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सैमसंग को फोन में अपग्रेड देने से परहेज क्यों है? नए Galaxy S26 Ultra में भी वही सब!

Samsung, एंड्रॉयड में सबसे लोकप्रिय कंपनी होने के साथ सबसे ज्यादा डिवाइस सेल करने वाली कंपनी भी है. उसकी फ्लैग्शिप गैलक्सी सीरीज हर साल रिकॉर्ड नंबर में बिकती है, लेकिन कंपनी नए डिवाइस के साथ कोई बड़ा अपग्रेड नहीं देती. पिछले सात सालों से बैटरी 5000 mAh पर अटकी है तो कैमरा, चार्जिंग और डिजाइन में भी मामला कुछ ऐसा ही है.

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सैमसंग अपने स्मार्टफोन में अपग्रेड में आलसी क्यों करता है (तस्वीर: S M A Sithick एक्स पोस्ट)

सात साल और बैटरी में कोई बदलाव नहीं. कैमरा, चार्जिंग और डिजाइन में भी मामला कुछ ऐसा ही है. माने जो आपके पास सात साल पुराना Samsung Galaxy S20 Ultra हो या इसके बाद इस सीरीज के बाकी आए फोन हों, या फिर इस फरवरी के आखिरी हफ्ते में लॉन्च होने वाला Galaxy S26 Ultra हो. आप कुछ ज्यादा मिस नहीं करेंगे. हालांकि नए डिवाइस में सबसे तगड़ा प्रोसेसर लगा होगा और रैम भी बड़ी होगी. AI फीचर्स वाकई में जबरदस्त मिलेंगे मगर कड़वा सच यह है कि एंड्रॉयड में सबसे लोकप्रिय कंपनी सालों से कोई बड़े अपग्रेड ऑफर नहीं कर रही. क्यों? जवाब तलाशते हैं.

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प्रोडक्शन का ढक्कन

सैमसंग, एंड्रॉयड में सबसे लोकप्रिय कंपनी होने के साथ सबसे ज्यादा डिवाइस सेल करने वाली कंपनी भी है. कंपनी के गैलक्सी डिवाइस करोड़ों की संख्या में बिकते हैं. ऐसे में हर बार नया प्रोडक्शन सेटअप करना बड़ी चुनौती है. एक छोटे से बदलाव के लिए भी पूरी सप्लाई चेन में बदलाव करने होंगे. अभी कंपनी को तमाम कंपोनेन्ट सप्लाई करने वाले वेंडर tried-and-tested हैं. हार्डवेयर में कुछ नया किया तो फिर पूरा प्रोसेस फिर से दोहराना पड़ेगा. इसलिए one-inch कैमरा से लेकर अलग-अलग टेलीफोटो कैमरा सेंसर पर कंपनी आंख नहीं लगाती.

सेफ्टी से सट्टा नहीं खेलना

साल 2016 में आया Galaxy Note 7 वो डिवाइस है जिसने कंपनी को नोट गिनकर तो बिल्कुल नहीं दिए, उलटे दुनिया भर में बेइज्जती अलग करवा दी. इस डिवाइस की बैटरी ऐसी फटी कि इसे सभी जगह बैन किया गया. कंपनी को सारे डिवाइस यूजर से वापस लेने पड़े. फोन की सेफ्टी को लेकर बड़ा सवाल उठा. इसलिए जब कंपनी को अपनी फ्लैग्शिप सीरीज से भरोसा मिला तो उसकी सुई वहीं चिपक गई. गैलक्सी सीरीज में लगी 5000 mAh बैटरी ने कोई कांड नहीं किया. कंपनी ने इसके बाद इसमें कोई बदलाव नहीं किया.

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Galaxy Note 7  (तस्वीर साभार: Jonathan Morrison)

हालांकि बैटरी तकनीक में बहुत बड़ा बदलाव हो चुका है. चीनी कंपनियों के फोन मॉडर्न silicon-carbon बैटरी के साथ आते हैं. इनकी वजह से उनके लिए 7000-8000mAh न्यू नॉर्मल है. वैसे Si-c बैटरी को लेकर भी कई बातें चलती हैं, जैसे इनकी लाइफ कम होती है मगर अभी तक ऐसा कुछ असल में दिखा नहीं है. ऐसा नहीं है कि सैमसंग अपने फोन में Si-c बैटरी नहीं खोंस सकता है. आसान सा काम है मगर यूरोपियन यूनियन के नियम बीच में आ जाते हैं. यही नियम Apple, Google को भी बड़ी बैटरी नहीं लगाने देते.

