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पड़ताल: लॉकडाउन में श्रमिकों के लिए चलाई जा रही ट्रेनों में किराया वसूलने का पूरा सच!

दावा

प्रवासी मज़दूरों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए चलाई जा रही ट्रेनों के भाड़े को लेकर कई दावे सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. इनमें से एक दावा रेलवे द्वारा दी जा रही सब्सिडी से जुड़ा है. एक अन्य वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि सिर्फ़ केरल, महाराष्ट्र और राजस्थान में मज़दूरों से टिकट के पैसे लिए गए हैं. इन तीनों राज्यों में कांग्रेस पार्टी सरकार में शामिल है.

4 मई, 2020 को फ़ेसबुक यूजर अंकित मिश्रा लड्डू पंडित ने पोस्ट (आर्काइव लिंक) किया,

 रेल टिकट के पैसे लेने वाले राज्य 1 महाराष्ट्र 2 केरल 3 राजस्थान Baki Har Jagah ticket free hai मजे की बात तीनों जगह है कांग्रेस की सरकार

रेल टिकट के पैसे लेने वाले राज्य
1 महाराष्ट्र 2 केरल 3 राजस्थान
Baki Har Jagah ticket free hai
मजे की बात तीनों जगह है कांग्रेस की सरकार

Posted by Ankit Mishra Laddu Pandit on Monday, 4 May 2020

4 मई को ही ‘टाइम्स नाउ’ ने सरकार के ‘सूत्रों’ के हवाले से ख़बर (आर्काइव लिंक) चलाई कि सिर्फ़ तीन राज्य (केरल, राजस्थान और महाराष्ट्र) मज़दूरों से टिकट का पैसा ले रहे हैं.

इसके अलावा कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार श्रमिकों से टिकट का पैसा वसूल रही है.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के सवाल के जवाब में बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कई दावों को जोड़कर एक ट्वीट (आर्काइव लिंक) किया,

राहुल गांधी जी, 

मैंने गृह मंत्रालय के निर्देशों की कॉपी लगाई है. इसमें साफ़ लिखा है कि “किसी भी स्टेशन पर टिकट की बिक्री नहीं की जाएगी” रेलवे ने 85 प्रतिशत सब्सिडी दे रखी है और बाकी 15 प्रतिशत का भुगतान राज्यों को करना है. राज्य सरकार टिकट का भुगतान कर सकती हैं (मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार ऐसा कर रही है)

आप कांग्रेस की राज्य सरकारों को इसका पालन करने के लिए कहिए.

ऐसा ही दावा कई और सोशल मीडिया यूजर्स ने भी किया है.

पड़ताल

‘दी लल्लनटॉप’ ने वायरल दावों की विस्तार से पड़ताल की. हमारी पड़ताल में ये दावे भ्रामक निकले.

पहला दावा

किसी भी स्टेशन पर टिकट की बिक्री नहीं की जाएगी.

और, रेलवे ने टिकटों पर 85 प्रतिशत की सब्सिडी दी है, बाकी का 15 पर्सेट राज्य सरकारों को देना है.

तथ्य

बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने ये दावा करते हुए एक प्रेस रिलीज़ की कॉपी लगाई थी.

ये प्रेस रिलीज़ हमें प्रेस इन्फ़ॉर्मेशन ब्यूरो की वेबसाइट पर मिल गई. 2 मई को जारी प्रेस रिलीज़ के पांचवें पॉइंट में ये लिखा है कि ‘किसी भी स्टेशन पर टिकट की बिक्री नहीं की जाएगी’.

इस प्रेस रिलीज़ के कुछ मुख्य बिंदु हैं-

रेलवे सिर्फ़ राज्य सरकारों द्वारा पास किए गए पैसेंजर्स को यात्रा की अनुमति देगी.

विशेष ट्रेनें राज्य सरकारों के आग्रह पर चलाई जा रही हैं.

ये ट्रेनें अन्य राज्यों में फंसे प्रवासी मज़दूरों, तीर्थ यात्रियों, पर्यटकों, छात्रों आदि के लिए है.

