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क्या कोरोना के कारण अनाथ हुए बच्चों को लेकर मोदी सरकार झूठ बोल रही है?

(इस आर्टिकल के छठे पैरा में बदलाव किया गया है. घटनाओं के जिस टाइम फ्रेम का ज़िक्र स्टोरी में पहले किया गया था, वो छठे पैरा में मिसिंग था. अब टाइम फ्रेम जोड़कर पैरा अपडेट कर दिया गया है.)

कोरोना के कारण सैकड़ों बच्चों ने अपने माता-पिता में से एक को या दोनों को खो दिया है. सुप्रीम कोर्ट में NCPCR यानी नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स ने जानकारी दी है कि मार्च 2020 के बाद से देश में 1742 बच्चे अनाथ हो गए हैं. इसके अलावा, NCPCR ने कहा है कि कोरोना से 7464 बच्चों ने अपने दोनों अभिभावकों में से किसी एक को खोया है. इस दौरान 140 बच्चों को ऐसे ही छोड़ दिया गया.

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते ही NCPCR से आंकड़े मांगे थे. कोर्ट ने कहा था कि कोरोना संकट काल में कितने बच्चे अनाथ हो गए हैं. NCPCR ने मंगलवार 1 जून को कोर्ट को जानकारी सौंपी जिसमें बताया गया कि बाल स्वराज पोर्टल पर 9346 बच्चों का डेटा अपलोड किया गया है. और उनमें से ही ये डेटा आया है.

ये डेटा मार्च 2020 से लेकर 29 मई 2021 तक का है. डेटा के मुताबिक 1224 बच्चे अब एक अभिभावक के साथ रह रहे हैं. 985 ऐसे हैं जो परिवार के एक सदस्य के साथ हैं. 6612 ऐसे हैं जो माता या पिता में से एक के साथ रह रहे हैं. 31 बच्चे ऐसे हैं जिनको स्पेशल एडोप्शन एजेंसी में भेजा गया है.

ये डेटा 25 राज्यों और 5 केंद्रशासित प्रदेशों का है. इसके मुताबिक मध्य प्रदेश में 318 बच्चे अनाथ हुए हैं जबकि 104 को छोड़ दिया गया. बिहार में 292 बच्चे और यूपी में 270 बच्चे अनाथ हुए हैं. तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी 100 (तीनों से 100-100) से अधिक बच्चों ने अपने माता-पिता को खो दिया. यूपी में 1830 बच्चों ने माता-पिता में से किसी एक को खोया है, बिहार में ऐसे बच्चों की संख्या 1035 है और केरल में 895 है.

अब केंद्र सरकार पर उठ रहे सवाल

केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने 25 मई को एक ट्वीट किया था जिसमें उन्होंने कहा था कि,”कोविड-19 के कारण जिन बच्चों ने अपने माता-पिता को खोया है, उनकी मदद के लिए भारत सरकार प्रतिबद्ध है. 1 अप्रैल 2021 से 2 बजे (25 मई 2021) तक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 577 ऐसे बच्चों के बारे में जानकारी मिली जिनके माता-पिता, कोरोना के कारण गुजर गए हैं.”

यानी केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, 1 अप्रैल से 25 मई तक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 577 बच्चों को अनाथ होने की जानकारी मिली है. वहीं दैनिक भास्कर अख़बार ने एक रिपोर्ट में दावा किया है कि अकेले राजस्थान में ही 411 बच्चे अनाथ हुए हैं. अखबार ने सवाल उठाया कि “जब एक ही प्रदेश(राजस्थान) में इतने बच्चे अनाथ हुए हैं तो देशभर में यह आंकड़ा सिर्फ 577 ही कैसे हो सकता है?” अखबार ने अपनी रिपोर्ट में ज़िक्र किया है कि राजस्थान सरकार ने 20 मई तक के आंकड़ों में 17 बच्चों को ही अनाथ बताया गया था. बाद में 28 मई तक के आंकड़ों में ये संख्या 411 तक पहुंच गई. NCPCR के आंकड़े विस्तृत हैं. इसके मुताबिक, बीते 14 महीनों (अप्रैल 2020-मई 2021) में 1742 बच्चे अनाथ हुए हैं.

PM केयर्स फंड से बच्चों की मदद करेगी सरकार

अनाथ बच्चों की सही संख्या क्यों ज़रूरी है? दरअसल हाल ही में केंद्र सरकार ने ऐलान किया था कि पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना के तहत उन बच्चों को सहायता राशि दी जाएगी जिन्होंने कोविड-19 के कारण अपने माता-पिता या गार्जियन्स को खो दिया है. ऐसे बच्चों को फ्री एजुकेशन दी जाएगी और आयुष्मान भारत के तहत 5 लाख का हेल्थ बीमा दिया जाएगा. इसके लिए जो भी प्रीमियम बनेगा, उसका भुगतान भी पीएम केयर्स फंड से किया जाएगा. ऐसे बच्चों को 18 साल की उम्र से मासिक सहायता राशि दी जाएगी. 23 साल की उम्र में पीएम केयर्स फंड से 10 लाख रुपये भी दिए जाएंगे. उन्हें उच्च शिक्षा के लिए लोन भी आसानी से दिया जाएगा. इसका ब्याज भी पीएम केयर्स फंड से दिया जाएगा. बच्चों की ड्रेस, किताब-कॉपी आदि पर होने वाले खर्च को भी पीएम केयर्स फंड से दिया जाएगा. इसलिए अनाथ बच्चों की सही संख्या ज़रूरी है. कई जानकार ये भी मानते हैं कि NCPCR की संख्या भी पूरी तस्वीर बयां नहीं करती है. होम आइसोलेशन में हुई मौतें या कोविडजनित किसी और कॉम्प्लिकेशन से हुई मौतें अगर मौत का कारण हैं, तो सरकार उन्हें बहुत हद तक कोविड से हुई मौतों में नहीं गिन पा रही है. ऐसे में सरकारी आंकड़ा और भी संदेहास्पद हो जाता है.


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