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डिजिटल वॉलेट 'SD Pay' ने लाखों यूजर्स के ₹1200 करोड़ ठगे, पीड़ितों ने ही पीड़ितों का पैसा डुबाया

गुजरात के SD Pay डिजिटल वॉलेट ऐप ने मोटे ब्याज और रेफरल, कैशबैक का लालच देकर 15 लाख लोगों को ठगा. तकरीबन 1200 करोड़ रुपये के ठगी के इस एकदम अनोखे मामले में मल्टी लेवल मार्केटिंग यानी MLM के साथ सेमिनार, ऑनलाइन मीटिंग और जूम कॉल का सहारा लिया गया.

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डिजिटल वॉलेट 'SD Pay' ने देशभर में ऐसे की 1,200 करोड़ की धोखाधड़ी

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  • गुजरात के वडोदरा में SD Pay डिजिटल वॉलेट के जरिये 15 लाख से ज्यादा लोगों को 1,200 करोड़ रुपये की ठगी का सामना करना पड़ा, जिसकी एफआईआर 2 सितंबर 2026 को दर्ज की गई।
  • ठगी की पृष्ठभूमि में MLM मॉडल था जिसमें निवेशकों को उंचे ब्याज दर और रेफरल कैशबैक का वादा कर अक्टूबर 2026 तक 15 लाख से ज्यादा लोग ऐप से जुड़ गए।
  • पुलिस ने 12 सितंबर 2026 को मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया और अचल संपत्तियों की कुर्की की कार्रवाई शुरू की, जबकि जांच में अब तक 1.86 करोड़ रुपये ही जब्त हुए हैं।

गुजरात के वडोदरा की रहने वाली 48 साल की एक महिला टीचर अकेले अपने कॉलेज में पढ़ने वाले बेटे की परवरिश करती हैं. उनके ऊपर बुजुर्ग मां की भी जिम्मेदारी है. साल 2026 के मध्य तक उनके डिजिटल वॉलेट में 50 लाख रुपये का बैलेंस दिख रहा था. लेकिन ये रकम सिर्फ स्क्रीन पर थी, क्योंकि वॉलेट बंद होने के कारण वो अपना पैसा निकाल नहीं सकतीं. वो अकेली नहीं हैं जिनके साथ ऐसा हो रहा. सावरकुंडला के एक 32 वर्षीय कंप्यूटर ऑपरेटर, एक पुलिसकर्मी की पत्नी सहित कुल 876 लोग ऐसे हैं जिनके साथ डिजिटल वॉलेट के नाम पर 1,200 करोड़ रुपये की ठगी हुई है.

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गुजरात के SD Pay डिजिटल वॉलेट ऐप ने मोटे ब्याज और रेफरल, कैशबैक का लालच देकर 15 लाख लोगों को ठगा. ठगी के इस एकदम अनोखे मामले में मल्टी लेवल मार्केटिंग यानी MLM के साथ सेमिनार, ऑनलाइन मीटिंग और जूम कॉल का सहारा लिया गया.

क्या है SD Pay ऐप?

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक गुजरात के धवल पटेल ने साल 2024 में SD Pay या Apna Pay का वॉलेट ऐप लॉन्च किया. ऐप में वो तमाम फीचर्स थे जो एक वॉलेट ऐप में होते हैं जैसे बिल का भुगतान या रिचार्ज. लेनदेन पर कैशबैक तो था ही, लेकिन ऐप के माध्यम से निवेश करने पर तगड़े रिटर्न का वादा भी. आपको लगेगा कि कितना रिटर्न? तो पुलिस के मुताबिक, सूरत के एक व्यक्ति ने महज 1,000 रुपये निवेश किए थे और उसे कथित तौर पर 1 करोड़ रुपये तक का फायदा हुआ. ये दिखाकर उसने अपने नेटवर्क में करीब 1.6 लाख निवेशकों को जोड़ लिया था. इससे इस स्कीम का स्केल समझा जा सकता है.

