The Lallantop

43.3 ओवर में 406 रन चेज! गुवाहाटी का ये 'रन-हाईवे' वर्ल्ड कप से पहले खतरे की घंटी क्यों है?

Ind vs WI : टीम इंडिया ने वेस्टइंडीज के ख‍िलाफ ODI सीरीज में 2-0 की बढ़त बना ली है. गुवाहाटी में हुए दूसरे ODI में भारतीय टीम ने रिकॉर्ड 405 रन चेज कर लिए. लेकिन, इस पिच से कोच Gautam Gambhir भी बहुत खुश नज़र नहीं आए.

Advertisement
post-main-image
शुभमन गिल ने वेस्टइंडीज के ख‍िलाफ दूसरे ODI में नाबाद 223 रनों की पारी खेली. (Courtesy : AP)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • 30 सितंबर को गुवाहाटी के बरसापारा स्टेडियम में टीम इंडिया ने ODI मैच में 405 रन के टारगेट को 43.3 ओवर में 2 विकेट पर 406 रन बनाकर सफलतापूर्वक चेज किया।
  • यह मैच एक सपाट पिच पर खेला गया जिसमें बॉलर्स को गेंदबाजी में कोई मदद नहीं मिली, जिससे बैटिंग पक्ष को आसानी से रन बनाने का मौका मिला।
  • इस तरह की पिच पर ट्रेनिंग टीम इंडिया के लिए वर्ल्ड कप 2027 में चुनौती बन सकती है, क्योंकि दक्षिण अफ्रीका की पिचें ज्यादा उछाल और स्विंग देती हैं।

गुवाहाटी के बरसापारा स्टेडियम में टीम इंडिया ने ODI में सबसे बड़ा रन चेज मुकम्मल कर दिया. 30 सितंबर को खेले गए मुकाबले में बैटिंग में कई कीर्तिमान रचे गए. वेस्टइंडीज ने पहले बैटिंग की और बोर्ड पर 405 रन टांग दिए. ODI क्रिकेट के लिहाज से ये बहुत बढ़‍िया टोटल है. लेकिन, टीम इंडिया ने महज 43.3 ओवर में 2 विकेट पर 406 रन कूट डाले.

Advertisement

माने एक ही ODI मैच में कुल 811 रन बन गए. मैच के दौरान 5 सेंचुरीज लगीं. वेस्टइंडीज की तरफ से जॉन कैंपबेल, शे होप और आमिर जंगू ने शतक ठोका. वहीं, टीम इंडिया के दोनों ओपनर्स रोहित शर्मा और शुभमन गिल ने सैकड़ा जड़ दिया. कप्तान गिल ने तो ऐतिहासिक पारी खेल दी. नाबाद 223 रन. 133 गेंदों की उनकी ये पारी में सालों तक याद की जाएगी.

स्कोरबोर्ड और रिकॉर्डबुक के लिहाज से, ये मुकाबला किसी ब्लॉकबस्टर मूवी से कम नहीं था. फैंस खुश थे. ब्रॉडकास्टर्स की चांदी थी. लेकिन, क्या ऐसी पिच पर खेलकर टीम इंडिया वर्ल्ड कप जीत लेगी? ये सवाल सिर्फ हम नहीं उठा रहे. खुद कोच गौतम गंभीर ने भी मैच के बाद ये सवाल उठा दिया था. गंभीर ने साफ शब्दों में कहा था कि ये क्रिकेट नहीं है. ये सिर्फ बैटिंग है. बैट और बॉल के बीच कॉन्टेस्ट होना चाहिए.  

Advertisement

गंभीर की ये नाराजगी सिर्फ एक मैच को लेकर नहीं है. 2027 ODI वर्ल्ड कप की तैयारियों के चश्मे से देखें, तो गुवाहाटी की यह 'सपाट NH' जैसी पिच टीम इंडिया के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकती है. कैसे? चलिए परत-दर-परत समझते हैं.

तैयारी हो रही या स्टैट पैडिंग?

ODI क्रिकेट के 52 साल के इतिहास में भारत ने पहली बार 400+ का टारगेट चेज किया. सुनने में यह उपलब्धि बहुत बड़ी लगती है. लेकिन, क्या ये सच में इतना बड़ा अचीवमेंट है?

