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जानिए मौलाना मसूद के जैश-ए-मोहम्मद की 10 बातें

14 फरवरी, 2019 को अवंतीपुरा के गोरीपोरा में हुए आत्मघाती आतंकी हमले में अब तक 37 से ज़्यादा जवान शहीद हो चुके हैं. कई जवान घायल हैं. इस हमले की जिम्मेदारी ली है जैश-ए-मोहम्मद ने और इस हमले के पीछे जिस आत्मघाती आतंकी का नाम सामने आया है वो है आदिल अहमद डार. यह आतंकी संगठन एक समय जम्मू-कश्मीर में सबसे ज्यादा सक्रिय था.

जैश-ए-मोहम्मद के बारे में 10 बातें:

1

जैश-ए-मोहम्मद का मतलब होता है ‘मुहम्मद की सेना’. पैगंबर मुहम्मद को इस धरती पर अल्लाह का आखिरी पैगंबर माना जाता है. ‘जेश मुहम्मद’ से कनफ्यूज मत करिएगा. जेश मुहम्मद एक और आतंकी संगठन है जो इराक में ऑपरेट करता है.


 

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जैश-ए-मोहम्मद कश्मीर के सबसे खतरनाक आतंकी संगठनों में से है और वहां कई आतंकी हमले कर चुका है. यह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से ज्यादा ऑपरेट करता है. मकसद है जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग कराना.


 

3

पाकिस्तान ने 2002 से इस संगठन पर बैन लगा रखा है. पर बैन का क्या है. बैन तो तालिबान और लश्कर पर भी है. भारत और पाकिस्तान के अलावा ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूएई, ब्रिटेन, अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र, इसे आतंकी संगठन मानते हैं.


 

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जैश-ए-मोहम्मद को बनाया था मौलाना मसूद अजहर ने. वही खतरनाक आतंकी, जिसे छुड़ाने के चक्कर में 1999 में कंधार विमान अपहरण हुआ था. यात्रियों की जान बचाने के लिए अटल सरकार ने अजहर को छोड़ दिया था. जब वो छूटा तो वह आतंकी संगठन हरकत-उल-मुजाहिदीन (HUM) से अलग हो गया. नया गुट बनाया. नाम रखा, जैश-ए-मोहम्मद. मौलाना मसूद अजहर के साथ HUM के कई बड़े आतंकी नए गुट में शामिल हो गए.


 

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बताया जाता है कि जैश-ए-मोहम्मद को बनाने में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI, अफगानिस्तान की तालिबान आलाकमान, ओसामा बिन लादेन और पाकिस्तान के कई सुन्नी संगठनों ने मदद की थी.


 

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दिसंबर 2001 में संसद पर हुए हमले में भी जैश-ए-मोहम्मद का हाथ था. मामले में अफजल गुरु समेत चार आतंकियों को गिरफ्तार किया गया. उन पर केस चला और चारों को दोषी पाया गया. हमलावरों को अफजल को फांसी की सजा हुई. हमलावरों को लॉजिस्टिक्स पहुंचाने वाले अफजल को फांसी की सजा दी गई.


 

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जनवरी 2002 में परवेज मुशर्रफ के दौर में पाकिस्तान ने भी इस गुट पर बैन लगा दिया. बताया जाता है कि इसके बाद संगठन नए नाम से ऑपरेट करने लगा. ये नाम था- ‘खद्दाम उल-इस्लाम.’


 

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जैश-ए-मोहम्मद की हाफिज सईद के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से यारी रही है. 2001 में संसद हमले को दोनों संगठनों ने मिलकर अंजाम दिया था.


 

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फरवरी 2002 में कराची में अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल की अगवा करके हत्या कर दी गई थी. इसके पीछे भी जैश-ए-मोहम्मद का हाथ माना जाता है.


 

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2009 में पुलिस ने जैश-ए-मोहम्मद के चार आतंकियों को धर दबोचा था, जो न्यूयॉर्क शहर में बम धमाके और अमेरिकी वायुसेना पर मिसाइलें दागने की साजिश रच रहे थे. यह कार्रवाई एक अज्ञात शख्स से मिली सूचना के बाद की गई थी. उसने खुद को जैश से जुड़ा ही बताया था.

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