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'बॉक्सिंग ना करता तो नशेड़ी बन जाता,' एशियन चैंपियनशिप्स में गोल्ड जीतने वाले 14 साल के यासिर की कहानी

Mohd Yasser Boxer: बहुत आर्थिक तंगी के बावजूद, मां ने अपने बेटे का सपना टूटने नहीं दिया. यासिर की मां ने सुनिश्चित किया कि उनके बेटे पास-पड़ोस की गलियों में भटकने के बजाय बॉक्सिंस से जुड़े रहेंगे.

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मोहम्मद यासिर ने एशियन अंडर-15 बॉक्सिंग चैंपियनशिप्स में गोल्ड मेडल जीता. (फोटो- PTI)

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  • 14 साल के मोहम्मद यासिर ने 14 मई को उज्बेकिस्तान के ताशकंद में एशियन अंडर-15 बॉक्सिंग चैंपियनशिप्स में 58 किलोग्राम वर्ग का गोल्ड मेडल जीता।
  • मोहम्मद यासिर का परिवार आर्थिक तंगी और बेघरपन की स्थिति से जूझ रहा था, और उन्होंने तीन साल तक पार्ट-टाइम रसोइया का काम किया ताकि परिवार का समर्थन कर सकें।
  • यासिर ने तीन साल तक खेलो इंडिया कार्यक्रम के तहत ट्रेनिंग ली, और अब उनका लक्ष्य ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करना है।

14 साल के इंडियन बॉक्सर मोहम्मद यासिर (Mohd Yasser) का जम्मू-कश्मीर के राजौरी में शानदार स्वागत किया गया. उज्बेकिस्तान में भारत का नाम रोशन करने वाले यासिर 22 मई को राजौरी स्थित अपने घर पहुंचे, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने उनका गर्मजोशी के साथ ग्रैंड वेलकम किया. लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत करते हुए, माला पहनाकर कंधे पर बैठाया.

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यासिर ने 14 मई को उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में हुई एशियन अंडर-15 बॉक्सिंग चैंपियनशिप्स में 58 किलोग्राम वर्ग का गोल्ड मेडल जीता था. फाइनल मुकाबले में उन्होंने उज्बेकिस्तान के बॉक्सर अब्दुल्ला करीमजोनोव (Abdullah Karimjonov) को हराकर खिताब अपने नाम किया और भारत का परचम लहराया.

बाक्सर बनना आसान नहीं था

मोहम्मद यासिर के गोल्ड मेडल जीतने के बाद भले ही जम्मू-कश्मीर समेत देश भर में जश्न का माहौल हो, लेकिन उनका बॉक्सर बनने का सफर आसान नहीं था. उन्होंने 14 साल की उम्र में काफी कुछ झेला है. यासिर जब 6 साल के थे, तब उनके पिता का इंतकाल हो गया. घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. वह गरीबी में पले पढ़े. उनके पास रहने के लिए घर नहीं था. जिस घर में वह अपनी फैमिली के साथ रहते थे, उसे अतिक्रमण की वजह से गिरा दिया गया था.

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पुश्तैनी गांव से निकाले जाने के बाद, यासिर अपनी मां नसीमा और भाई-बहन के साथ राजौरी के डिस्ट्रिक्ट इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग (DIET) के एक कमरे में रहने लगे. खाने के लिए पैसों की जरूरत थी. हालात ने यासिर को रसोइया बना दिया. उन्होंने अपनी मां और फैमिली को सपोर्ट करने के लिए 3 साल तक पार्ट-टाइम रसोइये का काम किया. उनकी मां भी दूसरों के घरों में काम करने जातीं.

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यासिर कैसे बने बॉक्सर?

मोहम्मद यासिर का बॉक्सर बनने का कोई इरादा नहीं था. बस एक घटना ने उन्हें बॉक्सर बना दिया. मोहम्मद यासिर के कोच इश्तियाक मलिक के मुताबिक, यासिर लोकल स्टेडियम में ट्रेनिंग करने वाले बॉक्सर्स के लिए पानी भरते थे. एक दिन काम के 15 रुपये नहीं मिलने पर यासिर की एक लोकल बॉक्सर से फाइट हो गई.

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इश्तियाक मलिक यह फाइट कुछ दूर से देख रहे थे. उन्हें यासिर में कुछ स्पेशल दिखा. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने इस घटना को याद करते हुए कहा,

जब सीनियर लड़के यासिर और फरीद को उनके काम के पैसे नहीं देते थे, तो वे दोनों अपने घर के पास वाले स्टेडियम में उनसे भिड़ जाते थे. मैं उनके लड़ने के हुनर ​​और उनके रवैये से बहुत प्रभावित हुआ. शुरू में मैंने उनकी मां को उनकी बॉक्सिंग ट्रेनिंग के बारे में नहीं बताया था.

'खेलो इंडिया' से जुड़े यासिर

लोकल बॉक्सर के साथ हुई फाइट यासिर का लाइफ-चेंजिंग मोमेंट था. यासिर ने पिछले तीन सालों से ‘खेलो इंडिया’ प्रोग्राम के तहत ट्रेनिंग ली है. कोच इश्तियाक मलिक ने उन्हें घर पर करीब से गाइड किया. यासिर के मुताबिक,

मैंने पिछले तीन सालो से खेलो इंडिया के तहत अपने कोच इश्तियाक मलिक से ट्रेनिंग ली है. उनके सपोर्ट और गाइडेंस की वजह से ही मैं इतना अच्छा कर पाया हूं.

बॉक्सिंग न होती ड्रग्स की लत लग जाती

बॉक्सर मोहम्मद यासिर का मानना है कि अगर बॉक्सिंग न होती, तो वह और उनके भाई को नशे की लत लग जाती. क्योंकि राजौरी के जिस ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में यासिर अपनी फैमिली के साथ रहे, वहां का माहौल काफी खराब है. यह इलाका ड्रग्स की लत से जूझ रहा था. इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए यासिर ने कहा,

अगर मैंने और मेरे छोटे भाई ने बॉक्सिंग शुरू नहीं की होती, तो हमें नशे की लत पड़ गई होती.

यासिर बेहतरीन बॉक्सर

कोच इश्तियाक मलिक, मोहम्मद यासिर की गोल्डन सक्सेस काफी खुश हैं. उन्होंने यासिर की तारीफ करते हुए कहा,

यासिर एक उम्दा बॉक्सर हैं. उनकी जिंदगी अपने आप में एक कहानी है. वह बहुत गरीब और बेघर परिवार से हैं. लेकिन, उन्होंने सभी मुश्किलों का सामना किया. इस शानदार कामयाबी को पाने के लिए पूरी लगन और मेहनत से काम किया.

मां ने बना दिया होनहार बाॉक्सर

बेहद आर्थिक तंगी के बावजूद, मां ने अपने बेटे का सपना टूटने नहीं दिया. यासिर की मां ने सुनिश्चित किया कि उनके बेटे पास-पड़ोस की गलियों में भटकने के बजाय बॉक्सिंस से जुड़े रहेंगे. उनकी मां नसीमा खुद हाउस हेल्प का काम करती हैं. लेकिन, उन्होंने अपने बच्चों को हमेशा प्लेग्राउंड भेजना जारी रखा.  

अब उनकी मां के इस फैसले ने यासिर की लाइफ बदल दी. यासिर महज तीन साल की ट्रेनिंग में भारत के होनहार युवा बॉक्सर बन गए हैं. एशियन अंडर-15 बक्सिंग चैंपियनशिप्स में गोल्ड मेडल जीतने के बाद अब उनका सपना ओलंपिक में खेलने का होगा. 

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