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पड़ताल: क्या रतन टाटा ने सिक्योरिटी गार्ड के बेटे को ऑफिस का मैनेजर बना दिया?

दावा

सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि रतन टाटा ने अपनी कंपनी यानी टाटा समूह में काम करने वाले एक सिक्योरिटी गार्ड के बेटे को अपने दफ्तर का डीजीएम यानी डेप्युटी जनरल मैनेजर बनाया है (आर्काइव लिंक). हम दावे को ज्यों का त्यों लिख रहे हैं, बिना भाषाई बदलाव के.

शांतनु नायडू …रतन टाटा चेयरमैन टाटा समूह की ऑफिस में डीजीएम है.
मात्र 24 साल के शांतनु और 81 साल के रतन टाटा जी
दरअसल टाटा समूह के एक सिक्योरिटी गार्ड के लड़के का चयन आईआईटी में हुआ
उसके बाद उस सिक्योरिटी गार्ड के लड़के ने आईआईएम से एमबीए किया
और फिर रतन टाटा आपने ऑफिस के सिक्योरिटी गार्ड के बच्चे की मेहनत से खुश होकर उसे अपने ऑफिस का डीजीएम बना दिया

 

वायरल दावा.
वायरल दावा.

इस पोस्ट में एक नौजवान की रतन टाटा के साथ फोटो दिखाई जा रही है. इन्हें ही शांतनु नायडू बताया जा रहा है. इसे अतुल पांडेय जैसे कई यूज़र्स ने R.S.S नाम के ग्रुप में शेयर किया है. इस पर साढ़े 8 हज़ार से ज्यादा लोग रिएक्ट कर चुके हैं.

कई लोग ये दावा कर रहे हैं.
कई लोग ये दावा कर रहे हैं.

पड़ताल

हमारी पड़ताल में ये दावा भ्रामक निकला. ये सच है कि फोटो में दिख रहे शख़्स का नाम शांतनु नायडू है. ये भी सच है कि शांतनु रतन टाटा के दफ्तर में बतौर डेप्युटी जनरल मैनेजर काम कर रहे हैं. लेकिन इसके दावे के साथ जो कहानी गढ़ी जा रही है वो झूठ है. शांतनु के पिता टाटा ग्रुप में सिक्योरिटी गार्ड नहीं हैं. और वो IIM से नहीं पढ़े हैं.

शांतनु ने रतन टाटा के दफ्तर में काम हासिल करने की पूरी बात खुद कई बार बताई है. बिजनेस भास्कर से बातचीत में शांतनु ने बताया कि उन्होंने ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग की है. वो टाटा एलेक्सी में काम करते थे. उन्होंने पुणे में स्ट्रीट डॉग्स को सड़कों पर हादसों का शिकार होते देखा. वो बताते हैं कि

इस तरह की घटनाएं काफी परेशान करती थीं. फिर, मैंने उनकी जान बचाने का तरीका खोजने के लिए लोगों से बात की. मुझे पता चला कि ड्राइवर का समय रहते कुत्तों को नहीं देख पाना दुर्घटनाओं का बड़ा कारण था. चूंकि मैं एक ऑटोमोबाइल इंजीनियर था. इसलिए मेरे मन में तुरंत कुत्तों के लिए एक कॉलर बनाने का आइडिया आया. इससे ड्राइवर रात में स्ट्रीट लाइट के बगैर भी उन्हें दूर से देख सकते थे. कॉलर, बेस्ट ग्रेड रेस्ट्रो रिफ्लेक्टिव मैटेरियल यानी चमकदार मैटेरियल से बना था. दोस्तों की मदद से यह संभव हुआ. मोटोपॉज (स्टार्ट-अप) नाम की इस छोटी सी कोशिश ने काफी लोगों का ध्यान खींचा. अब स्ट्रीट डॉग्स की जान बच रही थी. इस छोटे से लेकिन महत्वपूर्ण काम के बारे में टाटा समूह की कंपनियों के न्यूजलेटर में लिखा गया. फिर इस पर रतन टाटा की नजर पड़ी, जो खुद भी कुत्तों से काफी लगाव रखते हैं.

इसके बाद शांतनु ने पिता के कहने पर टाटा को पत्र भी लिखा. एक दिन मुंबई में शांतनु को रतन टाटा से उनके ऑफिस में मिलने का न्यौता मिला. बाद में रतन टाटा ने शांतनु के स्टार्ट अप में पैसा भी लगाया. इसी बहाने शांतनु की मुलाक़ात रतन टाटा से होती रही. ऐसी ही एक मुलाक़ात में शांतनु ने ज़िक्र किया कि वो अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से MBA करने जा रहे हैं. 2018 में उन्होंने MBA पूरी कर ली. इसके बाद रतन टाटा ने शांतनु को उनका दफ्तर जॉइन करने के लिए कहा.

शांतनु और रतन टाटा के बीच हुई पहली मुलाकात की तस्वीर.
शांतनु और रतन टाटा के बीच हुई पहली मुलाकात की तस्वीर.

शांतनु अपनी खानदान की पांचवीं पीढ़ी हैं जो टाटा ग्रुप में काम कर रही है. लेकिन एग्ज़िक्यूटिव स्तर पर काम करने वाले ये पहले शख़्स हैं. इससे पहले इनके परिवार के लोग बतौर इंजीनियर या टेक्निशियन ही काम करते रहे हैं.

अपनी लिंक्डइंन प्रोफाइल पर भी शांतनु ने यही जानकारी दी है. उनकी प्रोफाइल के मुताबिक उन्होंने 2010 से 2014 तक पुणे यूनिवर्सिटी से मकैनिकल इंजीनियरिंग की. इसके बाद नौकरी की और फिर 2016 से 2018 तक MBA की पढ़ाई पूरी की. योर स्टोरी पर छपे शांतनु के इंटरव्यू में भी उन्होंने यही जानकारी दी है. योर स्टोरी पर ये इंटरव्यू 23 अक्तूबर, 2019 को छपा था. इसी के बाद से भ्रामक दावे वायरल होने लगे थे.

नतीजा

हमारी पड़ताल में सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा भ्रामक निकला. शांतनु टाटा ग्रुप के सिक्योरिटी गार्ड के बेटे नहीं हैं. न ही शांतनु आईआईटी से पढ़े हुए हैं. वो पुणे यूनिवर्सिटी से पढ़े हैं. बाद में अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से MBA की है, न कि आईआईएम से. रतन टाटा ने शांतनु इंजीनियरिंग के दिनों से ही जुड़े हुए हैं. 2018 में उन्होंने बतौर डेप्युटी जनरल मैनेजर रतन टाटा का ऑफिस जॉइन किया है.


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