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ऑनलाइन शॉपिंग के नियम सरकार ने बदल दिए, अब कंपनियां ये झोल ना कर पाएंगी

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर सामान खरीदते समय अब ग्राहकों को कीमत, डिस्काउंट, सर्च रिजल्ट और प्रोडक्ट से जुड़ी जानकारी ज्यादा साफ तरीके से मिलेगी. उपभोक्ता मामलों के विभाग ने ई-कॉमर्स के लिए उपभोक्ता संरक्षण नियमों में बड़ा बदलाव कर दिया है.

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ई-कॉमर्स कंपनियों पर सरकार सख्त

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  • 1 जनवरी 2027 से उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) (संशोधन) नियम, 2026 लागू होंगे, जिनमें ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर कीमत, डिस्काउंट, सर्च रिजल्ट और प्रोडक्ट जानकारी स्पष्ट करना अनिवार्य होगा।
  • सरकार ने ई-कॉमर्स कंपनियों में ग्राहकों को गुमराह करने और डिस्काउंट की गलत जानकारी देने की घटनाओं को रोकने के लिए नए नियम बनाए हैं, जिसमें पुरानी कीमत की सीमा और प्रमोशन की स्पष्टता शामिल है।
  • नए नियमों के तहत कंपनियों को नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन से जुड़ना होगा और छिपे हुए चार्जेज की स्पष्ट जानकारी देनी होगी, जिससे उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।

अगर आप ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं तो 1 जनवरी 2027 की तारीख नोट कर लीजिए. 1 जनवरी 2027 से E-Commerce के नए नियम (Govt tightens e-commerce rules on discounts) लागू होंगे. ई-कॉमर्स पर सरकार की बड़ी सख्ती होने वाली है. अब इन कंपनियों के लिए ग्राहक को गुमराह करना भारी पड़ेगा.

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ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर सामान खरीदते समय अब ग्राहकों को कीमत, डिस्काउंट, सर्च रिजल्ट और प्रोडक्ट से जुड़ी जानकारी ज्यादा साफ तरीके से मिलेगी. उपभोक्ता मामलों के विभाग ने ई-कॉमर्स के लिए उपभोक्ता संरक्षण नियमों में बदलाव किया है और विभाग ने 'उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) (संशोधन) नियम, 2026' पेश कर दिए हैं. 

डार्क पैटर्न पर टॉर्च पड़ेगी

# सबसे बड़ा बदलाव डिस्काउंट दिखाने पर होगा. डिस्काउंट दिखाने पर पुरानी के साथ नई कीमत भी बतानी होगी. माने अगर किसी प्रोडक्ट की कीमत 100 रुपये है और उसके ऊपर 20 फीसदी डिस्काउंट है तो ये भी बताना होगा कि पुरानी कीमत क्या थी. माने पहले कीमत 90 रुपये थी और उस पर 11 फीसदी डिकाउंट था तो बात तो वही हुई. तब भी प्रोडक्ट 80 रुपये में मिलता और अभी भी 80 में मिल रहा. एक्स्ट्रा तो कुछ हुआ नहीं. ये अब डिस्प्ले करना होगा.

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# किसी भी प्रोडक्ट की पुरानी कीमत पर भी लिमिट होगी. पुरानी कीमत वही होगी जो पिछले 30 दिनों में सबसे कम थी. माने 6 महीने पुरानी कीमत दिखाकर और फिर उसपर ऑफर्स लगाकर चूना लगाना बंद होगा.

# प्रोडक्ट के सर्च रिजल्ट में भी झोल नहीं चलेगा. माने जो मैंने कोई प्रोडक्ट उसके नाम से सर्च किया या उसके ब्रांड नेम से, तो सबसे पहले वही दिखाना होगा. अब तो कई बार हम कोई प्रोडक्ट सर्च करते हैं तो उसको छोड़कर उससे मिलते-जुलते कई प्रोडक्ट स्क्रीन पर दिखाने लग जाते हैं.

# अगर कोई प्रोडक्ट प्रमोट किया जा रहा, तो उसके बारे में साफ-साफ बताना होगा. अभी तो ऐसा होता है कि स्पॉन्सर वाला प्रोडक्ट सबसे ऊपर दिखता है, लेकिन प्रमोशन वाला टैग एकदम छोटे अक्षरों में लिखा होता है.

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# प्रोडक्ट की वारंटी, रिटर्न, रिफ़ंड को लेकर हर ऐप का अपना हिसाब किताब है. आमतौर पर संपट ही नहीं पड़ता कि प्रोसेस क्या है. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. प्रोडक्ट रिटर्न होगा या रिप्लेस. वारंटी कौन कवर करेगा, ये भी साफ बताना होगा. अगर किसी प्रोडक्ट की एक्सपायरी डेट है तो उसकी जानकारी भी बड़े अक्षरों में देनी होगी.

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# अगर कोई प्रोडक्ट देश के बाहर से इम्पोर्ट हुआ है तो कहां से आया ये बताना होगा. इम्पोर्ट किस कंपनी ने किया, उसकी जानकारी भी देना होगी.

# हर E-commerce कंपनी को National Consumer Helpline (NCH) से जुड़ना होगा.

# फाइनल बिल में दुनिया जहान के छिपे हुए चार्ज नहीं जोड़े जा सकेंगे. माने ऑफर्स चार्ज, सेफ पैकिंग चार्ज, हैंडलिंग चार्ज जैसे चार्ज अगर लगाने हैं, तो वो पहले ही बताने होंगे.

बोले तो ई-कॉमर्स कंपनियां जो कान इधर से पकड़कर उधर से पकड़कर वसूली करती हैं. उस पर लगाम लगेगी.  

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