उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में दो साधुओं की मंदिर में हत्या कर दी गई. वारदात छिपाने के लिए आरोपियों ने उनके शवों को जला दिया. मृतकों की पहचान बाबा गोपाल दास और बाबा बिहारी दास के रूप में हुई है. दोनों बुजुर्ग साधु मंदिर की देखभाल करते थे. पुलिस ने एक संदिग्ध को पकड़ा है. उससे पूछताछ की जा रही है.
गुरु-शिष्य बनकर रह रहे साधुओं की हत्या, मंदिर में मिले जले हुए शव
Shahjahanpur Sadhu double murder: शाहजहांपुर के एक शिव मंदिर में दो साधुओं की हत्या कर दी गई. हत्या का आरोप एक साधु के भतीजे पर लगा है. पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है.

हिरासत में लिए गए शख्स की पहचान सुमित के रूप में हुई है. बताया गया कि वो बाबा बिहारी दास का भतीजा है. इंडिया टुडे से जुड़े विनय पांडे की रिपोर्ट के मुताबिक, घटना खुदागंज क्षेत्र के सूथा गांव में हुई. दोनों साधु शिव मंदिर में रहकर उसकी देखभाल करते थे. बुधवार, 30 सितंबर की रात उन दोनों की हत्या की गई. फिर मंदिर में ही लकड़ी की चिता बनाकर शवों को जला दिया गया.
दोनों के शव पड़े थे 10 मीटर दूरगुरुवार, 1 अक्टूबर की सुबह गांव वाले मंदिर से धुआं निकलता देख वहां पहुंचे. उन्होंने देखा कि एक साधु का शव जल रहा था. दूसरे बाबा का शव जलकर कंकाल हो गया था. दोनों शव एक-दूसरे से 10 मीटर दूर पड़े थे.
साधुओं की मौत की खबर जल्दी ही पूरे गांव में फैल गई. पुलिस को मामले की जानकारी दी गई, जो तुरंत मौके पर फॉरेंसिक टीम के साथ पहुंची. दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय लोगों ने बाबा बिहारी दास के भतीजे प्रदीप सिंह पर हत्या का आरोप लगाया. उनका कहना है कि वह मंदिर की जमीन पर कब्जा करना चाहता था.

प्रदीप ने बिहारी दास के दूसरे भतीजे सुमित पर 'डबल मर्डर' का इल्जाम लगाया. उसका कहना है कि सुमित ने उन पर कई बार हमला किया था. उसने गांव के एक व्यक्ति की कार जला दी थी. एक महीने पहले ही सुमित जेल से छूटकर आया था.
पुलिस ने आरोपों के आधार पर उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है. आरोप है कि वह मंदिर में अपनी जगह बनाना चाहता था. इसलिए उसने घटना को अंजाम दिया. रिपोर्ट के मुताबिक, सुमित शादीशुदा है. परिवार में पत्नी और दो जुड़वा बच्चे हैं. एक लड़का और एक लड़की. दोनों की उम्र 10 साल है. जांच में ये बात भी सामने आई है कि वह मेंटली डिस्टर्ब्ड है. उसका इलाज चल रहा है.
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गांववालों ने बताया कि बाबा गोपाल दास करीब 20 साल से मंदिर में रह रहे थे. 60 वर्षीय बिहारी दास पहले सूथा गांव के ही ठाकुर जी मंदिर में रहते थे. उनकी शादी नहीं हुई थी. एक महीने पहले वह गोपाल दास के शिष्य बने. इसके बाद दोनों गुरु-शिष्य शिव मंदिर में रहने लगे.
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