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SD Pay
SD Pay या Apna Pay (तस्वीर: Google Play Store)
मल्टी लेवल मार्केटिंग स्टाइल  

पुलिस के मुताबिक, निवेश की रकम के हिसाब से लोगों को रोजाना 0.15 से 0.30 फीसदी तक ब्याज दिया जाता था. शुरुआत में लोगों को रेगुलर पैसे मिलने लगे तो उनका भरोसा बढ़ता गया. इसके बाद उन्होंने अपने परिवार, दोस्तों और जानने वालों को भी इस ऐप से जोड़ना शुरू कर दिया. उदाहरण के लिए वडोदरा की महिला टीचर के मुताबिक उन्हें रोजाना 25 हजार रुपये तक ब्याज और रेफरल कैशबैक मिलने लगा था. इसी वजह से उन्हें लगा कि उनका निवेश सुरक्षित है और इस ऐप के जरिए मोटी कमाई हो सकती है.

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महिला टीचर ने जब सोशल मीडिया पर SD Pay में निवेश से कमाई की पोस्ट शेयर की तो उनके जानने वाले भी इस ऐप से जुड़ने लगे. उनके जरिए परिवार के 11 सदस्य और 20 सहकर्मियों समेत कुल 31 लोगों ने निवेश किया. इन लोगों ने कुल मिलाकर करीब 42 लाख रुपये लगाए. इनमें उनकी विधवा बहन, 70 साल से ज्यादा उम्र की मां और भाई भी शामिल थे. महिला के मुताबिक, अकेले उनके रेफरल नेटवर्क के जरिए आगे करीब 800 लोग और इस स्कीम से जुड़ गए थे.

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इसी तरीके को मल्टी लेवल मार्केटिंग या MLM कहा जाता है जिसमें एक के बाद एक मेंबर को जोड़ना होता है. इस स्कीम में पहले लेवल पर रेफरल से जुड़ने वाले लोगों को 30 फीसदी तक भुगतान देने का वादा था, जबकि 10वें से 15वें लेवल तक यह रकम 3 फीसदी बताई गई थी. नतीजतन करीब 15 लाख यूजर्स इस ऐप से जुड़ गए थे.

कैसे खुली वॉलेट ठगी?

मार्च 2026 तक इस स्कीम में पैसों का आना कम होने लगा. नए निवेशकों की संख्या घटने के साथ ही पुराने निवेशकों को ब्याज देना भी मुश्किल हो गया. इसके बाद आरोपियों ने निवेशकों को उनके पैसे लौटाने के बजाय कंपनी के शेयर देने शुरू कर दिए. निवेशकों को बताया गया कि कंपनी जल्द ही अपना IPO लाने वाली है और शेयर बाजार में लिस्ट होने के बाद इन शेयरों की कीमत बढ़ जाएगी. वडोदरा की महिला टीचर ने बताया कि उन्हें 40 लाख रुपये के शेयर लेने के लिए मजबूर किया गया. जब उन्होंने इनकार किया तो उनसे कहा गया कि अगर शेयर नहीं लिए तो उन्हें कोई पैसा वापस नहीं मिलेगा. 

रिपोर्ट के मुताबिक, 6 जून को सावरकुंडला के एक 32 वर्षीय कंप्यूटर ऑपरेटर ने शिकायत की थी कि ऐप के जरिए उसके साथ 2 लाख रुपये की धोखाधड़ी हुई है. हालांकि, आरोपियों ने शिकायत की जानकारी मिलने के बाद उसे पैसे लौटा दिए, जिसके बाद शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत वापस ले ली. लेकिन पुलिस ने अपनी जांच जारी रखी.

