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UP: चुनावी ड्यूटी में लगे 1621 टीचरों की मौत का दावा, लेकिन सरकार 3 मौतें ही मान रही

यूपी में पंचायत चुनाव हुए. शुरुआत से ही बढ़ते कोरोना संक्रमण और इसके कारण चुनाव ड्यूटी में लगे शिक्षकों की मौत की खबरें सामने आने लगीं. शिक्षकों के अलावा जो राज्य कर्मचारी भी इस ड्यूटी में लगे थे, उनकी मृत्यु की खबरें भी सामने आईं. विरोध की आवाजें उठीं, विपक्ष ने भी आवाज उठाई. तमाम आरोपों के बाद, यूपी के बेसिक शिक्षा विभाग का एक बयान सामने आया है जिसमें कहा गया है कि चुनाव ड्यूटी में लगे केवल 3 शिक्षकों की ही मृत्यु इस दौरान हुई है.

18 मई को जारी इस प्रेस नोट पर बेसिक शिक्षा विभाग के अनु सचिव, सत्य प्रकाश के हस्ताक्षर हैं. इस प्रेस नोट में साफ-साफ लिखा है कि राज्य निर्वाचन आयोग के पास अभी तक जिलों के कलेक्टरों द्वारा केवल 3 शिक्षकों की मृत्यु की प्रमाणिक सूचना भेजी गई है. इन तीनों के परिवार को अनुग्रह राशि का भुगतान शीघ्र कराया जाएगा. प्रेस नोट के आखिरी पैरा में ये भी लिखा है कि किसी भी भ्रामक एवं तथ्यों के विपरीत प्रकाशित खबरों से भ्रमित ना हों.

UP govt press note
सरकार की ओर से जारी प्रेस नोट

शिक्षक संघ की ओर से क्या दावा किया गया है?

सरकारी आंकडे के मुताबिक बेशक चुनाव ड्यूटी में लगे 3 शिक्षकों की मौत हुई है, लेकिन शिक्षक संगठनों के दावों पर भरोसा करें तो ये आंकडा 1621 का है. दोनों के आंकडों में जमीन-आसमान का फर्क है. उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ ने 16 मई को सरकार को एक लिस्ट भेजी है, जिसमें इन सभी 1621 टीचरों के नाम, उनके स्कूल का नाम, ब्लॉक और जिले का नाम, मृत्यु की तिथि और परिवार का मोबाइल नंबर भी लिखा है. संगठन का दावा है कि चुनाव शुरू होने से खत्म होने तक इन सभी ने कोरोना के कारण अपनी जान गंवाई है और सरकार को एक-एक करोड़ की आर्थिक सहायता व एक अनुकंपा नौकरी, पीड़ित परिवार को देनी चाहिए.

उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर दिनेश चन्द्र शर्मा के मुताबिक, आजमगढ़ में सबसे अधिक 68 शिक्षकों की मौत हुई है वहीं प्रदेश के 23 जिले ऐसे हैं जहां 25 से अधिक शिक्षकों की जान गई है. उन्होंने कहा,

“सरकार उन 3 शिक्षकों का नाम बताए जिनकी मृत्यु की बात कही है. वो 3 का नाम नहीं बता रहे, मैं 1621 के नाम बता रहा हूं. ये वो 1621 हैं जिन्होंने चुनाव में ड्यूटी की वजह से अपनी जान गंवाई है. सरकारी आंकडा फर्जी है. गलत है. सरकार को चाहिए कि सभी मृतक शिक्षकों के परिवार में से योग्य व्यक्ति को अनुकंपा नौकरी दे और एक-एक करोड़ का मुआवजा दे.”

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष हरि किशोर तिवारी ने कहा,

“चुनाव में लगभग ढाई लाख शिक्षक लगे थे और ढाई लाख राज्य कर्मचारी लगे थे. ऐसे में केवल 3 मौत का आंकडा देना बेहद दुखद है. अधिकारी, शासन को गलत सूचनाएं दे रहे हैं. सही जानकारी ऊपर तक नहीं पहुंचाई जा रही है. शिक्षक और कर्मचारी रो रहे हैं. बिल्कुल गलत और झूठा आंकडा जारी किया गया है. हर जिले में मिनिमम 10 से 12 मौत हुई हैं. कई जिलों में 25 से अधिक मौत भी हुई हैं. 1000 से अधिक तो केवल कर्मचारियों की ही मृत्यु हुई है.”

वहीं इस पूरे मामले पर रायबरेली सदर सीट से विधायक अदिति सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक चिट्ठी लिखी है. उन्होंने लिखा है कि चुनाव ड्यूटी में लगे 52 टीचरों का कोरोना के कारण निधन हो गया. अदिति ने सरकार से इन सभी के लिए सांत्वना सहयोग राशि की मांग की है. इस पर रायबरेली के BSA यानी बेसिक शिक्षा अधिकारी आनंद प्रकाश शर्मा ने ‘दी लल्लनटॉप’ से फोन पर हुई बातचीत में कहा कि जनपद रायबरेली में किसी भी टीचर की मृत्यु पंचायत चुनाव के दौरान कोविड से नहीं हुई.

गौरतलब है कि चुनाव ड्यूटी के दौरान शिक्षकों के अलावा अन्य कर्मचारियों को भी प्रशिक्षण दिया गया था. इसके बाद पोलिंग पार्टियों को रवाना किया गया. फिर मतदान कराया गया और अंत में मतगणना भी कराई गई. आरोप है कि इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग आदि का ख्याल नहीं रखा गया और चुनावी ड्यूटी में लगे लोग संक्रमित होते रहे. बार-बार पंचायत चुनाव रोकने की गुहार शिक्षक संघ की ओर से लगाई जाती रही. शिक्षकों और कर्मचारियों के अलावा चुनाव ड्यूटी में लगे सुरक्षाकर्मियों आदि भी कोरोना की चपेट में आए.


वीडियो- UP में कोरोना से हुई मौत के आंकड़ों से बहुत ज्यादा हैं डेथ सर्टिफिकेट की संख्या

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