टीम इंडिया ने जितनी आसानी से टारगेट हासिल किया, पिच को लेकर सवाल खड़े होना लाजमी है. भारत ने 9.33 के रन रेट से बैटिंग की. 39 गेंद बाकी रहते 406 रन बना लिए. आलम यह था कि सिर्फ 29.1 ओवर में टीम इंडिया के 300 रन पूरे हो चुके थे.

Advertisement

50 ओवर के खेल में 811 रन बन जाएं. 93.3 ओवर में सिर्फ 9 विकेट गिरें. माने साफ है कि ये मैच नहीं था, बल्कि स्टैट पैडिंग कॉन्टेस्ट था. मतलब बैटर्स के टेक्निक नहीं, पावर हिटिंग का मुकाबला था. बॉलर्स का तो कोई अस्तित्व ही नहीं था.

झूठा दिलासा सबसे बड़ा खतरा

अब आते हैं कि इसमें समस्या क्यों है? ऐसी पाटा पिचों पर बॉल कोई हरकत नहीं करती. उनमें न अनइवन बाउंस होता है, न उनकी लाइन बदलती है. माने बैटर्स खड़े-खड़े पिच पर आंखें मूंदकर थ्रू द लाइन शॉट खेल सकते हैं. उन्हें सिर्फ एक चीज सही करनी होती है, टाइमिंग.

यही प्रॉब्लम की सबसे बड़ी जड़ है. ऐसी पिचेज बैटिंग टीम को सिर्फ झूठा दिलासा देती है. लेकिन, इसका खामियाजा ICC टूर्नामेंट के नॉकआउट मैचों में भुगतना पड़ता है. खासकर वैसे मौकों पर जब पिच से थोड़ी सी भी मदद या हरकत मिलना शुरू हो. पाटा विकेट के शेर ऐसी पिच पर ताश के पत्तों की तरह बिखर जाते हैं.

ये भी पढ़ें : Asian Games : पाकिस्तान ने वॉलीबॉल में भारत को हराया, क्रिकेट के फाइनल में भी पहुंचे 

वेन्यू / कंडीशंस पिच का मिजाज टीम इंडिया के सामने चुनौती
साउथ अफ्रीका (जोहान्सबर्ग, सेंचुरियन, डरबन, केपटाउन) पेस और बाउंस
अतिरिक्त उछाल (Extra Bounce), तेज सीम और शुरुआती ओवरों में स्विंग
फ्रंटफुट पर खड़े होकर मारने की आदत वहां स्लिप और कीपर के हाथों में कैच थमाएगी.
जिंबाब्वे और नामीबिया (हरारे, बुलावायो, विंडहोक) धीमी और दोहरी गति
सुबह के समय नमी, धीमी गति और 'टू-पेस्ड' (दोहरी गति) सतह
गेंद रुककर आती है; 9 के रन-रेट से भागने के बजाय वहां स्ट्राइक रोटेट करने और पार्टनरशिप बुनने का कौशल चाहिए.
गुवाहाटी की पिच (भारत बनाम वेस्टइंडीज) सपाट ट्रैक
पूरी तरह फ्लैट, न स्विंग, न सीम और न ही स्पिनर्स के लिए टर्न
गेंदबाजों के लिए सिर्फ 'डैमेज कंट्रोल', बल्लेबाजों के लिए बिना जोखिम की बैटिंग.
अफ्रीका में ऐसी 'सड़क' कतई नहीं मिलेगी

अगला ODI वर्ल्ड कप 2027 के अक्टूबर-नवंबर में साउथ अफ्रीका, जिंबाब्वे और नामीबिया में होना है. इससे पहले होने वाले सभी बाइलैटरल सीरीज का सिर्फ एक ही उद्देश्य है. टीम को वहां के कंडिशंस के मुताबिक तैयार करना. गुवाहाटी की पिच इस काम में बुरी तरह फेल रही.  

