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पड़ताल: क्या इस हैकर ने इज़राइल के बैंक से 302 करोड़ रुपये चुराकर फिलिस्तीनियों में बांट दिए?

दावा

सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरों के कोलाज के साथ एक दावा वायरल हो रहा है. दावे में लिखा है कि इस लड़के ने इजरायल के बैंक अकाउंट हैक कर फ़िलिस्तीन के मुसलमानों को 40 मिलियन डॉलर (लगभग 302.78 करोड़ रुपये) की रकम बांट दी.

फ़ेसबुक यूजर MD Ali ने तीन साल पहले ये कोलाज पोस्ट (आर्काइव लिंक) करते हुए लिखा था,

ये है वो बहादुर लडका जिसने इज़राईल के बैंक account हैक कर के फिलिस्तीन के मुसलमानो तक 40 मिलियन डोलर पहुचाकर उनकी मदद की,, फिर अपनी कौम के लिए फांसी पर चढ कर हँसते – हँसते अपनी जान दे दी

अल्लाह इस को जन्नत नसीब फारमाए

फ़ेसबुक पर शेयर की जाने वाली पोस्ट.
फ़ेसबुक पर शेयर की जाने वाली पोस्ट.

ये दावा अब वॉट्सऐप पर वायरल होने लगा है. ‘दी लल्लनटॉप’ के कई दोस्तों ने इन तस्वीरों के साथ हो रहे दावे की पड़ताल के लिए हमें मेल भी किया था.

पड़ताल

‘दी लल्लनटॉप’ ने तस्वीर और साथ में किए जा रहे दावे की विस्तार से पड़ताल की. हमारी पड़ताल में ये दावे ग़लत और भ्रामक निकले.

हमने कोलाज को अलग-अलग हिस्से में क्रॉप किया.

पहला हिस्सा

कोलाज का पहला हिस्सा.
कोलाज का पहला हिस्सा.

पहले हिस्से को रिवर्स इमेज में सर्च करने पर हमें Bangkok Post वेबसाइट की 07 जनवरी, 2013 की एक रिपोर्ट (आर्काइव लिंक) मिली. रिपोर्ट का टाइटल है,

Thai Police arrest Algerian hacker on FBI list

(थाइलैंड पुलिस ने FBI की वांटेड लिस्ट में शामिल अल्जीरियाई हैकर को गिरफ़्तार किया)

बैंकॉक में हमज़ा की गिरफ़्तारी की रिपोर्ट.
बैंकॉक में हमज़ा की गिरफ़्तारी की रिपोर्ट.

रिपोर्ट के मुताबिक़, साल 2013 में उस वक्त 24 साल के रहे हमज़ा बेंदेलाज़ को उस वक़्त गिरफ़्तार किया गया, जब वो बैंकॉक के सुवर्णभूमि एयरपोर्ट से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था. बैंकॉक पुलिस ने हमज़ा को गिरफ़्तार करने के बाद प्रेस कॉन्फ़्रेंस की. पुलिस ने बताया कि हमज़ा ने 2008 में कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएशन किया है.

उस पर कथित तौर पर दुनिया के 217 बैंकों में मौज़ूद बैंक अकाउंट को हैक कर पैसे लेने का आरोप है. थाइलैंड हमज़ा को अमेरिका में प्रत्यर्पित करने की तैयारी कर रहा था, जहां जॉर्जिया की एक अदालत ने उसका अरेस्ट वॉरंट निकाला हुआ था.

हमने Federal Bureau of Investigation (FBI) की वेबसाइट पर चेक किया. वहां हमें 3 मई, 2013 की एक प्रेस रिलीज़ मिली. इसमें हमज़ा बेंदेलाज़ के प्रत्यर्पण की जानकारी दी गई थी. 

इस प्रेस रिलीज़ में दर्ज है,

दोषी पाए जाने की स्थिति में, हमज़ा बेंदेलाज़ को वायर और बैंक फ़्रॉड की साज़िश के लिए अधिकतम 30 वर्षों की जेल; हरेक ऑनलाइन फ़्रॉड के लिए अधिकतम 20 साल; कंप्यूटर फ़्रॉड की साज़िश रचने के लिए अधिकतम पांच साल; हरेक कंप्यूटर फ़्रॉड के लिए 5-10 साल की कैद और 14 मिलियन डॉलर (लगभग 98 करोड़ रुपये) का ज़ुर्माने की सजा हो सकती है.

इसमें कहीं भी मौत की सजा के प्रावधान का ज़िक्र नहीं है. आप पूरी प्रेस रिलीज़ नीचे देख सकते हैं,

21 अप्रैल, 2016 की बीबीसी की रिपोर्ट (आर्काइव लिंक) में हमज़ा बेंदेलाज़ और उसके दूसरे साथी अलेक्जेंडर एंद्रिविच पेनिन को सजा सुनाए जाने का ज़िक्र है. हमज़ा को 15 साल, जबकि अलेक्जेंडर को साढ़े नौ साल जेल में गुजारने की सजा सुनाई गई. बीबीसी के मुताबिक़, ये लोग Spyeye नामक वायरस का इस्तेमाल करते थे. हमज़ा इंटरनेट पर BX1 के नाम से जाना जाता था. जब भी उसे मीडिया के सामने लाया जाता था, वो मुस्कुराता रहता था. इस वजह से उसका नाम ‘स्माइलिंग हैकर’ रख दिया गया.

बीबीसी की रिपोर्ट में हमज़ा और उसके साथी को मिली जेल की सजा का ज़िक्र है.
बीबीसी की रिपोर्ट में हमज़ा और उसके साथी को मिली जेल की सजा का ज़िक्र है.