पुलिस को इस मामले में एक और बड़ी शिकायत एक पुलिसकर्मी की पत्नी की ओर से मिली, जिन्होंने ऐप में 10 लाख रुपये गंवाने की शिकायत की थी. इसके बाद 2 सितंबर, 2026 को अमरैली साइबर क्राइम पुलिस ने SD Pay से जुड़े प्रमोटर्स, डायरेक्टर्स और अन्य आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की. जांच में सामने आया कि निवेश के लिए शुरुआती रकम नकद के जरिए प्राइवेट कूरियर यानी अंगड़िया से पहुंचाई जा रही थी, जबकि रिफंड बैंक ट्रांसफर के जरिए किया जा रहा था. इससे पुलिस को शक हुआ कि इसके पीछे कोई बड़ा वित्तीय घोटाला हो सकता है. 

जांच के दौरान पुलिस को एक कंपनी शिव धर्ती कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड के यस बैंक खाते का पता चला. नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर इस कंपनी के खिलाफ अलग-अलग राज्यों से ऑनलाइन धोखाधड़ी की चार शिकायतें भी दर्ज थीं. बाद में पुलिस को पता चला कि इसी ग्रुप के खिलाफ सितंबर 2025 में गुजरात CID क्राइम में भी FIR दर्ज की गई थी. हालांकि, उस समय निवेशक अपना पैसा निकाल पा रहे थे, इसलिए कोई खुलकर शिकायत करने के लिए आगे नहीं आया. 

पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर की शुरुआत तक 573 पीड़ितों ने करीब 24.42 करोड़ रुपये के नुकसान की शिकायत की थी. 31 अक्टूबर तक शिकायत करने वाले पीड़ितों की संख्या बढ़कर 876 हो गई और कुल नुकसान 37.42 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. इसके बाद पुलिस ने अलग-अलग राज्यों से पांच लोगों को गिरफ्तार किया. 12 सितंबर को मुख्य आरोपी धवल पटेल और हीरेन शाह को गुजरात और ओडिशा पुलिस की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार किया. वहीं, गुजरात के नरेंद्रसिंह झाला और राजस्थान के मुकेश लोढ़ी समेत कुछ अन्य आरोपी फरार बताए गए हैं.

तगड़ा रिटर्न कहां से दे रहे थे?

अमरैली पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) के मुताबिक, SD Pay ऐप को 15 लाख से ज्यादा लोगों ने डाउनलोड किया था. इनमें से 6 लाख 52,831 बैंक खातों के जरिए करीब 1,211 करोड़ रुपये का निवेश किया गया. ये ऐप का आंकड़ा है क्योंकि कई लेनदेन नगद में भी हुए तो कुल रकम बढ़ भी सकती है. जांचकर्ताओं के मुताबिक, इस पूरे मॉडल में किसी तरह की असली कमाई हो ही नहीं रही थी. न तो कंपनियां कोई सामान बना रही थीं और न ही कोई सर्विस देकर इनकम कमा रही थीं. पुराने निवेशकों को ब्याज और रिटर्न देने के लिए नए लोगों से आने वाले पैसे का इस्तेमाल किया जा रहा था. मतलब इधर का निकालो और उधर डालो.

सबसे दुखद पहलू

जांचकर्ताओं ने अब तक करीब 95 एजेंटों की पहचान की है, जो गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, दिल्ली, मध्य प्रदेश और चंडीगढ़ समेत कई राज्यों में इस नेटवर्क को चला रहे थे. पुलिस ने छह कंपनियों के 38 बैंक खाते और उनके 16 डायरेक्टर्स के 72 बैंक खातों की भी पहचान की है. लेकिन पुलिस अभी तलक महज 1.86 करोड़ रुपये की रकम जब्त कर पाई है. आरोपियों की अचल संपत्तियों का पता लगाने और उन्हें कुर्क करने की प्रक्रिया भी जारी है.

इस पूरे मामले में सबसे दुखद पहलू यह है कि ठगी का शिकार होने वाले कई लोग खुद भी दूसरों को इस स्कीम से जोड़ चुके थे. अभी तो सिर्फ 876 लोग सामने आए हैं. 

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