Google की हाल ही में लॉन्च हुई पिक्सल 11 सीरीज देखकर एक बात तो समझ आ गई कि कंपनी आपके फोन को एक ऑपरेटिंग सिस्टम से ज्यादा एक इंटेलिजेंस सिस्टम में बदलने वाली है. अगले कुछ सालों के अंदर आपके एंड्रॉयड डिवाइस बहुत समझदार होने वाले हैं. जिनी तो हुकुम मेरे आका तभी बोलता है जब वो बर्तन से बाहर आता है लेकिन गूगल का जेमिनी तो बिना आपके बोले ही सब समझने वाला है. गूगल का Gemini Intelligence कई कमाल के फीचर्स के साथ आने वाला है, उसी में से एक है रैम्बलर (Google Rambler).
टाइपिंग का नया तरीका, बस बोलते जाइए रैम्बलर बिना गलती लिखता जाएगा
Google Rambler Google के Gboard (कीबोर्ड ऐप) का एक AI-पावर्ड वॉइस डिक्टेशन टूल है. पारंपरिक (Traditional) वॉइस टाइपिंग केवल बोले गए शब्दों को हूबहू टाइप करती है. माने जैसे लगभग के लगभग लिखेगी या आसपास. लेकिन Rambler इससे भी बहुत बढ़िया लिख सकता है.

गूगल रैम्बलर Google के Gboard (कीबोर्ड ऐप) का एक AI-पावर्ड वॉइस डिक्टेशन टूल है. आप कहोगे कि वो तो पहले से कीबोर्ड में होता है. होता है लेकिन वो मशीनी अंदाज में काम करता है. पारंपरिक (Traditional) वॉइस टाइपिंग केवल बोले गए शब्दों को हूबहू टाइप करती है. माने जैसे लगभग के लगभग लिखेगी या आसपास. लेकिन रैम्बलर भईया इसकी जगह अल्ले-पल्ले भी लिख सकता है.
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आप कहोगे कि ऐसे कैसे लिखेगा. तो जनाब ये यूजर यानी मेरे लिखने और बोलने के तरीके को समझेगा और जल्द ही सीख जाएगा. अब आप और हम कोई वक्ता तो हैं नहीं, मतलब बोलते समय अटक जाते हैं. अरे, वो, 'अम्म', 'अह', निकल ही जाता है. लेकिन रैम्बलर जी भाषा की इन रुकावटों (filler words) को अपने आप हटा देते हैं.

टेक्स्ट टाइप होने के बाद आप वॉइस कमांड देकर उसमें बदलाव कर सकते हैं, जैसे "इसे और प्रोफेशनल बनाओ" या "शनिवार की जगह रविवार कर दो". ये बोलते समय भाषाओं के बदलाव को पहचान कर सही टेक्स्ट तैयार कर सकता है. कमाल की बात ये है कि इंटरनेट न होने पर भी यह बुनियादी स्पेलिंग, पंक्चुएशन (विराम चिह्न) और क्लीनअप काम पूरा करता है.
रैम्बलर के साथ, आपको बात शुरू करने से पहले अपने शब्दों को एकदम सही करने की चिंता करने की ज़रूरत नहीं है. आप तो बस बोलना स्टार्ट करो रैम्बलर जरूरी बातों को चुनकर उन्हें एक छोटे और साफ मैसेज में बदल देगा. जेमिनी कीबोर्ड का ये फीचर जर्मन, अरेबिक, फ्रेंच, इंग्लिश, हिन्दी और भारत की कई दूसरी भाषाओं को सपोर्ट करता है.
ये थोड़ा दुखी करने वाला काम हुआ. फिलहाल तो ये फीचर गूगल पिक्सल 11 सीरीज के साथ ही चलता है. यहां भी अभी टोकन वाला सिस्टम है. माने कुछ इस्तेमाल के बाद पैसे देने पड़ते हैं. लेकिन जैसा की टेक में होता है. यहां तकनीक एक के कब्जे में नहीं रहती है. जल्द ही सभी के पास आ ही जाएगी. आप कहोगे अभी क्यों बताया. जनाब भविष्य कैसा है वो बताने के लिए.
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