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गांधी जी के इस चरखे का असली नाम कम ही लोग जानते हैं |

बारडोली की अपनी अलग पहचान है

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वारडोली की पहचान सत्याग्रह से शुरू होती है. 1928 में वारडोली सत्याग्रह हुआ. अंग्रेजों के लगान बढ़ाने के लिए. गुप्त मीटिंग होती थी यहां. विनोबा भावे, नेहरू, गांधी, पटेल यहां मीटिंग करते थे. बेसमेंट में प्रिंटिंग प्रेस थी. वहां से क्रांति की पत्रिकाएं निकलती थीं. यहां से एक चरखे की भी खोज हुई थी.

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