सरकार UPI पर MDR यानी ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ लगाने की तैयारी में है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसके लिए 4 अगस्त को बिल भी पेश किया. MDR एक किस्म की प्लेटफॉर्म फीस होती है जो मर्चेंट डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म या बैंक को देता है. डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म माने गूगल पे, फोन पे, पेटीएम वगैरा. क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड पेमेंट करने वालों को अभी भी ये फीस देनी होती है.
डेबिट कार्ड वाला MDR जल्दी ही UPI पर लगेगा, आपका फायदा है या नुकसान?
क्या है MDR यानी ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’? किसे मिलता है MDR का पैसा? जब MDR नहीं तो Google Pay, PhonePe और Paytm जैसी कंपनियों कमाई कैसे करती हैं? कमाई करती भी हैं या बेचारी जनसेवा करती हैं?

MDR कोई नई चीज नहीं है लेकिन 1 जनवरी 2020 से इसे बंद कर दिया गया था. अब इसे फिर से लाने की बात हो रही तो कुछ सवाल चमक रहे.
# मर्चेंट डिस्काउंट रेट क्या बला है?
# किसे मिलता है MDR का पैसा?
# जब MDR नहीं तो पेमेंट कंपनियां कैसे कमाती हैं?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट क्या बला है?MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट एक चार्ज है. याद कीजिए जब आप UPI आने से पहले कुछ खरीदने जाते थे तो क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड पर दुकानदार कुछ एक्स्ट्रा चार्ज लगाने की बात कहता था. छोटे और मझोले दुकान वाले तो स्पेशली इसके बारे में बात करते थे. अभी इस पर बात नहीं होती क्योंकि ज्यादातर पेमेंट UPI से होता है. असल में जब आप कार्ड से पेमेंट करते हैं तो दुकानदार को एक तय फीस अपने बैंक को चुकानी पड़ती है. जैसे क्रेडिट कार्ड (Visa, Mastercard, Amex आदि) से किए गए भुगतानों पर .9 से 2 फीसदी MDR लगता है. हालांकि बड़ी दुकान वाले बड़े लेनदेन पर इसे ग्राहक से नहीं लेते और अपने से भरते हैं.

MDR चार्ज दुकानदार पर लगता है और इसे वे ग्राहकों से वसूल करते हैं. दुकानदार इस फीस को आपके बिल के साथ आपसे वसूल जरूर करता है. मगर उसे मिलती चवन्नी भी नहीं है. इसलिए कई बार छोटे दुकानदार इसी वजह से कार्ड से पेमेंट लेने में आनाकानी करते हैं. RuPay डेबिट कार्ड और साधारण बैंक-टू-बैंक UPI भुगतान (P2P और P2M दोनों) पर मर्चेंट या ग्राहक किसी से भी कोई MDR नहीं लिया जाता है.
किसे मिलता है MDR का पैसा?अभी MDR की रकम 3 हिस्सों में बांटी जाती है.
1- पहला और बड़ा हिस्सा मिलता है क्रेडिट या डेबिट कार्ड जारी करने वाले बैंक को.
2- दूसरा हिस्सा होता है, उस बैंक का, जिसकी प्वाइंट ऑफ सेल्स PoS मशीन दुकानदार के यहां लगी होती है. प्वाइंट ऑफ सेल्स मशीन उसे कहते हैं, जिस पर कार्ड स्वैप किया जाता है.
3- तीसरा हिस्सा मिलता है पेमेंट कंपनी को. इस समय देश में पेटीएम, फोन-पे, ऐमजॉन पे, बुक मॉय शो, वीजा, मास्टर कार्ड और अमेरिकन एक्सप्रेस जैसी करीब 84 पेमेंट कंपनियां हैं.
यहां तक मामला डेबिट क्रेडिट कार्ड का है. लेकिन अब चलते UPI की तरफ जहां MDR लगाने की बात हो रही.
MDR नहीं तो कंपनियां जनसेवा करती हैं क्या?ही ही ही. ऐसा हमको लगता है क्योंकि UPI करते समय हमें एक्स्ट्रा कुछ नहीं देना होता. लेकिन पेमेंट कंपनियां बढ़िया पैसा कमाती हैं. उदाहरण के लिए Paytm Soundbox को लगाने के 125 रुपये महीना लेती है. 300 रुपये का डिपॉजिट भी होता है. ऐसे एक करोड़ से ज्यादा साउंडबॉक्स लगे हैं. अब खुद जोड़ लीजिए. अकेले 2022 में 300 करोड़ छापे थे.
मोबाइल रिचार्ज अब फ्री नहीं है. 3 रुपये चार्ज लगता है हर प्लेटफॉर्म पर. जब आप इन ऐप्स के जरिए डीटीएच (DTH), बिजली/पानी का बिल, या गैस सिलेंडर बुक करते हैं, तो टेलीकॉम कंपनियां और यूटिलिटी बोर्ड इन्हें हर ट्रांजैक्शन पर कमीशन देते हैं. ऐप्स एनबीएफसी (NBFCs) और बैंकों के साथ पार्टनरशिप करके यूजर्स और दुकानदारों को लोन दिलवाते हैं और उस पर भारी कमीशन कमाते हैं.
म्यूचुअल फंड, गोल्ड, बाइक/कार/हेल्थ इंश्योरेंस बेचने पर भी इन्हें अच्छा कमीशन मिलता है. करोड़ों लोग दिनभर में कई बार ऐप्स ओपन करते हैं तो इनका होमपेज विज्ञापन और ब्रांड प्रमोशन का सबसे बड़ा अड्डा बन जाता है. होमपेज पर अन्य ब्रांड्स के विज्ञापन, बैनर, स्क्रैच कार्ड और कूपन दिखाकर मोटी रकम वसूली जाती है. माने इधर मामला सेट है.
रही बात UPI पर MDR लगाने की तो 2000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर MDR रेट 0.3 फीसदी से 0.5 फीसदी तय किया जा सकता है. लेकिन ये भी बताया गया कि जो बिज़नेस सालाना 1.5 करोड़ से ज्यादा का टर्नओवर करते हैं, उन पर ही ये अप्लाई होगा. यानी कस्टमर और छोटे दुकानदारों को कोई प्लेटफॉर्म फीस नहीं देनी होगी.
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