हमने इंडियन रेलवे की वेबसाइट को खंगाला, तो हमें 2 मई को जारी हुआ एक और सर्कुलर मिला. इस सर्कुलर का सब्जेक्ट है,

Movement of Stranded Persons by Shramik Special Trains

(श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के जरिए फंसे लोगों का आवागमन)

इस सर्कुलर में श्रमिक स्पेशल ट्रेन के परिवहन से संबंधित गाइडलाइंस थे. जैसे, रेलवे अलग-अलग राज्यों के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करेगी, जो संबंधित राज्य के अधिकारियों के साथ मिलकर फंसे लोगों का रजिस्ट्रेशन करेंगे. इसमें राज्यों के बीच आपसी सहमति, ट्रेनों को पूरी सुरक्षा, स्टेशनों पर पर्याप्त स्क्रीनिंग की सुविधा जैसे ज़रूरी मसलों का भी ज़िक्र है.

इसी सर्कुलर के 11वें पॉइंट में ‘Sales of Tickets (टिकटों की बिक्री)’ के बारे में लिखा है.

पहला पॉइंट,

जिस राज्य से गाड़ी चलेगी, वो राज्य यात्रियों की कुल संख्या की जानकारी देंगे. ये संख्या श्रमिक स्पेशल ट्रेन की क्षमता के मुताबिक़, लगभग 1200 (या कम से कम 90%) तक हो सकती है.

दूसरा पॉइंट,

रेलवे इसी नंबर के आधार पर गंतव्य तक का टिकट प्रिंट करके स्थानीय अधिकारियों को सौंप देगी.

तीसरा पॉइंट सबसे खास है,

राज्य सरकार यात्रा के लिए पास किए गए यात्रियों से टिकट का भाड़ा वसूल कर रेलवे को वापस देगी.

आप पूरा सर्कुलर यहां पढ़ सकते हैं.

इस पूरे सर्कुलर में केंद्र सरकार द्वारा 85 प्रतिशत सब्सिडी का ज़िक्र नहीं है. जैसा कि दावा किया जा रहा है.

जब इस मामले पर पर चर्चा तेज़ हुई, तो सरकार और भारतीय जनता पार्टी की ओर से बयान आया कि केंद्र सरकार (रेलवे) श्रमिक ट्रेनों के संचालन में 85 प्रतिशत अनुदान दे रही है.

स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने 4 मई की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि परिवहन का 85 पर्सेंट खर्च रेलवे उठाएगी, जबकि बाकी के 15 पर्सेंट का खर्च राज्य सरकार उठाएगी. टिकट के किराए और श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाने के मुद्दे पर लव अग्रवाल का जवाब आप 21:58 मिनट के मार्क से सुन सकते हैं.

85-15 प्रतिशत का गणित

ये पड़ताल लिखे जाने तक सरकार की ओर से किसी ने 85 फीसदी सब्सिडी का ब्रेकअप नहीं बताया है. ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि अगर राज्य सरकारों या श्रमिकों की ओर से दिए जा रहे 15 प्रतिशत अगर सामान्य टिकट की कीमत जितने हैं, तो रेलवे का खर्च क़रीब 6 गुना कैसे हो गया?

जब भी रेल मंत्रालय या सरकार की ओर से इस बारे में कोई टिप्पणी आएगी, हम ख़बर अपडेट कर देंगे.

दूसरा दावा

सिर्फ़ कांग्रेस के शासन वाले तीन राज्यों केरल, राजस्थान और महाराष्ट्र ने मज़दूरों से टिकट के पैसे लिए.

केरल

3 मई की एनडीटीवी की रिपोर्ट (आर्काइव लिंक) के अनुसार, केरल से झारखंड जाने वाले यात्रियों ने 875 रुपये का किराया देकर टिकट खरीदा. हालांकि, केरल में कांग्रेस की सरकार नहीं है, वामपंथी पार्टियों की सरकार है.

