डायबिटीज, शुगर, इंसुलिन की जब भी बात होती है तो उंगली से खून निकाले बिना कुछ होता नहीं. खून निकालो फिर उसी टाइम की शुगर चेक करो या फिर तीन महीने वाली HbA1c निकालो. लेकिन गूगल इस काम को आसान करने जा रहा है. Google ने Pixel Watch 5 में एक नया हेल्थ फ़ीचर जोड़ा है, जिससे बिना खून निकाले मेटाबोलिक हेल्थ में होने वाले बदलावों का पता लगाना आसान हो सकता है. Pixel Watch 5 में 'इंसुलिन रेजिस्टेंस ट्रेंड्स' (Insulin Resistance Trends) पेश किया है, ताकि कलाई से मिलने वाले डेटा के आधार पर लंबे समय में होने वाले मेटाबोलिक बदलावों का अंदाज़ा लगाया जा सके.
डायबिटीज का खतरा तो तुरंत मिलेगा अलर्ट, Google Watch में आए कमाल के कई फीचर
Google Pixel Watch 5 इंसुलिन रेजिस्टेंस को ट्रैक करेगी और डायबिटीज का खतरा होने पर यूज़र्स को अलर्ट करेगी. "इंसुलिन रेजिस्टेंस ट्रेंड्स' (Insulin Resistance Trends) नाम का यह फ़ीचर स्मार्टवॉच से इकट्ठा किए गए डेटा का इस्तेमाल करके यह पता लगाता है कि समय के साथ इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ रहा है या कम हो रहा है.
Google Pixel Watch 5 इंसुलिन रेजिस्टेंस को ट्रैक करेगी और डायबिटीज का खतरा होने पर यूज़र्स को अलर्ट करेगी. "इंसुलिन रेजिस्टेंस ट्रेंड्स' नाम का यह फ़ीचर स्मार्टवॉच से इकट्ठा किए गए डेटा का इस्तेमाल करके यह पता लगाता है कि समय के साथ इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ रहा है या कम हो रहा है. गूगल का ये फीचर Google के 'हेल्थ गार्डियन' सुइट का हिस्सा है और यह Pixel Watch 3 और उसके बाद के मॉडल के साथ-साथ Fitbit डिवाइस में भी आएगा. हालांकि ये फीचर डायबिटीज के उपचार में तो कोई मदद नहीं करेगा लेकिन शुरुआती चेतावनी देने वाले टूल के तौर पर जरूर काम आएगा.
इंसुलिन एक हॉर्मोन है. जिसे पैंक्रियाज़ बनाता है. इंसुलिन का काम है खाने से मिलने वाली ग्लूकोज़ को शरीर के सेल्स में पहुंचाना. जिससे शरीर को एनर्जी मिले और खून में शुगर का लेवल भी कंट्रोल में रहे. पर कई बार शरीर के सेल्स इंसुलिन हॉर्मोन के प्रति ठीक से प्रतिक्रिया नहीं करते. इसे इंसुलिन रेज़िस्टेंस कहते हैं. ऐसा होने पर खून में शुगर का लेवल बढ़ जाता है, जिससे डायबिटीज़ हो सकती है. आमतौर पर हम इंसुलिन रेज़िस्टेंस को डायबिटीज़ से जोड़कर ही देखते हैं. पर इसका असर सिर्फ डायबिटीज़ तक सीमित नहीं है. ये शरीर में कई और बीमारियां भी कर सकता है. इसके बारे में आप यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं.

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इंडियंस के बहुत काम का फीचरWHO के मुताबिक, भारत में लगभग 7. 7 करोड़ वयस्क टाइप 2 डायबिटीज़ से पीड़ित हैं, जबकि लगभग 2.5 करोड़ लोग प्री-डायबिटिक हैं. ऐसे में ये फीचर वाकई मदद कर सकता है. दिलचस्प बात यह है कि इसमें न तो सुई का इस्तेमाल होता है और न ही सीधे ब्लड शुगर की रीडिंग ली जाती है. गूगल का कहना है कि यह फ़ीचर वॉच से कई हफ़्तों तक इकट्ठा किए गए शारीरिक डेटा का विश्लेषण करता है और मेटाबोलिक हेल्थ से जुड़े संकेतों में बदलाव को देखता है. इनमें दिल की धड़कन की लय, नींद और रोज़ाना की गतिविधियों जैसे कारक शामिल हैं. फीचर का मकसद ये बताना नहीं है कि किसी खास खाने के बाद आपका ब्लड शुगर कितना है. बल्कि, यह वॉच समय के साथ पैटर्न को देखती है और अंदाज़ा लगाती है कि आपका इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ रहा है या घट रहा है.
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ग्लूकोज मॉनिटर का विकल्प नहींगूगल का इंसुलिन रेजिस्टेंस फीचर शुगर के लेवल को नहीं बताने वाला और ना CGM की तरह उसकी 24 घंटे निगरानी करने वाला है. इसे एक तरह का शुरुआती चेतावनी देने वाला सिस्टम समझ लीजिए. बढ़िया है जो भी पता चले वो अच्छा. क्या पता एक दिन गूगल अपनी घड़ी में ग्लूकोज मॉनिटर भी फिट कर दे.
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