साल 2025 में वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) का नाम खूब गूंजा था. सिर्फ 13 साल की उम्र में लड़के ने गदर काट दिया था. अब वैसा ही भौकाल विमेंस क्रिकेट में भी देखने को मिला है. नाम है उमा काश्वी (Uma Kashvi). उम्र महज 15 साल और 202 दिन.
15 की उम्र में WPL रिकॉर्ड बनाने वाली उमा काश्वी कौन हैं? चाचा ने छोड़ दी नौकरी-शादी, मां ने किया ग्राउंड से काम
WPL 2027 Auction : कर्नाटक की 15 साल की ऑलराउंडर Uma Kashvi ने इतिहास रच दिया. Delhi Capitals ने उन्हें 10 लाख रुपये में खरीदा, जिससे वह WPL इतिहास में बिकने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बन गईं.

28 अक्टूबर को कोच्चि में WPL 2027 का ऑक्शन हुआ. इस ऑक्शन में उमा काश्वी ने इतिहास रच दिया. दिल्ली कैपिटल्स ने उन्हें 10 लाख रुपये में खरीदा. इसके साथ ही काश्वी WPL इतिहास में बिकने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बन गईं. उन्होंने दीया यादव (Deeya Yadav) का रिकॉर्ड तोड़ दिया. दीया को पिछले साल 16 की उम्र में खरीदा गया था.
चाचा का रहा है बड़ा योगदानजब कोच्चि में बोली लग रही थी, तब काश्वी बिलासपुर में थीं. वहां 30 अक्टूबर से विमेंस अंडर-19 टी20 चैलेंजर ट्रॉफी शुरू हो रही है. काश्वी अपने टीम होटल के कमरे में थीं. उनके माता-पिता और चाचा भी बिलासपुर में ही दूसरे होटल में रुके थे. जैसे ही दिल्ली कैपिटल्स ने काश्वी का नाम पुकारा, सब खुशी से चीख पड़े. उनके चाचा विजय की आंखों में आंसू आ गए.
चाचा का रोना लाजमी भी था. काश्वी को यहां तक पहुंचाने के पीछे पूरे परिवार की 8 साल की तपस्या है. द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट बताती है कि काश्वी की इस कामयाबी के पीछे कितनी कुर्बानियां हैं.
काश्वी के पिता प्रवीण कुमार और मां विजिता, दोनों आईटी सेक्टर में काम करते हैं. उनके चाचा विजय भी आईटी में ही नौकरी करते थे. जब काश्वी 7-8 साल की थीं, तब घर में खेलते हुए चाचा विजय ने उनका टैलेंट पहचाना.
इसके बाद चाचा ने एक बड़ा फैसला लिया. उन्होंने अपनी फुल-टाइम आईटी की नौकरी छोड़ दी. पार्ट-टाइम काम पकड़ा, ताकि भतीजी के क्रिकेट पर पूरा ध्यान दे सकें. इतना ही नहीं, विजय ने शादी और रिश्तों से भी दूरी बना ली. घर के बड़े-बुजुर्गों ने खूब सवाल उठाए. परिवार ने शादी-ब्याह और फंक्शन में जाना छोड़ दिया. साल में तीन-चार दिन की छुट्टी भी उनके लिए किसी उपलब्धि जैसी होती थी.
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बचपन से फौजी जैसा था काश्वी का रूटीनकाश्वी का रूटीन भी किसी फौजी से कम नहीं था. आठ साल की उम्र से वह सुबह 5 बजे उठती थीं. रनिंग और एक्सरसाइज करतीं. फिर चाचा विजय उन्हें क्रिकेट ड्रिल्स कराते. इसके बाद पूरा दिन स्कूल. शाम को साढ़े चार से साढ़े छह बजे तक दो घंटे फिटनेस. फिर सोने से पहले 90 मिनट की क्रिकेट प्रैक्टिस. चाचा विजय ने शुरुआती 6 से 8 महीनों तक रोज उन्हें 30 ओवर यानी करीब 180 गेंदें थ्रो-डाउन फेंकीं.
शुरुआत में काश्वी लड़कों और सीनियर खिलाड़ियों के साथ कॉर्पोरेट मैच खेलती थीं. उम्र कम थी, तो उन्हें 11वें नंबर पर बैटिंग मिलती. बॉलिंग शायद ही कभी मिलती. बस 30-30 ओवर फील्डिंग करनी पड़ती. लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी.
मां मैदान से करती थीं ऑफिसमां विजिता का रोल भी कमाल का रहा. वह एक आईटी मैनेजर हैं. करियर के बेहद अहम मोड़ पर होने के बावजूद वह बेटी के साथ हर मैदान पर जाती हैं. दूर-दराज के जिन मैदानों पर लड़कियों के लिए अच्छी सुविधाएं नहीं होतीं, वहां मां का साथ होना जरूरी था. इसलिए विजिता मैदान की सीढ़ियों पर बैठकर ही ऑफिस की जूम मीटिंग्स निपटाती हैं. पिछले सात सालों में चाचा विजय काश्वी के साथ 500 से ज्यादा मैचों में ट्रैवल कर चुके हैं. वहीं मां विजिता 400 से ज्यादा मैचों में साथ रही हैं.