साउथ अफ्रीका में 280 से 310 रन के बीच का स्कोर पार स्कोर होता है. माने अगर किसी टीम ने इतने रन बना लिए तो बहुत चांस है कि वही टीम जीते. नई कूकाबुरा बॉल के ख‍िलाफ शुरुआत 10 ओवर खेलना ही अपने आप में कला है. अब आते हैं गुवाहाटी की पिच पर. यहां हमारी बैटिंग देख अगर ये भ्रम करेंगे कि हमारा बैटिंग लाइन अप अजेय है. ये मानना खुद की आंखों में धूल झोंकने जैसा ही होगा.

युवा बॉलर्स के मनोबल की धज्जियां उड़ गईं

दूसरी तरफ ये बॉलर्स के मनोबल के लिहाज से भी बहुत बुरा है. टीम इंडिया के बैटर्स ने चेज को बहुत एंजॉय किया. लेकिन, क्या बॉलर्स वेस्टइंडीज की बैटिंग का लुत्फ उठा सके? जवाब है बिल्कुल नहीं. क्योंकि मैच के दौरान उनकी बेबसी साफ नज़र आ रही थी.

शुरू में ही बॉलर्स ये समझ गए थे कि उन्हें विकेट के लिए नहीं जाना. कैरिबियन बैटर्स की कुटाई से बचना है. पेसर्स तो पेसर्स स्पिनर्स की भी दशा अलग नहीं थी. मैच के बाद कोच गौतम गंभीर ने बॉलर्स के इसी दर्द पर बात की. उन्होंने कहा,

कल्पना कीजिए कि आकिब नबी जैसा युवा गेंदबाज अपना पहला मैच खेल रहा है और सामने वाली टीम 400 रन बना देती है. ऐसे विकेट पर गेंदबाजी करना बॉलर्स के साथ सरासर नाइंसाफी है. आपको यंग बॉलर्स को थोड़ा सपोर्ट और कुशन देना पड़ता है. लेकिन यहां किसी भी बॉलर के लिए कुछ नहीं था.

गेंदबाज लुटाए गए रन स्पेल और इकॉनमी का हाल
आकिब नबी (डेब्यू मैच) 84 रन 8.5 ओवर में बिना किसी विकेट के इकॉनमी 9.50
गुरनूर बराड़ 96 रन 10 ओवर में 2 विकेट लेकर लुटाए इकॉनमी 9.60
प्रसिद्ध कृष्णा 45 रन सिर्फ 5 ओवर का स्पेल इकॉनमी 9.00
रवींद्र जडेजा 75 रन 10 ओवर में खर्च किए इकॉनमी 7.50
कुलदीप यादव 65 रन 10 ओवर में खर्च किए इकॉनमी 6.50

घर पर अगर बॉलर्स को ऐसी पिच मिलेगी, तो उनका मोराल तो पहले ही डाउन हो जाएगा. वह विकेट लेने के बजाय सिर्फ रन रोकने पर फोकस करने लगेंगे. कभी यॉर्कर तो कभी स्लोअर वन फेंकने के चक्कर में अपना नेचुरल टिप्पा और रिदम दोनों खो बैठेंगे. वर्ल्ड कप से पहले टीम इंडिया अपनी पेस बैटरी के बैकअप को तराशने में जुटी है. इसी क्रम में गुरनूर, आकिब, प्रसिद्ध को मौके दिए जा रहे हैं. लेकिन, ऐसी बेजान पिचेज तो उनके आत्मविश्वास को पहले ही चकनाचूर कर देंगी.

कुल जमां बात ये है कि रोहित का 35वां ODI शतक. शुभमन गिल की रिकॉर्डतोड़ डबल सेंचुरी. फैंस को रोमांचित करने और ब्रॉडकास्टर्स की टीआरपी बढ़ाने के लिए तो शानदार है. लेकिन, वर्ल्ड कप की ट्रॉफी उठाने के लिए बैटर्स और बॉलर्स की तैयारी के लिहाज से ये बहुत खतरनाक है. अगर घर में ऐसी ही 'बैटिंग मशीन' वाली पिचेज बनती रहीं, तो साउथ अफ्रीका की उछाल लेती पिचों पर उतरते ही टीम इंडिया को बहुत कड़वी असलियत का सामना करना पड़ेगा.

वीडियो: टीम इंडिया के पेसर्स वेस्ट इंडीज के सामने हुए फ्लॉप

Advertisement