Submit your post

Follow Us

क्या कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने वाकई मंदिरों से सोना छीनने की बात की?

दावा

सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने हिंदू मंदिरों से सोना ज़ब्त करने की बात कही है. (आर्काइव लिंक)


कई और दावे किए जा रहे हैं जिसमें कहा जा रहा है कि पृथ्वीराज चव्हाण ने गैर-बीजेपी शासित राज्यों से मंदिरों से सारा पैसा निकालकर सरकारी घाटा पूरा करने की बात कही है.(आर्काइव लिंक)

इसके अलावा ऐसा ही दावा भाजपा की प्रवक्ता शाइना एनसी ने अपने ट्वीट में किया है. (आर्काइव लिंक) #CongressEyesTemplesGold हैशटैग यूज़ करते हुए उन्होंने पृथ्वीराज चव्हाण को लिखा,

मंदिरों से सोना उधार लेने की आपकी सलाह यूनीक है, आप इसमें मस्जिद और चर्च को भी शामिल कर सकते थे? आपको नहीं लगता?

हिंदी चैनल न्यूज़ 18 पर हुई बहस में बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने दावा किया कि सिर्फ हिंदू मंदिरों में ही सोने का दान होता है. मस्जिदों या चर्च में ऐसा नहीं होता. (आर्काइव लिंक)

न्यूज़ एंकर ने भी लाइव डिबेट में पृथ्वीराज चव्हाण सवाल पूछा,

सब जानते हैं कि सोने का दान मंदिरों में ही होता है, मस्जिदों में तो नहीं होता, चर्चों में तो नहीं होता.

इसके अलावा इसी घटना से मिलते-जुलते कई दावे वायरल हो रहे हैं.

पड़ताल

“दी लल्लनटॉप” ने दावे की पड़ताल की. दावे में कही जा रही बातें भ्रामक हैं. पृथ्वीराज चव्हाण ने सिर्फ मंदिरों से सोना लेने की बात नहीं कही है, उन्होंने सभी धार्मिक ट्रस्टों की बात की है.

दावे की पड़ताल के लिए हमने पृथ्वीराज चव्हाण का टि्वटर हैंडल चेक किया. चव्हाण ने 13 मई, 2020 को एक ट्वीट किया था जिसमें उन्होंने कहा था कि

देश के सभी धार्मिक ट्रस्टों के पास पड़े सोने का यथोचित इस्तेमाल सरकार को जरूर करना चाहिए. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, इस सोने की कीमत कम से कम एक ट्रिलियन डॉलर है. सोना गोल्ड बॉन्ड के जरिए कम ब्याज दरों पर उधार लिया जा सकता है. यह एक आपातकाल है.

पृथ्वीराज चव्हाण के इसी ट्वीट पर हंगामा हुआ. उन्होंने अपने ट्वीट में सभी धार्मिक ट्रस्ट कहा है. मंदिर, मस्जिद या चर्च का ज़िक्र अलग से नहीं किया है.

14 मई को पृथ्वीराज चव्हाण ने दो और ट्वीट किए. लिखा कि उनके बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश किया जा रहा है. लिखा कि गोल्ड डिपॉज़िट स्कीम 1999 में वाजपेयी सरकार लेकर आई थी. इसके साथ ही 6 मई, 2016 के एक डॉक्यूमेंट की फोटो भी पोस्ट की. लोकसभा में मोदी सरकार से पूछा गया था कि गोल्ड मोनेटाइज़ेशन स्कीम में शामिल मंदिरों की संख्या बताएं. राज्यवार. जयंत सिन्हा ने जवाब दिया था कि आठ मंदिर शामिल हैं.

जब इस मामले पर विवाद और बढ़ा तो 15 मई को पृथ्वीराज चव्हाण ने एक वीडियो बाइट के जरिए स्पष्ट किया कि

उन्होंने कहीं भी सिर्फ मंदिरों से सोना लेने की बात नहीं कही है. अपने ट्वीट में स्पष्ट तौर पर उन्होंने सभी धार्मिक ट्रस्टों के पास जमा सोने को लेने की बात कही थी.

चव्हाण ने कहा है कि उनके बयान को सांप्रदायिक रंग देने वालों के खिलाफ वो कार्रवाई करेंगे. .

In 2015 Modi Govt renamed it to Gold Monetization Scheme. Many temples have pledged their gold according to answer given in Lok Sabha by Fin Min. I shall initiate appropriate action for intentional attempt to communalize my statement. (2/2)

— Prithviraj Chavan (@prithvrj) May 14, 2020

अब दावे के दूसरे हिस्से पर चलते हैं.