हमज़ा बेंदेलाज़ अभी भी जेल में अपने गुनाहों की सजा काट रहा है. किसी भी प्रामाणिक मीडिया रिपोर्ट में उसकी मौत की पुष्टि नहीं हुई है. और न ही किसी रिपोर्ट में उसके द्वारा पैसे दान करने की पुष्टि हुई है. बैंक हैक कर और वायरस बेचकर वो लग्ज़री लाइफ़ जीता था.

दूसरा हिस्सा

कोलाज का दूसरा हिस्सा.
कोलाज का दूसरा हिस्सा.

रिवर्स इमेज में सर्च करने पर पता चला कि दूसरे हिस्से की सभी तस्वीरें एक ही शख़्स की हैं. हमें फ़ोटो स्टॉक एजेंसी गेट्टी इमेजिस का एक लिंक मिला. इसमें हमें इस शख़्स को फांसी पर चढ़ाने के लिए ले जाने की एक तस्वीर मिली.

गेट्टी इमेजेज पर अपलोड की गई फ़ोटो.
गेट्टी इमेजेज पर अपलोड की गई फ़ोटो.

तस्वीर के डिस्क्रिप्शन में लिखा है,

तारीख, 02 अगस्त, 2007. जगह, मध्य तेहरान. ईरान पुलिस के नकाबपोश लोग माजिद कावोसिफ़ार को खुले में फांसी पर लटकाने के लिए लेकर जा रहे हैं. 2005 में ईरान में एक जज की हत्या कर दी गई थी. दो लोगों को इस हत्या का दोषी पाया गया. उनको मध्य तेहरान में भीड़ के सामने फांसी दे दी गई. मध्य तेहरान में भीड़ के सामने फांसी दिए जाने का ऐसा मामला पिछले पांच साल में पहली बार सामने आया. इन दोनों को अगस्त, 2005 में हुई हसन मोघद्दस की हत्या के लिए सजा दी गई. हसन डिप्टी प्रोजिक्यूटर और तेहरान में ‘गाइडेंस’ कोर्ट का मुखिया था.

हमने कीवर्ड्स की मदद से माजिद कावोसिफ़ार के बारे में सर्च किया. हमें न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स की 02 अगस्त, 2007 की एक रिपोर्ट (आर्काइव लिंक) मिली. रिपोर्ट के अनुसार, माज़िद कावोसिफ़ार और हुसैन कावोसिफ़ार को तेहरान के इरशाद ज्यूडिशियरी कॉम्पलेक्स में फांसी दी गई. माजिद और हुसैन ने जिस जज को मारा था, वो सोशल एक्टिविस्ट्स को जेल भेजने के लिए कुख्यात था.

रॉयटर्स की 2 अगस्त, 2007 की रिपोर्ट.
रॉयटर्स की 2 अगस्त, 2007 की रिपोर्ट.

02 अगस्त, 2007 की ही बीबीसी न्यूज़ की रिपोर्ट (आर्काइव लिंक) में भी इस घटना की पुष्टि की गई है.

नतीजा

हमारी पड़ताल में कई चीजें स्पष्ट हुईं-

कोलाज के पहले हिस्से में दिख रहे शख़्स का नाम हमज़ा बेंदेलाज़ है. वो अल्ज़ीरिया का है. उसने दुनिया के कई बैंकों के अकाउंट से पैसे चुराए हैं. 

2013 में हमज़ा को थाईलैंड में अरेस्ट किया गया था. 2016 में उसको अमेरिका की अदालत में 15 साल की कैद की सजा सुनाई गई थी.

हमज़ा की मौत की कोई पुख़्ता जानकारी नहीं है. आखिरी जानकारी जेल जाने की है. दान करने जैसी बात का कोई पुख़्ता सबूत नहीं है.

जिस शख़्स की गर्दन में रस्सी लटकी दिख रही है, उसका नाम माजिद कावोसिफ़ार था. ईरान में एक जज की हत्या के लिए उसको फांसी दी गई थी. 02 अगस्त, 2007 को माजिद और हुसैन कावोसिफ़ार को सेंट्रल तेहरान में भीड़ के सामने क्रेन में लगी रस्सी से लटका दिया गया था.

इन दोनों तस्वीरों का एक-दूसरे से कोई संबंध नहीं है. वायरल दावे में कही गई अधिकतर बातें झूठी हैं.

अगर आपको भी किसी ख़बर पर शक है
तो हमें मेल करें- padtaalmail@gmail.com पर.
हम दावे की पड़ताल करेंगे और आप तक सच पहुंचाएंगे.

कोरोना वायरस से जुड़ी हर बड़ी वायरल जानकारी की पड़ताल हम कर रहे हैं.
इस लिंक पर क्लिक करके जानिए वायरल दावों की सच्चाई.

पड़ताल: क्या इस हैकर ने इज़राइल के बैंक से 302 करोड़ रुपये चुराकर फिलिस्तीनियों में बांट दिए?
  • दावा

    हमज़ा बेंदेलाज़ ने इजरायल के बैंकों से पैसे चुराकर फिलीस्तीन के लोगों को दान किए और हंसते-हंसते फांसी पर झूल गया.

  • नतीजा

    ये दावा पूरी तरह से ग़लत है. दोनों तस्वीरें अलग-अलग इंसानों की हैं और उनका आपस में कोई संबंध नहीं है. वायरल दावे में कई भ्रामक बातें भी कही गई हैं.

अगर आपको भी किसी जानकारी पर संदेह है तो हमें भेजिए, padtaalmail@gmail.com पर. हम पड़ताल करेंगे और आप तक पहुंचाएंगे सच.

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