Smartphone इंडस्ट्री के बारे में माना जाता है कि यहां सिर्फ अपग्रेड होते हैं. कैमरे का मेगापिक्सल अपग्रेड होकर दोहरे शतक पर पहुंच गया. रैम 12 जीबी हो चली है. स्टोरेज 1 TB और डिस्प्ले अपग्रेड होकर 144 हर्ट्ज हो चला है. ऐसे में जब फोन में एआई आया तो लगा कि अब तो सबसे बड़ा अपग्रेड आएगा. लेकिन इधर तो उल्टा हो रहा है. AI की वजह से स्मार्टफोन में तगड़ा डाउनग्रेड आया है. पांच साल जितने पुराने फोन वापस आ गए हैं. मगर दाम दोगुना हो गया है. मार्केट में नए-नए स्मार्टफोन आने का इंतजार करने वाले मोबाइल लवर्स के लिए ये वक्त बिल्कुल अच्छा नहीं है.
AI नए-नए स्मार्टफोन के प्रेमियों का दुश्मन तो नहीं?
AI की वजह से स्मार्टफोन में तगड़ा डाउनग्रेड आया (4gb smartphones are back) है. पांच साल जितने पुराने फोन वापस आ गए हैं. मगर दाम दोगुना हो गया है. 4GB रैम वाले फोन मार्केट में वापस आ गए हैं मगर दाम दोगुना होकर 20 हजार से ऊपर चला गया है.


कल यानी 30 जून को लॉन्च हुए OnePlus N6 पर नजर डालिए. 8000mAh बैटरी वाले इस फोन में 45W SuperVOOC फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट है. गेमिंग के लिए वैक्यूम चैंबर भी लगा है. 120 हर्ट्ज का रिफ्रेश रेट है. 50 मेगापिक्सल का कैमरा है. IP65 रेटिंग है और कीमत है 22,999 रुपये है. हर मायने में बढ़िया फोन दिखता है, जब तक आप इसकी रैम पर नजर नहीं डालते.

साल 2026 के स्मार्टफोन में 4GB रैम. क्या-क्या देखना पड़ रहा है. ऐसा तो आज से पांच साल पहले होता था. चलो 4GB रैम लगा दी, मगर दाम 20 हजार से ऊपर. तकरीबन दोगुना. ऐसा नहीं है कि 4GB रैम वाले फोन आते नहीं हैं. आते हैं मगर 4G फोन. 5G फोन में 6GB रैम अब नॉर्मल है. अगर एआई अच्छे से चलाना है तो कम से कम 8GB चाहिए. तो क्या स्मार्टफोन कंपनियां जानबूझकर फोन में से रैम कम कर रही हैं. नहीं, बल्कि ये सब मुआ AI का किया धरा है.
ये भी पढ़ें: Apple ने बढ़ा दिए दाम, 10 हजार से 1 लाख रुपये तक महंगे हुए प्रोडक्ट
स्मार्टफोन के दाम लगातार बढ़ रहेजब ये खबर लिख रहे थे तभी पता चला कि Nothing 4a series के दाम 4 हजार और बढ़ गए. पिछले महीने भी 4 हजार बढ़े थे. ऐप्पल को छोड़कर तकरीबन हर कंपनी पिछले कुछ महीनों में दाम बढ़ा चुकीं हैं. ऐप्पल ने आइपैड और मैक के दाम सीधे 1 लाख रुपये तक बढ़ा दिए हैं. आईफोन के दाम भी 20 हजार बढ़ने की बात हो रही है. जो कंपनी दाम नहीं बढ़ा रही वो रैम पर रुंदा लगा रही है.
रैम रगड़ने लगी हैमार्केट में RAM इन्फ्लेशन आई हुई है. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक 512GB मेमोरी के दाम में पिछले कुछ महीनों में 65 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. अकेले सैमसंग ने मेमोरी चिप का दाम 60 फीसदी तक बढ़ा दिया है. जो आपको लगे कि प्रोडक्शन कम हुआ है तो ऐसा नहीं है. बल्कि खपत बढ़ गई है. रैम को सुरसा की तरह निगलने वाले का नाम है AI. रैम की डिमांड पिछले 18 महीनों में तीन गुना हो गई है.
दरअसल AI का पूरा गेम ही रैम बोले तो मेमोरी पर टिका हुआ है. रैम AI की असली ताकत है. हर AI मॉडल को सीखने और सिखाने के लिए मेमोरी की जरूरत होती है. फिर भले वो GPT हो या LLM (large language model). AI का एक-एक मॉडल करोड़ों में नहीं बल्कि अरबों में जानकारी सेव करके चलता है. जैसे कि टेक्स्ट और तस्वीरें. यही सब जानकारी रैम में सेव होती है ताकि जरूरत पड़ने पर CPU और GPU इसका इस्तेमाल कर सकें. जाहिर सी बात है डेटा कंपनियों को रैम की जरूरत पड़ रही है.
2030 तक राहत नहींरैम की डिमांड ऐसी है कि सैमसंग और WD जैसी कंपनियों के पास अगले 2 साल के ऑर्डर एडवांस में हैं. ऐसे में फोन कंपनियों को कौन पूछ रहा. नतीजतन वो या तो कीमत बढ़ा रहीं या रैम कम कर रहीं. एक्सपर्ट 2030 तक रैम की कीमतों में राहत की उम्मीद कर रहे. तब तक… कूल रहना है.
वीडियो: AC गैस लीक पर हजारों का सर्विस चार्ज क्यों? Optimist के CEO ने सब बताया