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने दावा किया कि सोने का चढ़ावा सिर्फ मंदिरों में ही चढ़ता है, मस्जिद और चर्च में नहीं. इस तर्क में रंगकर पृथ्वीराज चव्हाण के बयान को पेश किया गया. और दावा किया गया कि वो हिंदू मंदिरों से सोना लेने की बात कर रहे हैं. शाइना एनसी ने भी इसी के आधार पर चव्हाण पर सलेक्टिव होने का आरोप लगाया.

क्या सिर्फ हिंदू मंदिरों में ही सोने का चढ़ावा आता है या किसी और धर्म के पूजा स्थल में भी? ये जानने के लिए हमने अजमेर शरीफ दरगाह और सायरो-मालाबार चर्च, कोच्चि से संपर्क किया.

अजमेर शरीफ दरगाह की दरगाह कमेटी के चेयरमैन अमीन पठान ने बताया,

दरगाह शरीफ में सोना चढ़ाने की पुरानी रिवायत है. ख्वाजा साहब के गुम्बद का सुनहरी ताज नवाब रामपुर ने पेश किया था. आज भी अकीदतमंद अपनी श्रद्धा के अनुसार सोना और कीमती नग चढ़ाते हैं. हालांकि, ये इतना ज्यादा नहीं होता कि सोने को बिस्किट में ढालने की जरूरत पड़े.

अजमेर शरीफ दरगाह वक्फ़ बोर्ड के तहत काम नहीं करती. दरगाह की अपनी कमेटी है जो सारा प्रबंधन देखती है. संसद से 1955 में दरगाह ख़्वाजा साहब एक्ट, 1955 पास हुआ था, उसी के तहत अजमेर शरीफ दरगाह का संचालन होता है.

सायरो मालाबार चर्च, कोच्चि के प्रवक्ता फादर एंथनी ने हमें बताया,

चर्च में ज्यादातर डोनेशन पैसे या किसी सर्विस के लिए दान के रूप में होता है. हालांकि, किसी की मांगी हुई मन्नत पूरी होने पर लोग इच्छानुसार सोना भी चढ़ा देते हैं. इसके अलावा इस इलाके में जब भी किसी ईसाई महिला की मृत्यु होती है, तो उसका सोने का छोटा सा लॉकेट चर्च में डोनेट कर दिया जाता है.

इसके अलावा सिख धर्म और बौद्ध धर्म में सोने के दान से अधिकतर लोग परिचित हैं.

नतीजा

कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने सिर्फ मंदिरों से सोना लेने की बात नहीं की थी, बल्कि सुझाव दिया था कि केंद्र सरकार को सभी धार्मिक ट्रस्टों से कम ब्याज पर सोना उधार लेना चाहिए.आम जनमानस में व्याप्त कुछ तर्कों को सामने रखकर, ऐसा भ्रामक दावा किया गया कि सिर्फ हिंदू मंदिरों में ही सोने का चढ़ावा आता है और पृथ्वीराज चव्हाण उस सोने को छीनने की बात कह रहे हैं. जो कि गलत है.

(अपडेट: दरगाह कमेटी के चेयरमैन अमीन पठान का बयान स्टोरी पब्लिश होने के बाद जोड़ा गया है.)

अगर आपको भी किसी ख़बर पर शक है
तो हमें मेल करें- padtaalmail@gmail.com पर.
हम दावे की पड़ताल करेंगे और आप तक सच पहुंचाएंगे.

कोरोना वायरस से जुड़ी हर बड़ी वायरल जानकारी की पड़ताल हम कर रहे हैं.
इस लिंक पर क्लिक करके जानिए वायरल दावों की सच्चाई.

क्या कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने वाकई मंदिरों से सोना छीनने की बात की?
  • दावा

    कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने हिंदू मंदिरों से सोना छीनने की बात कही.

  • नतीजा

    पृथ्वराज चव्हाण ने सरकार को सभी धार्मिक ट्रस्टों के पास मौजूद सोने को कम ब्याज दर पर उधार लेने की बात कही है. सिर्फ मंदिरों का ज़िक्र कभी नहीं किया.

अगर आपको भी किसी जानकारी पर संदेह है तो हमें भेजिए, padtaalmail@gmail.com पर. हम पड़ताल करेंगे और आप तक पहुंचाएंगे सच.

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें