एआई RAM को निगल रहा और RAM स्मार्टफोन मार्केट को. स्मार्टफोन मार्केट में इतनी बड़ी गिरावट आज से दशक भर पहले दिखी थी. स्मार्टफोन की कीमतों में भारी उछाल का असर अब शिपमेंट पर भी दिखने लगा है. माने जब ग्राहक फोन खरीदेगा ही नहीं तो शिपमेंट कम होगा ही. सितंबर 2026 को समाप्त हुई तिमाही (Q3 2026) में भारत के स्मार्टफोन शिपमेंट में पिछले साल की तुलना में 26% की भारी गिरावट दर्ज की गई और कुल शिपमेंट गिरकर 3.58 करोड़ (35.8 मिलियन) यूनिट पर आ गया. ये पिछले एक दशक में इस तिमाही का सबसे निचला स्तर है जबकि त्योहारी सीजन चालू है.
स्मार्टफोन शिपमेंट में एक दशक की सबसे बड़ी गिरावट, इस कंपनी को तगड़ा नुकसान
ऑनलाइन बिक्री में आई गिरावट का सबसे बड़ा फटका चीनी स्मार्टफोन निर्माताओं पर पड़ा. Q3 2025 में इन ब्रांड्स की कुल बाजार हिस्सेदारी 75% थी, जो Q3 2026 में घटकर 68% रह गई.

स्मार्टफोन शिपमेंट कम होने का सबसे बड़ा असर ऑनलाइन बिक्री पर दिखा है. सितंबर का महीना पारंपरिक रूप से बड़ी ऑनलाइन सेल के लिए इन्वेंट्री यानी स्टॉक तैयार करने का समय होता है. लेकिन इस बार महंगे दाम, सीमित किफायती मॉडल (Affordable SKUs) और ऑफर्स में कमी के कारण ऑनलाइन चैनलों का पारंपरिक त्योहारी फायदा कमजोर पड़ गया.
ऑनलाइन बिक्री में आई गिरावट का सबसे बड़ा फटका चीनी स्मार्टफोन निर्माताओं पर पड़ा. Q3 2025 में इन ब्रांड्स की कुल बाजार हिस्सेदारी 75% थी, जो Q3 2026 में घटकर 68% रह गई. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा नुकसान वीवो को हुआ है. बार-बार दाम बढ़ने और एंट्री-लेवल मॉडलों की कमी के कारण टॉप-5 ब्रांड्स में वीवो की शिपमेंट में सबसे ज्यादा (सालाना आधार पर 34%) गिरावट दर्ज की गई. इसके अलावा, दूसरे चायनीज ब्रांड जैसे ओप्पो (Oppo) और शाओमी (Xiaomi) को भी बढ़ती कीमतों, बड़े रिटेलर्स की बेरुखी और कमजोर रैम-स्टोरेज कॉन्फ़िगरेशन के कारण शिपमेंट में नुकसान उठाना पड़ा है. वीवो को इंडियन मार्केट में नंबर वन से दूसरे नंबर पर आ गया है.
स्मार्टफोन शिपमेंट में दशक की सबसे बड़ी गिरावट के और चीनी कम होने का फायदा साउथ कोरियन सैमसंग को मिला है. सैमसंग ने मजबूत प्रीमियम पोर्टफोलियो, एक्सचेंज बेनिफिट्स और लंबे समय के फाइनेंसिंग विकल्पों के दम पर 67 लाख (6.7 मिलियन) यूनिट शिप करते हुए, Q1 2024 के बाद पहली बार नंबर-1 का स्थान वापस हासिल कर लिया. दरअसल सैमसंग हर साल जुलाई-अगस्त में अपनी फोल्ड सीरीज के नए डिवाइस लॉन्च करता है. इस साल तो उसने एकदम नई डिजाइन वाला पासपोर्ट साइज फोल्ड भी लॉन्च किया जिसका फायदा साफ दिख रहा है.
ऐप्पल ने रियलमी (Realme) को पीछे छोड़ते हुए टॉप-5 ब्रांड्स में अपनी जगह बना ली है. हालांकि इसमें सबसे बड़ा फैक्टर आईफोन 17 की कीमतों का बढ़ना भी रहा है. पिछले 6 महीने से पता था कि ऐप्पल आईफोन 17 की कीमत बढ़ाने वाला है. इसके चलते सारे सेल्स चैनलों ने दबाकर स्टॉक बढ़ाया. रिसर्च फर्म 'ओमडिया' (Omdia) के अनुसार आईफोन 17 की बम्पर डिमांड के चलते कंपनी ने 39 लाख (3.9 मिलियन) यूनिट्स की शिपिंग की. तिमाही के अंत में आए आईफोन 18 प्रो और प्रो मैक्स (iPhone 18 Pro & Pro Max) को बैंक कैशबैक, एक्सचेंज बोनस और नो-कॉस्ट ईएमआई का भी खूब फायदा मिला है.
ये भी पढ़ें: Apple ने दिया जोर का झटका, iPhone 17 का दाम अचानक बहुत बढ़ा दिया
ई-कॉमर्स पर असर दिखास्मार्टफोन के शिपमेंट में भयानक गिरावट दिखी तो बिकवाली में भी असर साफ नजर आया. ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए त्योहारी सीजन का पहला राउंड अच्छा नहीं रहा. इस साल भारत की त्योहारी ई-कॉमर्स बिक्री की शुरुआत थोड़ी सुस्त रही है. सेल के दौरान ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) पिछले साल के 33,200 करोड़ रुपये के मुकाबले काफी घट गई है. लोगों ने सेल में इंटरेस्ट नहीं दिखाया.
इस साल भारत की त्योहारी ई-कॉमर्स बिक्री की शुरुआत थोड़ी सुस्त रही है. सेल के दौरान ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) पिछले साल की समान अवधि के 33,200 करोड़ रुपये से घटकर 29,800 से 30,900 करोड़ रुपये के बीच रहने का अनुमान है. मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, पहले चार दिनों में ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) में लगभग 7 से 10 प्रतिशत की सालाना गिरावट रहने का अनुमान है. पिछले साल GMV जहां 33,200 करोड़ रुपये था, वहीं इस साल मीटर गिरकर 29,800 से 30,900 करोड़ रुपये रह सकता है.
आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू ई-कॉमर्स और ऑनलाइन मार्केटप्लेस जैसे Amazon, Flipkart, Myntra आदि पर इस्तेमाल होने वाला एक बहुत ही महत्वपूर्ण वित्तीय मीटर है, जो बताता है कि माल की कितनी बिक्री हुई. आसान शब्दों में कहें तो किसी निश्चित समयावधि जैसे महीने या साल में किसी प्लेटफॉर्म पर बिकने वाले सभी सामानों की कुल मौद्रिक या बिक्री वैल्यू (Total Sales Value) को GMV कहा जाता है. जहां पिछले साल सेल के स्टार्ट होते ही आईफोन और सैमसंग के फोन आउट ऑफ स्टॉक हो जाते थे. इस साल सेल के दरमियान और बाद में भी आसानी से उपलब्ध थे. इस साल की सेल का मतलब था फोन जितने में लॉन्च हुआ था, उतने में मिलेगा. इसी को चलते ग्राहकों ने अपने हाथ नहीं खोले.
ओमडिया अनुसार, 2026 के बाद साल 2027 में भी बाजार में और गिरावट आने की उम्मीद है. बढ़ती कीमतें ब्रांड्स के लिए एक बड़ी चुनौती बने रहेंगे. कम से कम 2027 की पहली छमाही तक को कीमतों में कोई राहत मिलने से रही.
वीडियो: स्मार्टफोन्स महंगे होने की वजह AI के लिए RAM की बढ़ती डिमांड?













