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iPhone हो या Android, सारे स्मार्टफोन के दाम घटेंगे? इंपोर्ट ड्यूटी हटाने वाली है सरकार!

रॉयटर्स के मुताबिक, भारत सरकार ने स्मार्टफोन इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स पर इंपोर्ट ड्यूटी खत्म कर दी है. इसका फायदा वायरलेस चार्जिंग मॉड्यूल, डिस्प्ले असेंबली, लिथियम आयन बैटरी कंपोनेंट्स और मैन्युफैक्चरिंग मशीनरी को मिलेगा. ये छूट 31 मार्च 2029 तक लागू रहेगी, जिससे भविष्य में स्मार्टफोन की कीमतें घटने की उम्मीद बढ़ी है.

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स्मार्टफोन सस्ते हो सकते हैं

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  • भारत सरकार ने स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस के कंपोनेंट्स पर लगी 7.5% और 5% इंपोर्ट ड्यूटी को 31 मार्च 2029 तक समाप्त करने का फैसला किया है।
  • स्मार्टफोन के रैम और मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतों के कारण कंपनियां अपने स्मार्टफोन्स के दाम में वृद्धि कर रही हैं, जिससे कीमतों को नियंत्रित करना मुश्किल हो गया है।
  • इंपोर्ट ड्यूटी हटाने से कंपनियों के उत्पादन लागत पर दबाव कम होगा और इससे स्मार्टफोन की कीमतों में स्थिरता आने की संभावना बनी है।

देश में स्मार्टफोन से लेकर इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्टस सस्ते हो सकते हैं. भारत ने स्मार्टफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस में इस्तेमाल होने वाले कंपोनेंट की कीमतों से इंपोर्ट ड्यूटी हटाने (india removes import duty on smartphone electronic components) का फैसला किया है. अब आप कहेंगे कि अगर सस्ते ना हुए तो? इसका जवाब ये है कि अगर स्मार्टफोन सस्ते नहीं भी हुए तो कम से कम आने वाले टाइम में उनकी कीमत नहीं बढ़ेगी. 

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सभी को पता है कि रैम की लगातार बढ़ती कीमतों की वजह से स्मार्टफोन कंपनियां लगातार दाम बढ़ा रही हैं. ऐसे में इम्पोर्ट ड्यूटी कम होने से थोड़ा फायदा तो होगा. रॉयटर्स की खबर के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइसेस के कंपोनेंट और मशीनरी पर लगने वाली मौजूदा 7.5 प्रतिशत और 5 प्रतिशत की इंपोर्ट ड्यूटी खत्म हो जाएगी.

Apple से लेकर Xiaomi और सैमसंग को फायदा

रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि इंपोर्ट ड्यूटी खत्म होने का असर स्मार्टफोन के वायरलेस चार्जिंग मॉड्यूल, कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट जैसे डिस्प्ले असेंबली, लिथियम-आयन सेल बैटरी के कंपोनेंट और मशीनरी पर दिखेगा. ये छूट 31 मार्च 2029 तक जारी रहेगी. वित्त मंत्रालय और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) की नोटिफिकेशन के मुताबिक, ये छूट स्मार्टफोन में वायरलेस चार्जिंग के लिए यूज होने वाले इंडक्टर कॉइल मॉड्यूल, ऑटोमोटिव, मेडिकल और इंडस्ट्रीज में यूज होने वाली डिस्प्ले असेंबली के कंपोनेंट और लिथियन आयन बैटरी सेल के कंपोनेंट पर लागू होती है.

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क्या मोबाइल सस्ते होंगे

अगर सस्ते नहीं हुए तो कम से कम भयंकर महंगे तो नहीं होंगे. पिछले 6 महीनों में ऐप्पल को छोड़कर हर स्मार्टफोन कंपनी अपने स्मार्टफोन के दाम 10 से 20 फीसदी बढ़ा चुकी है. बेसिक 5G स्मार्टफोन अब 15 से 20 हजार का हो गया है जो पिछले साल 10 हजार में आराम से मिलता था. जिन कंपनियों ने दाम नहीं बढ़ाए, उन्होंने रैम कम कर दी है. 20 हजार के स्मार्टफोन में 4GB रैम नजर आने लगी है. ऐसा कोविड के पहले होता था.

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मार्केट में RAM इन्फ्लेशन आई हुई है. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक 512GB मेमोरी के दाम में पिछले कुछ महीनों में 65 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. अकेले सैमसंग ने मेमोरी चिप का दाम 60 फीसदी तक बढ़ा दिया है. जो आपको लगे कि प्रोडक्शन कम हुआ है तो ऐसा नहीं है. बल्कि खपत बढ़ गई है. रैम को सुरसा की तरह निगलने वाले का नाम है AI. रैम की डिमांड पिछले 18 महीनों में तीन गुना हो गई है.

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ऐसे में इंपोर्ट ड्यूटी खत्म होने के बाद कंपनियों पर बोझ कम होगा और तेजी से बढ़ रही कीमतों में कुछ ठहराव तो देखने को मिल सकता है. 

वीडियो: स्मार्टफोन्स महंगे होने की वजह AI के लिए RAM की बढ़ती डिमांड?

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