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शेयर बाजार में भारी गिरावट, मिनटों में डूब गए निवेशकों के 5 लाख करोड़

Share Market News: कच्चे तेल में जोरदार तेजी और निवेशकों का आईपीओ के प्रति बढ़ते रुझान का असर शेयर बाजार पर दिख रहा है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन वजहों से बाजार में गिरावट आई है. इसके अलावा ईरान युद्ध और भड़कने से भी बाजार में चिंता बढ़ी है

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मध्य पूर्व में युद्ध बढ़ने से शेयर बाजार के लिए चुनौतियां और भी गंभीर होती जा रही हैं (फोटो क्रेडिट: Aaj Tak)

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  • भारतीय शेयर बाजार में 11 अगस्त को सेंसेक्स लगभग 740 अंक गिरकर 74,160 और निफ्टी 264 अंक गिरकर 23,231 पर आ गया, जिसमें कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज हुई।
  • ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में वृद्धि के कारण निवेशकों में चिंता बढ़ी, जिसने बाजार में गिरावट उत्पन्न की।
  • बाजार गिरावट से कुल मार्केट कैप 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक घटा, जबकि निवेशक आईपीओ में रुचि बढ़ा रहे हैं और भविष्य में तेल कीमतों और बॉन्ड यील्ड पर निगाहें बनी रहेंगी।

शुक्रवार 11 अगस्त को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट आ गई. बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में लगभग 1% की गिरावट दर्ज की गई . इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 740 अंक से अधिक गिरकर 74,160 पर आ गया, जबकि निफ्टी 264 अंक गिरकर 23,231 अंक पर पहुंच गया.

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सेंसेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, इंडिगो, टाटा स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट और एक्सिस बैंक के शेयरों में देखने को मिली. शुरुआती कारोबार में इन शेयरों की कीमतों में करीब 2% की गिरावट देखने को मिली. वहीं एलएंडटी, एटर्नल, कोटक महिंद्रा बैंक, टाइटन, सन फार्मा और एचडीएफसी बैंक के शेयरों में 1% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. इसके विपरीत, टेक महिंद्रा और इंफोसिस के शेयरों में 1% तक की बढ़त देखी गई.

मिनटों में निवेशकों के डूबे 5 लाख करोड़! 

सभी क्षेत्रीय सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई, निफ्टी रियल्टी में 3.5% से अधिक और निफ्टी मेटल में लगभग 3% की गिरावट आई. निफ्टी ऑटो, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और कई अन्य सूचकांकों में 1-2% की गिरावट देखी गई.

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इस गिरावट के कारण बाजार बीएसई पर सूचीबद्ध सभी कंपनियों के कुल मार्केट कैप में खुलने के कुछ ही मिनटों के भीतर 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की कमी आई और यह घटकर 478 लाख करोड़ रुपये रह गया.

हालांकि दोपहर 12 बजे के आसपास शेयर बाजार में निचले स्तरों से कुछ रिकवरी देखने को मिली. इस दौरान सेंसेक्स करीब 400 अंक गिरकर 75 हजार 500 अंक के आसपास कारोबार कर रहा था.

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शेयर बाजार में भारी गिरावट क्यों आई?

शेयर बाजार में भारी गिरावट की 4-5 बड़ी वजहें हैं. ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध और भड़क गया है. ईरान समर्थित हूतियों ने 10 सितंबर को यमन के मोचा बंदरगाह पर कब्ज़ा कर लिया है. इसके बाद ईरान और अमेरिका के बीच लड़ाई तेजी से बढ़ गई . अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी कि ईरान ईरान के बुरी तरह क्षतिग्रस्त नतान्ज़ यूरेनियम संवर्धन संयंत्र के पास स्थित पिकैक्स माउंटेन पर हमला कर सकता है.

वहीं, कच्चे तेल की कीमतें कई महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं हैं. ब्रेंट क्रूड वायदा मई के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया और यह 6% से ज्यादा बढ़कर 108 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गया. अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड वायदा मई के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गया.

इसके अलावा, 10 साल वाले अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 4.97% हो गई, जो साल 2023 के अंत के बाद का उच्चतम स्तर है. निवेशक अब चिंतित हैं कि कहीं बॉन्ड यील्ड 5% के महत्वपूर्ण स्तर को पार न कर जाए. तीन साल बॉन्ड यील्ड 5% के पार पहुंच गई थी. इसी तरह भारतीय रुपये में गिरावट शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 27 पैसे गिरकर 95.79 पर आ गया.

बाजार की गिरावट की एक और बड़ी वजह आईपीओ है. जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के वीके विजयकुमार के मुताबिक भारत का तेजी से बढ़ता आईपीओ मार्केट आजकल निवेशकों को खूब भा रहा है. उन्होंने बताया कि भारी ओवरसब्सक्रिप्शन और आकर्षक लिस्टिंग लाभ ने लाखों निवेशकों को आईपीओ की ओर आकर्षित किया है. उन्होंने आगे कहा, "इससे शेयर बाजार की जगह लोग आईपीओ में खूब पैसा लगा रहे हैं."

11 सितंबर को 8 कंपनियों के आईपीओ खुले हैं. इनमें रेंटोमोजो, मानिका प्लास्टेक, वीगलैंड डेवलपर्स, मणिपाल पेमेंट एंड आइडेंटिटी सॉल्यूशंस, करमतारा इंजीनियरिंग, एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी (इंडिया), स्टीमहाउस इंडिया और एलसीसी प्रोजेक्ट्स के पहले सार्वजनिक इश्यू शामिल हैं.

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आगे बाजार का भविष्य कैसा रहेगा?

मध्य पूर्व में युद्ध बढ़ने से शेयर बाजार के लिए चुनौतियां और भी गंभीर होती जा रही हैं. जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के वीके विजयकुमार का कहना है कि ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 108 डॉलर तक पहुंच गई है. उन्होंने आगे कहा कि अगर यह उच्च कीमत बनी रहती है या इससे भी बढ़ जाती है, तो भारत की जीडीपी वृद्धि और कंपनियों की आय पर इसका काफी असर पड़ेगा. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में वृद्धि भी एक और बड़ी चुनौती है.

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