बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड की फिल्मों में अक्सर आपने एजेंसियों और पुलिस को अपराधियों के फिंगरप्रिंट स्कैन करके उनकी पहचान करते देखा होगा. लेकिन फिल्मों से इतर हकीकत में ऐसा अभी तक नहीं होता था. माने पुलिस अपराधियों के फिंगरप्रिंट का रिकॉर्ड खंगाल तो सकती है मगर वो एक लंबा प्रोसेस है. अब ऐसा नहीं होगा. पुलिस और जांच एजेंसियों को चलते-फिरते फिंगरप्रिंट स्कैन करने वाला ऐप मिल गया है. 'अभिज्ञान' ऐप से पुलिस पोर्टेबल स्कैनर पर लिए गए अंगूठे के निशानों की जांच कुछ ही सेकंड में NAFIS डेटाबेस से कर सकेगी.
पुलिस को मिला 'अभिज्ञान' ऐप, अब फिल्मी स्टाइल में धरे जाएंगे क्रिमिनल
देश भर की पुलिस और जांच एजेंसियां जल्द ही 'अभिज्ञान' ऐप से लैस होंगी. ये स्कैनर 1.3 करोड़ संदिग्ध अपराधियों और दोषियों के नेशनल डेटाबेस से जुड़े होंगे. इस तकनीक के जरिए पुलिस कहीं भी अपराधियों की शिनाख्त आसानी से कर सकेगी.


देश भर की पुलिस और जांच एजेंसियां जल्द ही पोर्टेबल फिंगरप्रिंट स्कैनर से लैस होंगी. ये स्कैनर 1.3 करोड़ संदिग्ध अपराधियों और दोषियों के नेशनल डेटाबेस से जुड़े होंगे. पुलिसकर्मी किसी भी संदिग्ध को कहीं भी, यहां तक कि सड़क पर भी रोककर उनके अंगूठे के निशान ले सकेंगी. फिंगरप्रिंट लेते ही तुरंत अपने स्मार्टफोन पर उनके खिलाफ किसी भी लंबित आपराधिक रिकॉर्ड की जांच कर सकेंगी. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो ने 'अभिज्ञान' ऐप को तैयार किया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 19 जून, 2026 को इसे लॉन्च किया है.
- 'अभिज्ञान' ऐप 'नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम' (NAFIS) से जुड़ा है, जो एक सेंट्रलाइज़्ड प्लैटफ़ॉर्म पर आरोपियों, दोषियों और जेल में बंद लोगों के फ़िंगरप्रिंट स्कैन को स्टोर करता है.
- ऐप से फ़िंगरप्रिंट को NAFIS डेटाबेस से 35 सेकंड में मैच किया जा सकता है. ऐप की मदद से सड़कों पर गाड़ियों की रूटीन चेकिंग के दौरान, किसी भी संदिग्ध व्यक्ति का बायोमेट्रिक स्कैन करके अपराधों में वांछित लोगों की पहचान की जा सकती है.
- फील्ड अधिकारी कुछ ही सेकंड में संदिग्ध का आपराधिक इतिहास जान सकते हैं.
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अभी, NAFIS डेटाबेस से फिंगरप्रिंट्स की स्कैन करने की सुविधा देश भर के पुलिस स्टेशनों और ज़िला मुख्यालयों में लगे 1,556 वर्कस्टेशन के ज़रिए ही उपलब्ध है. मौजूदा प्रोसेस में किसी व्यक्ति को वर्कस्टेशन पर लाना होता है, ताकि उसके फिंगरप्रिंट्स का डेटाबेस से मिलान किया जा सके. NAFIS डेटाबेस में लगभग 9.91 लाख नशीले पदार्थों से जुड़े अपराधियों और 3.65 लाख मानव तस्करी के मामलों का रिकॉर्ड है. साथ ही. इसमें जेलों का विस्तृत डेटाबेस भी शामिल है. आसान भाषा में समझ लीजिएक कि जल्द ही सड़क से भी अपराधी की पहचान करके उसको धरा जा सकेगा.
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