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पड़ताल: मोदी सरकार ने कोरोना के दौरान अडानी ग्रुप को प्राइवेट ट्रेनें चलाने की इजाज़त दी?

दावा

एक चलती मालगाड़ी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. इस मालगाड़ी के डिब्बों पर ‘Adani’ लिखा दिख रहा है. वीडियो में एक शख़्स दावा कर रहा है कि सामने से गुज़र रही मालगाड़ी अडानी की है. इसी वीडियो के आधार पर सोशल मीडिया यूज़र्स दावा कर रहे हैं कि मोदी सरकार ने भारतीय रेल को अडानी के हाथों बेच दिया है.

राजीव शर्मा ने फ़ेसबुक पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा,

जहां “भारतीय रेल” लिखा होता था आज अडानी रेल लिखी ट्रेनें गुजरने लगी हैं।
मन में कैसे भाव उठ रहे ??
देश को बिकता हुआ सामने देख रहे हैं लेकिन देश की रक्षा नहीं कर पा रहे हैं

जहां “भारतीय रेल” लिखा होता था आज अडानी रेल लिखी ट्रेनें गुजरने लगी हैं।
मन में कैसे भाव उठ रहे ??
देश को बिकता हुआ सामने देख रहे हैं लेकिन देश की रक्षा नहीं कर पा रहे हैं 😥😥

Posted by Rajeev Sharma on Sunday, 6 September 2020

(आर्काइव लिंक)

निलाद्री शेखर बिस्वास ने ट्वीट किया,

प्रयागराज में अडानी की निजी ट्रेन…

कोरोना के बाद जब पुनर्बहाली होगी,तब अन्य उद्योगपतियों की ट्रेन भी दिखेंगी…

(आर्काइव लिंक)

ऐसे ही कुछ और दावे आप यहां और यहां क्लिक कर देख सकते हैं. (आर्काइव लिंक) (आर्काइव लिंक).

पड़ताल

‘दी लल्लनटॉप’ ने वीडियो के साथ किए जा रहे दावे की पड़ताल की. हमारी पड़ताल में ये दावा भ्रामक निकला. भारत में निजी कंपनियां 2007 से ही मालगाड़ियों के परिचालन में हिस्सा ले रही है.

कीवर्ड्स की मदद से सर्च करने पर हमें इकोनॉमिक्स टाइम्स की एक रिपोर्ट मिली. 5 जनवरी, 2007 की इस रिपोर्ट का टाइटल है,

Railways opens container business to pvt players

रेलवे ने मालढुलाई बिजनेस में निजी कंपनियों की एंट्री को दिखाई हरी झंडी

रिपोर्ट के मुताबिक,

14 निजी कंपनियों ने सरकार के साथ समझौते पर दस्तख़त किए. इसमें रिलायंस इंफ़्रास्ट्रक्चर, अडानी लॉजिस्टिक्स, गेटवे डिस्ट्रिपार्क्स, पीआरसी जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हुईं. इस समझौते के तहत, निजी कंपनियां मालगाड़ी बनाने वाली कंपनी से कंटेनर खरीदेंगी, अंतर्देशीय डिपो बनाएंगी और अपने लिए कस्टमर की तलाश करेंगी. जबकि इन ट्रेनों को चलाने की ज़िम्मेदारी इंडियन रेलवे की होगी.(आर्काइव लिंक)

आगे सर्च करने पर हमें इकोनॉमिक टाइम्स की एक और रिपोर्ट मिली. ये 4 जुलाई, 2007 को पब्लिश हुई थी. रिपोर्ट के अनुसार,

अडानी ग्रुप की कंपनी अडानी लॉजिस्टिक्स अगस्त के अंत तक मालगाड़ियों का परिचालन करने के लिए तैयार है. अडानी लॉजिस्टिक्स के पास कैटेगरी-1 पैन इंडिया यानी पूरे भारत में मालगाड़ी चलाने का लाइसेंस है.

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट.

(आर्काइव लिंक)

अब आते हैं वायरल वीडियो पर. गौर से देखने पर पता चला कि इन डिब्बों पर ‘adani’ के ठीक नीचे GPWIS भी लिखा है.

