Apple प्रोडक्ट महंगे हैं मगर कितने महंगे. लाखों के तो हैं मगर करोड़ों के नहीं हैं. लेकिन एक ऐप्पल डिवाइस ऐसा है जो करोड़ों में बिक सकता है. ऐप्पल का पहला कंप्यूटर Apple-1 जो साल 1976 में बना था, वो 3 लाख डॉलर से 5 लाख डॉलर में बिक सकता है. इंडियन करेंसी में कन्वर्ट करें तो मीटर 4.50 करोड़ रुपये से ज्यादा में. यह मशीन उन 200 यूनिट्स में से एक है जो शुरू में बनाई गई थीं और अब भी काम कर रही हैं. ऐसी कुल मिलाकर लगभग 20 यूनिट्स ही बची हैं.
Apple का ये कंप्यूटर अनोखा है, 50 साल बाद भी 4 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत!
ऐप्पल का कंप्यूटर Apple-1 जो साल 1976 में बना था, वो 3 लाख डॉलर से 5 लाख डॉलर में बिक सकता है यानी 4.50 करोड़ रुपये से ज्यादा में.


ऐप्पल का पहला कंप्यूटर, 1976 का 'Apple-1', 15 जुलाई को न्यूयॉर्क के सोथबीज़ (Sotheby's) में नीलामी के लिए जा रहा है. जब 15 जुलाई को लाइव नीलामी होगी, तो यह चालू हालत वाली मशीन नीलामी घर की "Geek Week" सेल का हिस्सा होगी. उम्मीद है कि यह $300,000 से $500,000 के बीच बिकेगी, यानी भारतीय रुपये में 4.77 करोड़ रुपये तक.
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Apple-1 वो कंप्यूटर मॉडल है जिसे कंपनी के फाउंडर्स में से एक स्टीव वोज़नियाक ने अपने हाथों से बनाया था. अब, लगभग 50 साल बाद, कैलिफ़ोर्निया के बर्कले में 'बाइट शॉप' से खरीदी गई इस डिवाइस को अपना बनाने के लिए ऐप्पल प्रेमियों में होड़ लगने वाली है. स्टीव वोज़नियाक और स्टीव जॉब्स में कनफुजयाने की जरूरत नहीं है. ऐप्पल कंपनी को 1 April 1976 को Steve Jobs, Steve Wozniak और Ronald Wayne ने बनाया था. Wozniak या Woz ने 1985 में कंपनी छोड़ दी थी.
Apple-1 रचेगा इतिहासपिछले पचास सालों में बहुत कुछ बदल गया है. समय के साथ डिजिटल गैजेट्स भले ही अपनी अहमियत खो दें, लेकिन उनकी कीमत बढ़ती ही जा रही है. Apple-1 कंप्यूटर की शुरुआती कीमत $666.66 थी. अगर यह $500,000 में बिका, तो इसका मतलब है कि पिछले पांच दशकों में इसकी कीमत मूल कीमत से लगभग 749 गुना बढ़ गई.
बाइट शॉप का जलवाकंप्यूटिंग के इतिहास में 'बाइट शॉप' का अपना जलवा है. ये वो स्टोर जहां से यह खास Apple-1 खरीदा गया था. पॉल टेरेल ने 8 दिसंबर, 1975 को कैलिफ़ोर्निया के माउंटेन व्यू में पहली बाइट शॉप खोली थी, जो दुनिया के शुरुआती पर्सनल कंप्यूटर रिटेल स्टोर में से एक थी. टेरेल एक कंप्यूटर के शौकीन और बिज़नेसमैन थे जो आम लोगों तक पर्सनल कंप्यूटर पहुंचाना चाहते थे, जबकि उस समय होम PC का बाज़ार लगभग न के बराबर था.
स्टोर खुलने के कुछ महीनों बाद, स्टीव जॉब्स ने 'बाइट शॉप' में टेरेल से संपर्क किया और उन्हें 'Apple-1' नाम का एक सर्किट बोर्ड किट दिखाया. जॉब्स ने शुरू में इसे शौकिया लोगों के लिए खुद असेंबल करने वाली मशीन के तौर पर सोचा था, जिसमें खरीदारों को खुद ही बोर्ड पर चिप्स सोल्डर करने होते और अपना कीबोर्ड और डिस्प्ले खुद ही लाना होता. टेरेल को इसमें दिलचस्पी तो थी, लेकिन एक शर्त पर कि कंप्यूटर पूरी तरह से असेंबल किए हुए होने चाहिए. उन्होंने $500 प्रति यूनिट के हिसाब से 50 यूनिट खरीदने का वादा किया, जिसका पेमेंट डिलीवरी के समय कैश में किया जाना था.
आज 50 साल बाद भी 'बाइट शॉप' और ऐप्पल की दोस्ती जारी है.
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