प्रोफेसर यशपालः जो कहते थे कि आईआईटी कोचिंग से बुरा कुछ नहीं हो सकता
भारत में पढ़ने-लिखने वाली एक पूरी पीढ़ी इनकी कर्जदार है.
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घर-घर केबल लगने के पहले जिन लोगों ने टीवी देखा है, उनके पास एक धुंधली याद है एक बूढ़े की, जो कभी-कभार दूरदर्शन पर शनिवार-रविवार आने वाले सीरियलों में साइंस समझा के जाता था. माने गैस पर पतीला रखो, तो उस पर हल्की ओस सी क्यों जमती है या ये कि चिरैया बिजली के नंगे तार पर बैठ जाती है, फिर भी उसे करंट काहे नहीं लगता. ये प्रोफेसर यश पाल थे - हमारे आस-पास के माहौल में पैदा होने वाले बेसिक सवालों के पीछे का साइंस समझाने वाले, वो भी आसान भाषा में.
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