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ये रिपोर्ट पढ़ लेंगे तो दोबारा कोरोना पॉजिटिव निकलने पर ज्यादा अलर्ट रहेंगे

कोरोना की चपेट में आकर एक बार ठीक होने के बाद फिर से कोरोना पॉज़िटिव होने के तमाम केस आते रहते हैं. लेकिन अब तक कोविड-19 रीइंफेक्शन की कोई स्पष्ट परिभाषा तय नहीं थी. ऐसे में जो लोग ठीक होने के कुछ समय बाद दोबारा पॉज़िटिव होते हैं, उनमें एक पैनिक रहता है. अब इसकी परिभाषा तय कर दी गई है. ये तय कर दिया गया है कि कितने दिनों के अंदर अगर फिर से कोरोना पॉजिटिव निकलें तो उसे दोबारा संक्रमण माना जाएगा.

देश में बायोमेडिकल रिसर्च की सबसे बड़ी संस्था इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने 1300 लोगों पर एक अध्ययन किया. नतीजा निकला–

अगर किसी व्यक्ति की पिछली कोविड पॉज़िटिव  रिपोर्ट और दूसरी पॉज़िटिव रिपोर्ट के बीच 102 दिन या ज़्यादा का अंतर है, तो उसे कोरोना वायरस रीइंफेक्शन का केस माना जाना चाहिए. ये भी ध्यान रखें कि इन दोनों पॉज़िटिव रिपोर्ट के बीच वो व्यक्ति अनिवार्य रूप से एक बार टेस्ट में नेगेटिव भी निकला हो.

ICMR के इस अध्ययन को कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी ने अपने मेडिकल जर्नल में भी जगह दी है. ICMR की तमाम लैब में 22 जनवरी से 7 अक्टूबर 2020 के बीच 8 करोड़ से ज़्यादा कोविड टेस्ट किए गए थे. इन्हीं के आधार पर तैयार डेटाबेस की मदद से कुछ लोगों के टेलीफोन के जरिए इंटरव्यू लिए गए. उसके आधार पर कोविड-19 रीइंफेक्शन की परिभाषा तैयार की गई. बताते चलें कि डॉक्टर एक्सपर्ट्स सितंबर-अक्टूबर 2020 से ही ये जानने की कोशिश में लगे थे कि असल में रीइंफेक्शन को परिभाषित कैसे किया जाए.

रीइंफेक्शन के मामले अभी कम

अब इस परिभाषा को आधार मानकर डॉक्टर्स का ये भी कहना है कि इस लिहाज से कोविड रीइंफेक्शन के मामले फिलहाल कम ही हैं. जिन 1300 लोगों को अध्ययन में शामिल किया गया था, उनमें से सिर्फ 58 लोगों में ही रीइंफेक्शन पाया गया. हालांकि रीइंफेक्शन की ऐसी परिभाषा अलग-अलग देशों ने अलग-अलग अध्ययन और परिणामों के आधार पर तैयार कर रखी है. जैसे भारत में जिस अंतर को 102 दिन का माना गया है, उसे अमेरिका में 90 दिन ही माना गया है. माने 90 दिन या ज़्यादा के अंतर में दो कोरोना पॉज़िटिव रिपोर्ट आने पर उसे रीइंफेक्शन माना जाता है. वहां रीइंफेक्शन के केस करीब एक फीसदी बताए जा रहे हैं.

रीइंफेक्शन से जुड़ी और बातें जानने के लिए सेंटर फॉर डिसीज़ कंट्रोल (CDC) शोध कर रहा है. इससे पता चल सकेगा कि रीइंफेक्शन क्या पहले इंफेक्शन से ज़्यादा ख़तरनाक है या उतना ही या कम? साथ ही दोबारा संक्रमण होने का शरीर की इम्युनिटी पर कितना असर पड़ता है. इस दौरान किसी दूसरे तक वायरस फैलने की कितनी संभावना रहती है?


चीन और कोरोना वायरस पर WHO की ये रिपोर्ट देख दुनिया के 14 देश बुरी तरह भड़क गए

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