Submit your post

Follow Us

पड़ताल: कोरोना फैलने के पीछे 5G रेडिएशन को कारण बताता दावा सिर्फ और सिर्फ गप्प है

दावा

नोवेल कोरोना वायरस को लेकर कुछ नई मिथ्या कहानियां फिर से सोशल मीडिया पर शेयर हो रही हैं. वायरल मेसेज में दावा किया जा रहा है कि इटली में पहली बार कोरोना से मरे व्यक्ति का पोस्टमार्टम किया गया. दावा ये भी है कि लोग संक्रमण के कारण नहीं, बल्कि 5G रेडिएशन से फ़ैले ज़हर की वजह से मर रहे हैं.

साथ ही, इस बात का प्रचार करने के लिए कहा जा रहा है कि ये वायरस नहीं बल्कि बैक्टीरिया मात्र है. कहा जा रहा है कि इटली में एस्पिरिन 100mg और एंप्रौमैक्स देकर मरीजों को ठीक कर दिया गया.

वायरल मेसेज का स्रोत इटली के स्वास्थ्य मंत्रालय को बताया गया है.

हम आपको वायरल मेसेज जस-का-तस पढ़ा रहे हैं,

वायरल दावे में अतिरिक्त सावधानी के तौर पर हमने ग़लत और पड़ताल का लोगो जोड़ दिया है ताकि इसका ग़लत इस्तेमाल ना हो.
वायरल दावे में अतिरिक्त सावधानी के तौर पर हमने ग़लत और पड़ताल का लोगो जोड़ दिया है ताकि इसका ग़लत इस्तेमाल ना हो.

*इटली विश्व का पहला देश बन गया है जिसनें एक कोविड-19 से मृत शरीर पर अटोप्सी (पोस्टमार्टम) किया और एक व्यापक जाँच करने…

Posted by Tajendra Rajora Congress Leader on Sunday, 13 September 2020

(आर्काइव लिंक)

ऐसा ही दावा कई और फ़ेसबुक यूजर्स ने भी किया है. ये मेसेज वॉट्सऐप पर भी खूब घूम रहा है. (आर्काइव लिंक)

पड़ताल

‘दी लल्लनटॉप’ ने वायरल मेसेज में किए जा रहे दावों की विस्तार से पड़ताल की. हमारी पड़ताल में ये दावे ग़लत और भ्रामक निकले. इस मेसेज में कई दावे एक साथ किए जा रहे हैं. हम एक-एक कर इन दावों की पड़ताल करेंगे.

पहला दावा:

इटली कोरोना वायरस से मृत शरीर का पोस्टमार्टम करने वाला पहला देश बना.

कीवर्ड्स की मदद से सर्च करने पर हमें ‘चाइना डेली’ की एक रिपोर्ट मिली. 26 मार्च, 2020 की इस रिपोर्ट में फ़ॉरेंसिक एक्सपर्ट लिउ लियांग के उन अनुभवों की बात की गई है, जो उन्होंने कोरोना मरीजों के पोस्टमार्टम के दौरान देखे. रिपोर्ट में दर्ज है कि किसी कोरोना मरीज का पोस्टमार्टम पहली बार 16 फ़रवरी, 2020 को किया गया था. वुहान के जिनयितान हॉस्पिटल में किए गए इस पोस्टमार्टम में तकरीबन तीन घंटे का समय लगा. इसमें सामान्य से तीन गुणा ज्यादा वक़्त लगा. (आर्काइव लिंक)

इटली में कोविड-19 का पहला मामला 21 फ़रवरी को सामने आया था. वुहान में हुए पहले पोस्टमार्टम के पांच दिनों के बाद. 21 फ़रवरी की टाइम की रिपोर्ट के अनुसार, इटली में एक दिन में कोरोना वायरस संक्रमण के 17 मामले दर्ज किए गए. (आर्काइव लिंक)

दूसरा दावा-

पोस्टमार्टम में पता चला है कि कोरोना के मरीज़ों के शरीर में वायरस मौजूद नहीं है, बल्कि वो 5G रेडिएशन की वजह से मर रहे हैं.

WHO की वेबसाइट पर साफ़-साफ़ लिखा है कि 5G नेटवर्क से वायरस का संक्रमण नहीं फैलता. वायरस रेडियो वेव या मोबाइल नेटवर्क के जरिए नहीं फैल सकते हैं. जिन देशों में 5G नेटवर्क नहीं पहुंचा है, वहां भी कोरोना संक्रमण ने लोगों की जानें ली हैं.

नोवेल कोरोना वायरस संक्रमण मनुष्य या फिर संक्रमित सतह के संपर्क में आने से फैलता है. रेडिएशन से इसका कोई वास्ता नहीं है.

कोरोना वायरस संक्रमित इंसान या संक्रमित सतह के संपर्क में आने से फैलता है.
कोरोना वायरस संक्रमित इंसान या संक्रमित सतह के संपर्क में आने से फैलता है.