त्याग यहीं खत्म नहीं हुआ. जब काश्वी ने बेंगलुरु के बाहरी इलाके में स्थित NICE क्रिकेट एकेडमी में कोच अर्जुन देव और किरण उप्पूर के पास ट्रेनिंग शुरू की, तो परिवार दो हिस्सों में बंट गया. माता-पिता बेलंदूर वाले घर में रहे. चाचा विजय ने काश्वी के साथ एकेडमी के पास ही किराए पर घर ले लिया, ताकि आने-जाने में वक्त न बर्बाद हो.
ऑलराउंडर हैं काश्वीमैदान पर काश्वी के आंकड़े बताते हैं कि यह मेहनत बेकार नहीं गई. वह मिडिल ऑर्डर में ताबड़तोड़ बैटिंग करती हैं. राइट-आर्म ऑफ स्पिन फेंकती हैं. कोच अर्जुन देव के मुताबिक, वह एक 'गन फील्डर' हैं.
सिर्फ 9 साल की उम्र में उन्हें इंडिया निप्पॉन कप में 'यंग टैलेंट अवॉर्ड' मिला था. तब उन्होंने वेदा कृष्णमूर्ति, जेमिमा रोड्रिग्स, दीप्ति शर्मा और श्रेयंका पाटिल के साथ ड्रेसिंग रूम शेयर किया था. 12 साल की उम्र में बेंगलुरु के एक इंटर-स्कूल टूर्नामेंट में उन्होंने नाबाद 217 रन कूट दिए थे.
पिछले साल सबके नजर में आईंअसली भौकाल तो 2025-26 की विमेंस अंडर-15 ODI ट्रॉफी में दिखा. काश्वी टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी रहीं. उन्होंने 172 के अद्भुत औसत से 516 रन ठोके. इसमें तीन शतक और एक अर्धशतक शामिल था. 10 जनवरी 2026 को कोलकाता में मणिपुर के खिलाफ उन्होंने जो किया, वह अद्भुत था. काश्वी ने सिर्फ 66 गेंदों में नाबाद 158 रन जड़ दिए. इस पारी में 23 चौके और 7 छक्के शामिल थे. कर्नाटक ने वह मैच 275 रनों से जीता.
वह कर्नाटक की अंडर-15 टीम की कप्तानी भी कर चुकी हैं. साथ ही महारानी ट्रॉफी में सीनियर खिलाड़ियों के बीच बेंगलुरु ब्लास्टर्स की कमान भी संभाली. वहां मैसूर वॉरियर्स के खिलाफ उन्होंने 42 गेंदों में 48 रनों की शानदार पारी खेली थी.
गेंदबाजी में भी उनका जलवा कायम है. जून-जुलाई 2026 में श्रीलंका के खिलाफ इंडिया अंडर-19 की तरफ से खेलते हुए उन्होंने तीन टी20 में 4 विकेट और दो वनडे में 2 विकेट चटकाए. वहीं, 22 अक्टूबर 2026 को विमेंस अंडर-19 टी20 ट्रॉफी के क्वार्टर फाइनल में विदर्भ के खिलाफ उन्होंने 4 ओवर में सिर्फ 18 रन देकर 3 विकेट झटके. कर्नाटक ने वह करीबी मैच 6 रन से जीता और काश्वी 'प्लेयर ऑफ द मैच' बनीं.
कोच ने क्या बताया?इंडिया टुडे से बात करते हुए उनके कोच अर्जुन देव ने कहा कि 15 साल की उम्र में काश्वी की मैच्योरिटी और खेल की समझ हैरान करने वाली है. वह किसी आम 15 साल की लड़की जैसी नहीं हैं. हालांकि, काश्वी को दिल्ली कैपिटल्स की जर्सी पहनने के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है. वजह है अंडर-19 विमेंस टी20 वर्ल्ड कप. यह टूर्नामेंट बांग्लादेश और नेपाल में होना है. इसकी तारीखें WPL 2027 (14 जनवरी से 7 फरवरी) से टकरा रही हैं. और काश्वी भारतीय अंडर-19 वर्ल्ड कप टीम के प्लान का अहम हिस्सा हैं.
कोच अर्जुन देव भी मानते हैं कि WPL में नाम आना सबके लिए एक सुखद सरप्राइज था. अब चाहे वह पहले वर्ल्ड कप खेलें या दिल्ली कैपिटल्स के ड्रेसिंग रूम में मारिजाने कैप और एनाबेल सदरलैंड जैसी दिग्गजों के साथ बैठें. इतना तय है कि भारतीय क्रिकेट को एक नया सितारा मिल गया है.
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