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उबर ने AI के जरिए ड्राइवरों की नौकरी खा ली, अब भरना पड़ेगा 9000 करोड़ का जुर्माना!

यूरोप में Uber पर 825 मिलियन यूरो (लगभग 9,244.67 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया गया है. यह जुर्माना ड्राइवरों को सस्पेंड या डिएक्टिवेट करने के लिए ऑटोमेटेड सिस्टम (AI) के इस्तेमाल के गलत तरीके के चलता लगा है.

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Uber पर 9000 करोड़ का जुर्माना

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  • उबर कंपनी पर यूरोप में 825 मिलियन यूरो (लगभग 9,000 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया गया है क्योंकि उसने AI का उपयोग कर ड्राइवरों को बिना मानवीय समीक्षा के सस्पेंड और डिएक्टिवेट किया।
  • यह मामला फ्रांस में उबर ड्राइवरों की शिकायतों से शुरू हुआ, जिसमें आरोप थे कि कंपनी ने AI आधारित सिस्टम द्वारा ड्राइवरों के अकाउंट बिना उचित जानकारी के बंद कर दिए थे।
  • उबर ने जुर्माने का खंडन किया है और कहा है कि स्थायी निलंबन के लिए इंसानी समीक्षा जरूरी है, इस जुर्माने के खिलाफ कंपनी अपील करेगी।

Uber और AI का मामला बैठ ही नहीं पा रहा है. कुछ महीने पहले कंपनी का साल भर का AI बजट सिर्फ चार महीने में खत्म हो गया था. उनके सीईओ को समझ (AI Investment Is ‘Harder to Justify) नहीं आ रहा कि क्या करें. अब कंपनी पर 9000 करोड़ का जुर्माना लगा है. वजह मुआ एआई ही है. उबर को यूरोप में लगभग 9,000 करोड़ रुपये के जुर्माने का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उस पर आरोप है कि उसने एआई का इस्तेमाल करके कैब ड्राइवरों को सस्पेंड और डिएक्टिवेट कर दिया था.

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एआई तय कर रहा ड्राइवर की नौकरी

डच डेटा प्रोटेक्शन अथॉरिटी (GDPR) ने कंपनी पर 825 मिलियन यूरो (लगभग 9,244.67 करोड़) का जुर्माना लगाया है. यह जुर्माना ड्राइवरों को सस्पेंड या डिएक्टिवेट करने के लिए ऑटोमेटेड सिस्टम के इस्तेमाल के तरीके को लेकर लगाया गया है. डच रेगुलेटर का कहना है कि उबर ने कुछ ड्राइवरों के अकाउंट्स को बिना ठीक से जानकारी दिए या बिना किसी सार्थक मानवीय समीक्षा के डिएक्टिवेट कर दिया, इन फैसलों से उनकी कमाई बंद हो गई. रेगुलेटर ने अपनी जांच में पाया कि कुछ ड्राइवरों को कंप्यूटर से लिए गए फैसलों के ज़रिए हमेशा के लिए डिएक्टिवेट कर दिया गया, जिनमें कम कस्टमर रेटिंग वाले ड्राइवर भी शामिल थे.

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आसान भाषा में समझें तो कंपनी ने अपने सिस्टम में ड्राइवर के लिए पैरामीटर सेट किए. जो इसमें फिट बैठा वो बचा और जो नहीं वो गया. डच डेटा प्रोटेक्शन अथॉरिटी की डिप्टी चेयर मोनिक वर्डीयर ने कहा, "कंप्यूटर को खुद ऐसे फ़ैसले नहीं लेने चाहिए जिनके इतने बड़े नतीजे हों."

GDPR नियमों के तहत, कंपनियां सिर्फ़ ऑटोमेटेड फ़ैसला लेने की प्रक्रिया पर निर्भर नहीं रह सकतीं, जब उसका किसी व्यक्ति पर बड़ा असर पड़ता हो. ऐसे फ़ैसलों के लिए इंसानों द्वारा ठीक से समीक्षा करना ज़रूरी है.

क्या है मामला

यह मामला फ्रांस में उबर ड्राइवरों की शिकायतों से शुरू हुआ. उबर के पूर्व ड्राइवर ब्राहिम बेन अली ने डच अखबार 'डी वोल्कस्क्रंट' को बताया कि 2019 में उनका अकाउंट डिएक्टिवेट कर दिया गया था. बाद में उन्होंने लगभग 170 अन्य ड्राइवरों के बयान इकट्ठे किए और नीदरलैंड में शिकायत दर्ज कराई, जहां उबर का यूरोपियन हेडक्वार्टर है.

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Uber की दलील

उबर ने इन निष्कर्षों का खंडन किया है और कहा है कि उसने कभी भी किसी ड्राइवर को पूरी तरह से ऑटोमेटिक सिस्टम के माध्यम से स्थायी रूप से डिएक्टिवेट नहीं किया है. कंपनी ने कहा कि अधिकांश निलंबन अस्थायी होते हैं, स्थायी रूप से डिएक्टिवेट करने के लिए इंसानी समीक्षा की आवश्यकता होती है, और ड्राइवर ऐसे निर्णयों को चुनौती दे सकते हैं. अब कंपनी जुर्माने के खिलाफ अपील करने की योजना बना रही है. 

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