इस क्लू के आधार पर हमने इंटरनेट पर सर्च किया. GPWIS का फ़ुल फ़ॉर्म है, General Purpose Wagon Investment Scheme. बिजनेस स्टैंडर्ड की 18 जून, 2018 की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने GPWIS के तहत प्राइवेट कंपनियों को मालगाड़ी से कोयला, लोहा, खनिज आदि ढोने की इजाज़त दे दी है. उससे पहले तक तक ये रेलवे के नियंत्रण में था.

आठ निजी कंपनियों ने इस योजना में निवेश करने की रुचि दिखाई. ये कंपनियां थीं – JSW सीमेंट, गैलेंट इस्पात, आधुनिक मेटालिक्स, जिंदल स्टील एंड पॉवर, उड़ीसा मेटालिक्स, रश्मि सीमेंट, उड़ीसा मैंगनीज और अडानी लॉजिस्टिक्स. (आर्काइव लिंक)

2 नवंबर, 2018 की बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट है.

जिन आठ कंपनियों ने योजना में निवेश में दिलचस्पी दिखाई थी, उनमें से छह ने ही निवेश किया. आधुनिक मेटालिक्स और उड़ीसा मैंगनीज निवेश करने से पीछे हट गईं. ये सभी कंपनियां इंडियन रेलवे के नियंत्रण में ऑपरेट करेंगी. (आर्काइव लिंक)

बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट

ट्विटर पर कीवर्ड्स की मदद से सर्च करने पर हमें करण अडानी का एक ट्वीट मिला. करण ‘अडानी पोर्ट्स एंड सेज़ लिमिटेड’ के सीईओ हैं. 5 अप्रैल, 2019 को उन्होंने अपने अकाउंट से मालगाड़ी के कुछ डिब्बों की तस्वीरें साझा कीं. इन डिब्बों पर भी adani लिखा है. उनके ट्वीट का हिंदी अनुवाद देखिए,

मुझे ये बताते हुए खुशी हो रही है कि धामरा पोर्ट से पहला GPWIS रैक रवाना होने के लिए तैयार है. ये कदम न सिर्फ भारत के #logistics सेक्टर में एक नए अध्याय की शुरुआत है, बल्कि देश के भीतरी इलाकों को जोड़ने और एंड-टू-एंड लॉजिस्टिक्स सेवा पहुंचाने के हमारे वादे को भी मज़बूती देता है.

(आर्काइव लिंक)

अभी तक सवारी ट्रेनों के परिचालन में प्राइवेट कंपनियां शामिल नहीं हैं. 1 अगस्त, 2020 की इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने 109 व्यस्त रूट्स पर 35 सालों तक 151 प्राइवेट ट्रेनें चलाने फैसला किया है. वित्तीय वर्ष 2020-21 के अंत तक नीलामी की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी. (आर्काइव लिंक)

इससे साफ़ है कि वायरल वीडियो भ्रामक जानकारी के साथ सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है. मालगाड़ियों के परिचालन में निजी कंपनियों की भागीदारी 2007 से ही है. तब देश में कांग्रेस के नेतृत्व में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) की सरकार थी.

नतीजा

हमारी पड़ताल में वायरल वीडियो के साथ किया जा रहा दावा भ्रामक निकला. मालगाड़ियों के परिचालन में प्राइवेट कंपनियां 2007 से ही शामिल हैं. ये योजना यूपीए सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई थी.

2018 में मोदी सरकार एक नई स्कीम लेकर आई. GPWIS. जनरल पर्पज़ वैगन इन्वेस्टमेंट स्कीम. इसके तहत 6 निजी कंपनियों को मालगाड़ियों में कोयला, आयरन, मिनरल्स आदि ढोने की इजाजत दी गई थी. इन छह कंपनियों में से एक अडानी लॉजिस्टिक्स भी थी.

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  • दावा

    मोदी सरकार ने ट्रेनों का निजीकरण करते हुए इसे अडानी ग्रुप के हाथों बेच दिया.

  • नतीजा

    मालगाड़ियों के परिचालन में प्राइवेट निवेश की मंजूरी 2007 में ही दी जा चुकी है. इसमें अडानी लॉजिस्टिक्स सहित 6 कंपनियां शामिल है.

अगर आपको भी किसी जानकारी पर संदेह है तो हमें भेजिए, padtaalmail@gmail.com पर. हम पड़ताल करेंगे और आप तक पहुंचाएंगे सच.

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