बॉडी डोनेट करेंगे. इधर श्रेया के अभिवावक भी डोनर की तालाश में थे. अस्पताल से होटल लौटे ही थे कि फोन गया और फिर उसी दिन यानी 9 अगस्त 2017 को ही श्रेया का ऑपरेशन किया गया. 13 घंटों तक चले इस ऑपरेशन में  20 डॉक्टर थे. ऑपरेशन के बाद डेढ़ सालों तक श्रेया को फिजियोथेरेपी दी गई.

एक आंकड़ें के मुताबिक दुनिया भर में 200 से भी कम हैंड ट्रांसप्लांट हुए हैं. और कहीं भी हाथों के इस तरह हाथ के रंग और आकार के बदलने के कोई वैधानिक आंकड़ें उपलब्ध नहीं हैं.
एक आंकड़ें के मुताबिक दुनिया भर में 200 से भी कम हैंड ट्रांसप्लांट हुए हैं.

क्या कह रहे हैं डॉक्टर्स

अमृता इंस्टिट्यूट में प्लास्टिक सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुब्रामानिया अय्यर ने बताया,

हम एक साइंस जर्नल में हैंड ट्रांसप्लांट के दो मामलों को प्रकाशित कराने की उम्मीद कर रहे हैं. इसमें कुछ टाइम लगेगा. हम श्रेया के हाथों के रंग बदलने पर नज़र बनाये हुए हैं. लेकिन हमें अभी और तथ्यों की जरूरत है. अफगानिस्तान के एक सिपाही के हाथों का रंग भी इसी तरह बदल रहा था. लेकिन बीते सप्ताह उसकी मौत हो गई. उसके बारे में हम बहुत जानकारी नहीं जुटा सके.

वहीं, प्लास्टिक सर्जन डॉ. मोहित शर्मा का कहना है कि इंटर जेंडर हैंड ट्रांसप्लांट पर काफी कम रिसर्च हुई है. डॉ मोहित, श्रेया के हाथ का ऑपरेशन करने वाली टीम के सदस्य हैं. श्रेया को फिजियोथेरेपी दे रही डॉ. केतकी डोके ने बताया,

 पुरुष के मांसपेशियों के काम करने का तरीका महिलाओं के मांसपेशियों के काम करने के तरीके से अलग होता है. यह अब तक अप्रत्याशित है कि श्रेया के हाथ इस तरह से काम करेंगे.श्रेया के तीन में से एक नर्व और सभी उंगलीयों की मांसपेशियां अच्छे से काम कर रहीं हैं और समय के साथ और ठीक होंगी.

श्रेया की मां का कहना है कि पिछले तीन-चार महीनों में उसकी उंगलीयां लंबी हो रही हैं. मैं इसका हाथ रोज़ देखती थी. कुछ समय बाद मैंने देखा कि उंगलीयां लड़कियों की उंगलीयों की तरह हो रहीं हैं. कलाइयां भी छोटी हो रहीं हैं. यह सब काफी सुखद है.ऑपरेशन के बाद जब श्रेया का वजन कम हुआ तो डॉक्टर्स को लगा कि शरीर के घटते  वजन के कारण उसके हाथ ऐसे हो गए हैं. श्रेया की मां ने बताया की उंगलियां भी पतली हो रहीं तो डॉक्टर्स ने सिरियसली उस पर नज़र रखना शुरू किया.

फिलहाल, श्रेया के फिजियोथिरेपिस्ट ने बताया कि तीन में से एक नर्व और उंगलीयों की मांसपेशियां अच्छे से काम कर रहीं हैं. समय के साथ और ठीक होंगी.वह अपने हाथों से सामान्य प्रयोग करना सीख रही है. श्रेया ने अपनी इंजिनियरिंग की पढ़ाई छोड़ दी और अब इक्नॉमिक्स में बैचलर्स कर रहीं हैं. पिछले सेमेस्टर की कॉपियां श्रेया ने खुद लिखी हैं.


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