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E20 पर नितिन गडकरी से जुड़े 'घिनौने' कॉन्टेंट इंटरनेट से हटेंगे, HC का आदेश

Nitin Gadkari E20 Petrol: कोर्ट ने आदेश में यह भी कहा कि अगर भविष्य में मंत्री की तरफ से ऐसा कोई कॉन्टेंट ध्यान में लाया जाता है, तो उसे भी हटाया जाए. कोर्ट ने गूगल और मेटा से भी कहा कि वे कॉन्टेंट हटाने का कोई तरीका निकालें, ताकि हर बार कोर्ट न जाना पड़े. मामले की अगली सुनवाई 4 हफ्ते बाद होगी.

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केंद्रीय मंत्री गडकरी ने 27 जुलाई को हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. (फोटो-इंडिया टुडे)

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  • सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर एथेनॉल ब्लेंडिंग (E20) से जुड़े अपने खिलाफ बनाई गई डीपफेक और अभद्र वीडियो सामग्री हटाने का आदेश मांगा।
  • एथेनॉल ब्लेंडिंग की नीति से जुड़ी गलतफहमियों और गडकरी परिवार के खिलाफ बनाए गए अपमानजनक मीम्स व वीडियो के कारण मंत्री ने अदालत का सहारा लिया और आरोप लगाए कि उन्हें गलत तरीके से जिम्मेदार ठहराया गया।
  • हाईकोर्ट ने मेटा और गूगल को उक्त अभद्र सामग्री हटाने का निर्देश दिया है और भविष्य में ऐसे कंटेंट पर रोक लगाने के लिए उपाय करने को कहा, मामले की अगली सुनवाई 4 सप्ताह बाद तय हुई है।

एथेनॉल ब्लेंडिंग पेट्रोल के मुद्दे पर सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की काफी आलोचना हो रही है. सोशल मीडिया पर उनके मीम्स बनाए जा रहे हैं. परिवार को मिलने वाले मुनाफे से जुड़े तमाम दावे किए जा रहे हैं. इन सभी से तंग आकर नितिन गडकरी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था. अब इस पर कोर्ट का फैसला आ गया है. 

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अदालत ने केंद्रीय मंत्री को E20 से जोड़ने वाले डीपफेक और AI वीडियो कॉन्टेंट को हटाने का आदेश दिया. जस्टिस आरिफ डॉक्टर की सिंगल बेंच ने गडकरी के वकीलों संदीप एस. लड्डा, शिवानी खानविलकर, सलोनी शाह और धुन विनोद संतोष की दलीलें सुनने के बाद ये आदेश दिया है.

कोर्ट ने पाया कि गडकरी द्वारा बताए गए कॉन्टेंट ‘घिनौने और अभद्र’ थे. बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जज ने अपने आदेश में कहा,

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"जिस कॉन्टेंट को हटाने की मांग की गई है, उसके बारे में मैं बस इतना ही कह सकता हूं कि वह पूरी तरह से घिनौना और अभद्र है. ऐसे कॉन्टेंट के लिए सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर कोई जगह नहीं होनी चाहिए. आवेदक ने अंतरिम राहत के लिए केस किया है. मेटा और गूगल 'एक्जिबिट C' के तहत बताए गए कॉन्टेंट को हटाने के लिए सहमत हो गए हैं. "

कोर्ट ने आदेश में यह भी कहा कि अगर भविष्य में मंत्री की तरफ से ऐसा कोई कॉन्टेंट ध्यान में लाया जाता है, तो उसे भी हटाया जाए. कोर्ट ने गूगल और मेटा से भी कहा कि वे कॉन्टेंट हटाने का कोई तरीका निकालें, ताकि हर बार कोर्ट न जाना पड़े. मामले की अगली सुनवाई 4 हफ्ते बाद होगी.

याचिका में मंत्री ने क्या कहा?  

केंद्रीय मंत्री गडकरी ने 27 जुलाई को हाई कोर्ट में ये याचिका दायर की थी. उन्होंने कहा था कि एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम 2003 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने शुरू किया था. वह 2014 से अब तक सड़क परिवहन मंत्री रहे हैं. E20 नीति से जुड़े फैसले में उनकी कोई भूमिका नहीं है. मगर कई अज्ञात लोगों ने उन्हें लेकर अपमानजनक डीपफेक कॉन्टेंट बनाया और वायरल किया. उन्हें गलत तरीके से नीति से जुड़ा हुआ बताया. कई अपमानजनक, निंदनीय और बदनाम करने करने वाले आरोप लगाए.

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नितिन गडकरी ने अदालत में कहा कि E20 प्रोग्राम के लिए उनको गलत तरीके से व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया गया. आरोप लगाया गया कि उन्हें और उनके परिवार को इससे फायदा हुआ है. याचिका में उन्होंने कहा था कि लोग उनके खिलाफ आपत्तिजनक मीम्स और कमेंट्स कर रहे हैं. इससे उनकी इमेज खराब हो रही है.

हाई कोर्ट ने गडकरी को उनके और परिवार के खिलाफ गलत कॉन्टेंट बनाए जाने के लिए X, मेटा, गूगल और अज्ञात लोगों के खिलाफ केस करने की अनुमति दी है.

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