राजस्थान

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 4 मई को ट्वीट (आर्काइव लिंक) कर जानकारी दी कि फंसे हुए श्रमिकों के रेल या बस के किराए का खर्च राजस्थान सरकार उठाएगी. NBT की ख़बर के मुताबिक, जयपुर स्टेशन से बिहार लौटे श्रमिकों ने बताया कि उनसे ट्रेन टिकट का किराया नहीं लिया गया है. इंडिया टुडे के रिपोर्टर शरत कुमार ने भी यही बात कंफर्म की है. राजस्थान से शुरू होने वाली श्रमिक ट्रेनों में श्रमिकों से किराया नहीं लिया जा रहा है.

महाराष्ट्र

इंडिया टुडे की एक और रिपोर्ट बताती है कि महाराष्ट्र से सफ़र करने वाले प्रवासी मज़दूरों को टिकट का पैसा देना पड़ा. रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नितिन राउत ने सीएम उद्धव ठाकरे से मज़दूरों के किराए का खर्च वहन करने की अपील की.

कर्नाटक

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट (आर्काइव लिंक) के मुताबिक़, कर्नाटक में प्रवासी मज़दूरों से ट्रेन और बस का दोनों तरफ़ का भाड़ा लिया गया. कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट.

गुजरात

कीवर्ड्स की मदद से सर्च करने पर हमें 4 मई की इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट (आर्काइव लिंक) मिली. रिपोर्ट के मुताबिक़, अहमदाबाद से उत्तर प्रदेश जाने वाले यात्रियों से लगभग सात सौ रुपये लिए गए. यात्रियों ने इंडिया टुडे टीवी के कैमरे पर कबूल किया कि उनसे टिकट के पैसे लिए गए. इसके अलावा अहमदाबाद मिरर की रिपोर्ट में भी पुष्टि हुई है कि गुजरात से अपने प्रदेशों में जा रहे श्रमिकों से किराया लिया गया है.  गुजरात में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है.

मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट (आर्काइव लिंक) कर कहा कि प्रदेश सरकार फंसे लोगों के रेल टिकट का खर्च उठाएगी.

इससे स्पष्ट है कि प्रवासी मज़दूरों से कुछ कांग्रेस की सरकारों के अलावा कुछ भाजपा-शासित राज्य भी किराया वसूल रहे हैं. इनमें गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्य शामिल हैं.

नतीजा

2 मई को जारी नोटिफिकेशन में केंद्र सरकार ने यात्रियों से किराया वसूलने की बात लिखी हुई है. लेकिन 4 मई को केंद्र सरकार ने कहा कि वो श्रमिकों से किराया नहीं ले रही. 85% सब्सिडी पर ट्रेन चला रही है. हालांकि, आधिकारिक तौर पर 85% का ब्रेकअप नहीं बताया गया है.

केवल कांग्रेस-शासित राज्यों राजस्थान, महाराष्ट्र या गैर-भाजपा- गैर कांग्रेस शासित राज्य केरल में मज़दूरों से रेल का किराया वसूले जाने का दावा भ्रामक है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गुजरात और कर्नाटक जैसे भाजपा-शासित राज्यों में भी प्रवासी कामगारों से ट्रेन का किराया वसूला गया.

अगर आपको भी किसी ख़बर पर शक है
तो हमें मेल करें- padtaalmail@gmail.com पर.
हम दावे की पड़ताल करेंगे और आप तक सच पहुंचाएंगे.

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पड़ताल: लॉकडाउन में श्रमिकों के लिए चलाई जा रही ट्रेनों में किराया वसूलने का पूरा सच!
  • दावा

    प्रवासी मज़दूरों से स्पेशल ट्रेन का किराया सिर्फ़ कांग्रेस-शासित राज्यों में लिया गया.

  • नतीजा

    ये दावा भ्रामक है. गुजरात और कर्नाटक जैसे भाजपा के शासन वाले राज्यों में भी प्रवासी मज़दूरों से स्पेशल ट्रेन के टिकट का पैसा लिया गया.

अगर आपको भी किसी जानकारी पर संदेह है तो हमें भेजिए, padtaalmail@gmail.com पर. हम पड़ताल करेंगे और आप तक पहुंचाएंगे सच.

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