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दिलजीत दोसांझ की 'सतलुज' को वापस लाने के लिए हरियाणा-पंजाब हाईकोर्ट में पिटीशन!

याचिकाकर्ता का कहना है कि 'सतलुज' का OTT से हटाया जाना अभिव्यक्ति की आज़ादी का उल्लंघन करता है.

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सेंसर बोर्ड 'सतलुज' पर 127 कट्स लगवाना चाहती थी.

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  • Diljit Dosanjh की फिल्म 'सतलुज' जो पहले 'Punjab 95' थी, 3 जुलाई को Zee5 पर प्रीमियर हुई और 5 जुलाई को बिना स्पष्ट कारण वहीं से हटा दी गई।
  • इस फिल्म पर रोक लगाने का मुख्य कारण सेंसर बोर्ड के 127 कट्स लगाने का सुझाव था, जिसे मेकर्स ने अस्वीकार किया तथा सुरक्षा कारण भी बताए गए।
  • इस मामले पर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में एक PIL दायर की गई है, जिसमें कंटेंट रोकने की प्रक्रिया की पारदर्शिता और फिल्म को फिर से प्लेटफॉर्म पर लाने की मांग की गई है।

Diljit Dosanjh स्टारर Satluj, जिसे पहले Punjab 95 नाम दिया गया था, 03 जुलाई को Zee5 पर प्रीमियर हुई. मगर सिर्फ दो दिन बाद यानी 05 जुलाई को इसे वहां से हटा दिया गया. ऐसा करने के पीछे कुछ ठोस कारण नहीं दिए गए. नतीजतन, सोशल मीडिया पर हंगामा शुरू हो गया. इस बीच Punjab & Haryana High Court में इस मूवी पर से रोक हटाने को लेकर एक PIL फ़ाइल कर दी गई है.

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ये याचिका पंजाब निवासी श्रवण सिंह ने दायर की, जो खुद को Zee5 का सब्सक्राइबर बता रहे हैं. उनका कहना है कि 'सतलुज' को OTT से हटाना अभिव्यक्ति की आज़ादी के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन करता है. उन्होंने सरकार से इस बाबत सवाल उठाया है कि आखिर इस मूवी को किस कानूनी आधार पर रोका गया. श्रवण की मांग है कि मामले से जुड़े अधिकारी इस फैसले के पीछे की वजह और लीगल प्रोसेस को ट्रांसपैरेंट करें. ऐसा इसलिए ताकि आम लोगों को भी पता चल सके कि आखिर इस कॉन्टेन्ट पर रोक क्यों लगी है.

श्रवण के वकील हकम सिंह ने IANS को बताया कि केंद्र सरकार ने 'सतलुज' फिल्म के इस मुद्दे पर तीन सदस्यों की कमिटी बिठाई है. बावजूद इसके, फिल्म पर रोक लगाए जाने की कोई ठोस वजह सामने नहीं आई. हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई है कि कमिटी अगले एकाध दिनों में अपना स्टेटमेंट जारी कर देगी. दूसरी तरफ, श्रवण ने मांग रखी है कि प्रशासन 'सतलुज' को जल्द-से-जल्द Zee5 पर दोबारा प्रीमियर करे. 

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वैसे, ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालरा पर आधारित 'सतलुज' का ये मामला 2022 से ही चला आ रहा है. तब हनी त्रेहान की इस मूवी को 'पंजाब 95' नाम दिया गया था. किसी भी अन्य फिल्म की तरह तब इसे भी सेंसर बोर्ड के पास भेजा गया था. मगर बोर्ड ने इसमें 127 कट्स लगाने का सुझाव दिया. मेकर्स इसके लिए तैयार नहीं हुए क्योंकि उनका मानना था कि इतनी काट-छांट के बाद फिल्म अपना असली मैसेज खो देगी. इस कारण अगले चार सालों तक फिल्म थिएटर्स में रिलीज़ नहीं हो पाई. बाद में मेकर्स ने इसे 'सतलुज' नाम के साथ Zee5 पर प्रीमियर कर दिया, जहां से ये दो दिनों में ही गायब हो गई. PTI के मुताबिक, केंद्र सरकार ने फिल्म पर रोक लगाने के पीछे सुरक्षा कारणों और फिल्म सर्टिफिकेशन का काम पूरा न होने को जिम्मेदार ठहराया है. लेकिन Zee5 या मिनिस्ट्री ऑफ इन्फॉर्मेशन एंड ब्रॉडकास्टिंग ने अपनी तरफ से इस पर रोक लगाए जाने के पीछे कोई औपचारिक बयान नहीं दिया.

वीडियो: Zee 5 से हटने के बाद भी टेलीग्राम पर देखी जा रही सतलुज? Piracy कैसे हो जाती है?

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