तीसरा दावा-

WHO कोरोना वायरस से मरने वाले लोगों के पोस्टमार्टम की अनुमति नहीं देता.

हमने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की वेबसाइट पर चेक किया. WHO ने 24 मार्च को कोरोना मरीजों के पोस्टमार्टम से संबंधित गाइडलाइंस जारी किए थे. इसमें मृत शरीर को पोस्टमार्टम हाउस तक ले जाने और प्रोसेस के दौरान अपनाई जाने वाली सावधानियों का ज़िक्र किया गया था. इसलिए ये दावा ग़लत है कि WHO ने कोरोना मरीजों के पोस्टमार्टम पर रोक लगाई थी.

आप पूरा डॉक्यूमेंट यहां पढ़ सकते हैं-

चौथा दावा-

कोरोना वायरस कोई वायरस नहीं बैक्टीरिया है. इससे नसों में ख़ून की गांठें बन जाती हैं और मरीज मर जाता है.

कोविड-19 संक्रमण की शुरुआत दिसंबर, 2019 में हुई थी. चीन के वुहान शहर में. रिसर्च जर्नल लैंसेट में 24 जनवरी, 2020 को पब्लिश हुई रिपोर्ट में इस संक्रमण के बारे में उपलब्ध शुरुआती जानकारियां दर्ज हैं. रिपोर्ट के मुताबिक,

चीनी वैज्ञानिकों ने 07 जनवरी तक वुहान में मरीजों में नोवेल कोरोना वायरस की पहचान कर ली थी. ये उसी कोरोना वायरस फैमिली का हिस्सा है, जिसकी वजह से 2003 में SARS हुआ था.

11 फरवरी को, इस नए वायरस का नामकरण किया गया था. नाम रखा गया,

Severe Acute Respiratory Syndrome Coronavirus 2 या SARS-CoV-2

वैज्ञानिक शोधों से स्पष्ट हुआ है कि ये संक्रमण वायरस के जरिए फैलता है. इसलिए, इसे बैक्टीरिया जनित रोग बताना ग़लत है. (आर्काइव लिंक)

कोरोना संक्रमण के कुछ मामलों में ख़ून का थक्का जमने की बात सामने आई है. हालांकि, ऐसा सभी मरीज़ों के साथ नहीं हुआ है.

पांचवा दावा-

इस संक्रमण को एस्पिरिन 100mg या पैरासिटामोल 650mg से ठीक किया जा सकता है.

इटली के स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट पर कोरोना संक्रमण से जुड़ी इन अफवाहों की सच्चाई बताई गई है. यहां बताया गया है कि कोरोना पर एंटी-बायोटिक्स का असर नहीं होता. हालांकि, एस्परिन और पैरासिटामोल एंटी-बायोटिक्स नहीं हैं, लेकिन इनसे कोरोना ठीक हो जाए, इसके कोई सबूत नहीं मिले हैं. इनका इस्तेमाल कोरोना मरीज़ का बुखार कम करने के लिए किया जाता है.

कोरोना वायरस संक्रमण का कोई इलाज अभी तक नहीं मिला है. वैक्सीन और दवा का रिसर्च और ट्रायल जारी है. फिलहाल, डॉक्टर्स मरीज के शरीर में दिख रहे लक्षणों के आधार पर इलाज करते हैं. पहले से उपलब्ध संसाधनों के जरिए. इसे कोरोना वायरस का सटीक इलाज मान लेना ग़लत है. ऐसे इलाज के नुकसान काफ़ी ज्यादा हैं. संक्रमण होने पर तुरंत अस्पताल में संपर्क करें और स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशा-निर्देशों का पालन करें.

नतीजा

हमने वायरल मेसेज में किए गए सभी बड़े दावों की विस्तार से पड़ताल की. हमारी पड़ताल में ये दावे ग़लत और भ्रामक निकले. ये एक वायरस ही है, कोई बैक्टीरिया नहीं. 5G रेडिएशन से मौत होने का दावा भी सरासर ग़लत है. नोवेल कोरोना वायरस का अभी तक कोई इलाज नहीं निकला है. दुनिया भर के रिसर्चर इस नए वायरस की काट तलाशने में लगे हैं.

डॉक्टर मरीज के लक्षणों के आधार पर पहले से उपलब्ध संसाधनों के जरिए इलाज कर रहे हैं. फ़ेक न्यूज़ के प्रभाव में न आएं. संक्रमण होने पर डॉक्टर को दिखाएं और स्वास्थ्य मंत्रालय के बताए निर्देशों का पालन करें.

पड़ताल अब वॉट्सऐप पर. वॉट्सऐप हेल्पलाइन से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें.
ट्विटर और फेसबुक पर फॉलो करने के लिए ट्विटर लिंक और फेसबुक लिंक पर क्लिक करें.


वीडियो: कोरोना वायरस के मुर्गी तक पहुंचने के दावे का सच क्या है?

