वर्ल्ड कप 2023 (World cup) के लगभग आधे लीग मुकाबले खेले जा चुके हैं. और सभी टीम्स सेमीफाइनल में पहुंचने की जद्दोजहद में लगी हुई हैं. कुछ टीम्स का सेमीफाइनल का सफर अब काफी आसान हो चुका है. इनमें इंडिया, साउथ अफ्रीका और न्यूज़ीलैंड शामिल हैं. जबकि कुछ टीम्स के सेमीफाइनल में पहुंचने की उम्मीदें लगभग खत्म हो चुकी हैं. इनमें बांग्लादेश के साथ-साथ श्रीलंका और नीदरलैंड्स शामिल हैं.
इंडियन टीम अपने शुरुआती पांचों मुकाबले जीत चुकी है और पॉइंट्स टेबल में टॉप पर रहने के साथ ही टीम सेमीफाइनल में पहुंचने की सबसे मजबूत दावेदार भी है. प्वाइंट्स टेबल में दूसरे नंबर पर है साउथ अफ्रीका. नीदरलैंड्स के खिलाफ मैच को छोड़ दें, तो टीम सारे मैच काफी बड़े अंतर से जीती है. टीम का रन रेट सबसे बेहतर है. तीसरे नंबर पर न्यूजीलैंड है. जो इंडिया के खिलाफ मैच को छोड़कर बाकी चारों मुकाबले जीत चुकी है. जबकि चौथे नंबर पर ऑस्ट्रेलिया है. जिसने शुरुआती दो मुकाबले हारने के बाद अगले दो मैचों में वापसी की है.
ये सभी टीम्स सेमीफाइनल में पहुंचने की सबसे बड़ी दावेदार भी हैं. इन टीम्स का प्रदर्शन भी अच्छा रहा है. लेकिन सभी टीम्स के किसी ना किसी डिपार्टमेंट में कुछ कमजोरी दिखी है.
World Cup में टॉप 4 टीमों का खेल बिगाड़ सकती हैं ये छोटी-छोटी कमियां, दूसरी टीम तो कभी भी...
इंडिया, साउथ अफ्रीका, न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रेलिया हैं Cricket World Cup सेमीफाइनल में पहुंचने की सबसे बड़ी दावेदार है. लेकिन इन टीम्स को अपनी कुछ समस्याओं से पार पाना होगा.


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टीम इंडिया के टेलेंडर्सशुरुआत इंडियन क्रिकेट टीम से करते हैं. मेजबान टीम ने अपने पांचों मुकाबले में ना सिर्फ जीत हासिल की है, बल्कि आसानी से विपक्षी टीम को हराया है. इंडियन टीम हर डिपार्टमेंट में सामने वाली टीम पर हावी रही है. लेकिन हार्दिक पंड्या की चोट के बाद टीम में कोई और भरोसेमंद फास्ट बोलिंग ऑलराउंडर का ना होना, 'मेन इन ब्लू' के लिए परेशानी का सबब बन सकता है. इसके अलावा टीम में एक और बड़ी समस्या लॉन्ग टेल का होना है. यानी काफी सारे पुछल्ले बल्लेबाज़ हैं. अभी तक इंडियन टीम को इन प्लेयर्स से बैटिंग की जरूरत नहीं हुई है, लेकिन आगे आने वाले मैचों में टीम के लिए ये समस्या बन सकती है.
तीसरी प्रॉब्लम जो टीम के साथ दिखाई देती है वो है-एक भी पार्ट टाइम बॉलर का ना होना. जब इंडियन टीम ने साल 2011 का वर्ल्ड कप जीता था, तब टीम के पास सचिन तेंडुलकर, वीरेंद्र सहवाग और सुरेश रैना जैसे पार्ट टाइम बॉलर्स थे. जो जरूरत के समय टीम के काफी काम भी आए. फिलहाल टीम ने पार्ट टाइम बॉलर्स से दूरी बनाए रखी है, सच कहें तो ज़रूरत ही नहीं पड़ी है.
दक्षिण अफ्रीका की डेथ बॉलिंगसाउथ अफ्रीका इस वर्ल्ड कप में अलग ही फॉर्म में नजर आ रही है. एकदम से 1999 वाली वर्ल्ड कप टाइप. जो टीम सामने आ रही है, साउथ अफ्रीका के प्लेयर्स उसको कूट दे रहे हैं. टीम के लगभग सभी बैटर्स अच्छी फॉर्म में हैं. लेकिन जब बात गेंदबाज़ी की आती है तो वहां कुछ समस्या नजर आती है. जैसे डेथ ओवर्स में अभी भी टीम को मुश्किलें होती हैं. उनकी ये कमजोरी नीदरलैंड्स के खिलाफ सामने आ भी चुकी है. वहीं प्लेइंग इलेवन में केशव महाराज के तौर पर एकमात्र स्पिनर है. इंडियन पिच पर टीम के लिए ये कमजोरी कभी भी मुश्किल पैदा कर सकती है.
पिछले कुछ सालों से आईसीसी इवेंट्स की सबसे कंसिस्टेंट टीम न्यूजीलैंड इस वर्ल्ड कप में भी कमाल का क्रिकेट खेल रही है. इंडिया के खिलाफ मैच को छोड़ दें तो टीम बाकी चारों मुकाबले जीत चुकी है. कप्तान केन विलियमसन की गैर-मौजूदगी में भी टीम ने अच्छा खेल दिखाया है. कीवी टीम में जो दिक्कत नजर आती है, वो बस पुछल्ले बल्लेबाज़ों के बल्ले से रन का नहीं आना है. इंडिया के खिलाफ मैच में ये टीम की हार का बड़ा कारण बना. वहीं टीम ने स्पिनिंग विकल्प के लिए मिचेल सैंटनर के आगे नहीं देखा है, जो कीवी टीम के लिए समस्या बन सकती है.
ऑस्ट्रेलिया का मिडिल ऑर्डरऑस्ट्रेलियन टीम ने वर्ल्ड कप में अपने अभियान की शुरुआत लगातार दो हार से की. लेकिन अगले दो मैच में टीम ने शानदार वापसी की. कंगारू टीम के लिए सबसे बड़ी प्रॉब्लम उनका मिडिल ऑर्डर रहा है. ना तो स्मिथ, ना लाबुशेन और ना ही मैक्सवेल कोई कमाल दिखा पाए हैं. वहीं कप्तान पैट कमिंस अभी तक वो कमाल नहीं दिखा पाए हैं, जिसकी उनसे उम्मीद थी. जबकि टीम की फील्डिंग भी औसत दर्जे की रही है. ऑस्ट्रेलियन टीम को सेमीफाइनल में पहुंचने की उम्मीदों को कायम रखने के लिए इन समस्याओं से पार पाना होगा.






