प्रॉफिट का पॉकेट क्यों फाड़ना?

यह दूसरा सबसे बड़ा कारण है जो कंपनी बड़े अपग्रेड नहीं करती है. शायद इसलिए कंपनी सालों पुराने 3x 10MP पेरीस्कोप कैमरा पर अटकी है जबकि चीनी स्मार्टफोन 3x 50MP तक पहुंच गए हैं. अब नए पार्ट्स लगाएंगे तो पैसा भी नया लगेगा. पुराने पार्ट्स में तो कीमतें पहले से तय हैं. पार्ट्स की कीमतें तो वही हैं मगर डिवाइस के दाम खूब बढ़े हैं. ऐसे में प्रॉफ़िट मार्जिन तो बढ़ा होगा. कंपनी एक माइंड गेम भी बढ़िया खेलती है. गैलक्सी के बेस मॉडल में 45W वाली चार्जिंग और Gorilla Armor स्क्रीन प्रोटेक्शन नहीं मिलता. माने जो टॉप फीचर्स चाहिए तो टॉप मॉडल खरीदो.

कोई नहीं है टक्कर में

सब बातों से इतर एक पॉइंट यह भी है. एंड्रॉयड मार्केट में उससे मुकाबला करने वाला कोई है नहीं, स्पेशली यूरोपियन और अमेरिकी बाजार में. कुछ सालों पहले HUAWEI ने जरूर उसको हिला दिया था, जब वो सेल्स में एप्पल को पीछे छोड़कर दूसरे नंबर पर आ गया था. उसके P20 Pro और P20 Lite जैसे डिवाइस भौकाल मचा रहे थे मगर फिर वो अपने चीनी कनेक्शन के चलते खुद ही अमेरिका से बाहर हो गया.

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अमेरिकी बाजार में Motorola, OnePlus और TCL हैं तो सही, मगर उनका कोई बड़ा मार्केट बना नहीं है. दूसरे चीनी स्मार्टफोन जैसे vivo, oppo, oneplus उतने पसंद नहीं किए जाते. सेल्स के आंकड़े भी इसकी गवाही देते हैं. पांच सालों से ग्लोबल टॉप 10 डिवाइस में कोई चीनी फोन नजर नहीं आता. उनका प्रभाव इंडिया में ही ज्यादा दिखता है. कहने का मतलब जब सामने कोई तगड़ा फाइटर नहीं है तो बिला-वजह क्यों अपनी डाइट में बदलाव करना.

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घर-घर की कहानी

यह सबसे बड़ा कारण है. सैमसंग कोई सिर्फ फोन बनाने वाली कंपनी तो है नहीं. स्मार्टफोन के अस्थी-पंजर बनाने में वो सबसे आगे है. फोन भले आईफोन हो या कोई चायनीज ब्रांड. कैमरा से लेकर रैम, डिस्प्ले और स्टोरेज सैमसंग ही बनाती है. उनका Exynos प्रोसेसर स्नैपड्रेगन की तुलना में सस्ता है. एप्पल के लिए तो वो सबसे बड़ा सप्लायर है. इसका बाजार उसके फोन के बाजार से बहुत-बहुत बड़ा है. इसलिए कंपनी सालों से Samsung ISOCELL कैमरा सेंसर अपने फोन में भी लगाती है और दूसरी कंपनियों को भी चिपका रही. माने घर जब बहुत बड़ा हो तो बदलाव करना मुश्किल है भले अंदर से जी कुलबुला रहा हो.  

कथासार यह है कि बड़े अपग्रेड नहीं करना सैमसंग की मजबूरी और जरूरत, दोनों है. हम चाहे जो भी कहें उसके Galaxy S24 और S25 सीरीज के फोन रिकॉर्ड नंबर में बिके हैं. Galaxy S26 Ultra लॉन्च से पहले ही खूब चर्चा में है लेकिन कब तक. बिना अपग्रेड के टॉप ग्रेड में कब तक रहेंगे.

सैमसंग के संग-संग चलते हुए हमें पता चल ही जाएगा.

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