पड़ताल: कोरोना फैलने के पीछे 5G रेडिएशन को कारण बताता दावा सिर्फ और सिर्फ गप्प है
  • दावा

    वायरस संक्रमण नहीं बल्कि 5G रेडिएशन की वजह से मर रहे हैं कोरोना पेशेंट.

  • नतीजा

    ये दावा ग़लत है. 5G रेडिएशन से कोरोना मरीजों के मरने की बात किसी भी वैज्ञानिक रिसर्च में सामने नहीं आई है.

अगर आपको भी किसी जानकारी पर संदेह है तो हमें भेजिए, padtaalmail@gmail.com पर. हम पड़ताल करेंगे और आप तक पहुंचाएंगे सच.

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

पड़ताल

पड़ताल: क्या राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने इस

पड़ताल: क्या राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने इस "मंदिर को दरगाह बनाने की कोशिश की?"

सोशल मीडिया पर वायरल हनुमानगढ़ के 'शिला पीर' की सच्चाई क्या है?

पड़ताल: हिंदू ने तोड़ी मंदिर की मूर्तियां, सुदर्शन टीवी और सुरेश चव्हाणके ने मुस्लिमों को निशाना बनाया

पड़ताल: हिंदू ने तोड़ी मंदिर की मूर्तियां, सुदर्शन टीवी और सुरेश चव्हाणके ने मुस्लिमों को निशाना बनाया

नवरात्रे शुरू होने से पहले द्वारका, दिल्ली के ककरौला में मूर्तियां खंडित मिली थीं.

पड़ताल: पुलिसवाले ने गुस्से में दो लोगों को सरेराह गोली मार दी? जानिए इस वीडियो का सच

पड़ताल: पुलिसवाले ने गुस्से में दो लोगों को सरेराह गोली मार दी? जानिए इस वीडियो का सच

वीडियो में गोली चालते शख़्स ने हमें खुद बताई सच्चाई.

पड़ताल: क्या किसी चीज़ को छूने पर करंट 5G रेडिएशन की वजह से लग रहा है?

पड़ताल: क्या किसी चीज़ को छूने पर करंट 5G रेडिएशन की वजह से लग रहा है?

किसी चीज़ या शख़्स को छूने पर करंट लगने के मामलों में बढ़ोतरी की बातें सोशल मीडिया यूज़र्स लिख रहे हैं.

पड़ताल: उत्तराखंड के जंगलों में भीषण आग लगी है, पर ये दर्दनाक तस्वीर वहां की नहीं

पड़ताल: उत्तराखंड के जंगलों में भीषण आग लगी है, पर ये दर्दनाक तस्वीर वहां की नहीं

ये तस्वीर पहले तुर्की और ब्राज़ील के नाम पर वायरल हो चुकी है.

पड़ताल: गुजरात में 'आतंकी पकड़ने' का वीडियो लाखों बार देखा गया, पर सच्चाई कुछ और है

पड़ताल: गुजरात में 'आतंकी पकड़ने' का वीडियो लाखों बार देखा गया, पर सच्चाई कुछ और है

गुजरात के दाहोद स्टेशन में आतंकी पकड़ने का दावा करता वीडियो भ्रामक है.

पड़ताल: क्या नक्सली हमले के बाद कांग्रेस के राज बब्बर ने कहा - 'क्रांति कर रहे हैं नक्सली'?

पड़ताल: क्या नक्सली हमले के बाद कांग्रेस के राज बब्बर ने कहा - 'क्रांति कर रहे हैं नक्सली'?

सोशल मीडिया पर अख़बार की कटिंग शेयर कर ये दावा किया जा रहा है.

पड़ताल: कोरोना से बचाव के लिए मास्क लगाने की अपील करते केजरीवाल ने खुद मास्क नहीं लगाया?

पड़ताल: कोरोना से बचाव के लिए मास्क लगाने की अपील करते केजरीवाल ने खुद मास्क नहीं लगाया?

सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर में स्कूली छात्र को फेस मास्क लगाते केजरीवाल ने खुद मास्क नहीं लगाया है.

पड़ताल: क्या उत्तराखंड की एक दरगाह में चादर चढ़ाने आए हिंदुओं को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया?

पड़ताल: क्या उत्तराखंड की एक दरगाह में चादर चढ़ाने आए हिंदुओं को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया?

सुरेश चव्हाणके समेत कई दक्षिणपंथियों ने मुस्लिम समुदाय को इसके लिए शुक्रिया कहा है!

पड़ताल: तिरुपति बालाजी मंदिर के चेयरमैन ईसाई और सिद्धि विनायक मंदिर के ट्रस्टी मुस्लिम हैं?

पड़ताल: तिरुपति बालाजी मंदिर के चेयरमैन ईसाई और सिद्धि विनायक मंदिर के ट्रस्टी मुस्लिम हैं?

सोशल मीडिया पर ये दावा करते लोग इसी आधार पर दरगाहों में हिंदुओं को ट्रस्टी बनाने की मांग कर रहे हैं.